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'पूर्व प्रधानमंत्री के निधन के बाद शीला ने मुझे संभाला', सोनिया और राहुल ने दी श्रद्धांजलि
Sat, 10 Aug 2019 10:39 PM IST
शाहरुख खान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शाहरुख खान
Updated Sat, 10 Aug 2019 10:39 PM IST
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शीला दीक्षित को दी श्रद्धांजलि
- फोटो : अमर उजाला
पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को श्रद्घांजलि देने के लिए शनिवार को बारखंभा रोड स्थित मॉडर्न पब्लिक स्कूल के सभागार में सभा हुई। इसमें सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, कम्युनिस्ट पार्टी के सीताराम येचुरी, अभिनेत्री शर्मिला टैगोर उपस्थित रहीं।
पूर्व सीएम के पुत्र व पूर्व सांसद संदीप दीक्षित की ओर से आयोजित इस सभा में नेताओं ने शीला दीक्षित को याद किया और उन्हें कभी न भूलने वाली शख्सीयत बताया। यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी ने कहा कि शीला दीक्षित जो तय कर लेती थीं, वह करती थीं।
वे धैर्य के साथ काम को अंजाम देती थीं। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के निधन के बाद उन्होंने मुझे संभाला। वे कई बार मार्गदर्शन भी करती थीं। उन्होंने दिल्ली में कांग्रेस को नई दिशा दी और 15 साल तक विकास का क्रम जारी रखा।
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निजी जिंदगी में शीला दीक्षित ने बड़ी बहन की तरह उनकी देखभाल की। कांग्रेस अध्यक्ष बनने पर उन्होंने कई मामलों में उन्हें सलाह दी। सीताराम येचुरी ने कहा कि शीला दीक्षित स्वच्छ राजनीति करने वाली महिला थीं।
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पूर्व सीएम के पुत्र व पूर्व सांसद संदीप दीक्षित की ओर से आयोजित इस सभा में नेताओं ने शीला दीक्षित को याद किया और उन्हें कभी न भूलने वाली शख्सीयत बताया। यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी ने कहा कि शीला दीक्षित जो तय कर लेती थीं, वह करती थीं।
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वे धैर्य के साथ काम को अंजाम देती थीं। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के निधन के बाद उन्होंने मुझे संभाला। वे कई बार मार्गदर्शन भी करती थीं। उन्होंने दिल्ली में कांग्रेस को नई दिशा दी और 15 साल तक विकास का क्रम जारी रखा।
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निजी जिंदगी में शीला दीक्षित ने बड़ी बहन की तरह उनकी देखभाल की। कांग्रेस अध्यक्ष बनने पर उन्होंने कई मामलों में उन्हें सलाह दी। सीताराम येचुरी ने कहा कि शीला दीक्षित स्वच्छ राजनीति करने वाली महिला थीं।
राजनीति में विचारों का मतभेद हो सकता है, निजी मतभेद नहीं होना चाहिए। हालांकि अब ऐसी ही राजनीति हो रही है। नफरत और हिंसा का माहौल है। येचुरी ने कहा कि आपातकाल के पहले 1970 में मेरी शीला दीक्षित से मुलाकात हुई थी।
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तब वे अशोका रोड स्थित एक छोटे से कार्यालय में काम करती थीं। उस वक्त हम जेएनयू में थे। मुलाकात में उन्होंने मुझ पर अलग छाप छोड़ी।
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