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दिल्ली की हवा ही ले रही है रोज 80 लोगों की जान

Wed, 17 Jun 2015 04:57 PM IST
Updated Wed, 17 Jun 2015 04:57 PM IST
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polluted air taking 80 lives each day in delhi

दिल्ली की हवा फैला हुआ प्रदूषण सांसों के जरिए मनुष्य के अंदर जाकर ऐसा संक्रमण पैदा कर सकता है कि जिससे दिल्ली में 10 हजार से लेकर 30 हजार लोगों की मौत हो सकती है।

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अगर औसतन देखें तो 80 लोगों की मौत रोज होगी। ऐसा हम नहीं मंगलवार को जारी हुए एक अंतरराष्ट्रीय अध्ययन के शोधकर्ता कह रहे हैं।

एनवायरनमेंट साइंस एंड टेक्नोलॉजी जर्नल में प्रकाशित इस शोध को करने वाले वैज्ञानिक कहते हैं कि ये मौतें अधिकतर हार्ट अटैक और स्ट्रोक से होती हैं नाकि कि किसी सांस की बीमारी से।

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दिल्ली की हवा में सबसे ज्यादा है पीएम 2.5

polluted air taking 80 lives each day in delhi

इस अध्ययन के अनुसार दिल्ली में रोजाना होने वाली मौतों को 45 प्रतिशत तक होने से बचाया जा सकता है। अगर दिल्ली की हवा राष्ट्रीय मानकर स्तर पर आ जाए तो इन मौतों को रोका जा सकता है।

बता दें कि ये मौतें पीएम 2.5 मैटर के कारण हो रही हैं जो हार्ट अटैक की वजह बनती है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर दिल्ली चाहे तो WHO के मानक को फॉलो करते हुए दिल्ली में प्रदूषित वायु के कारण होने वाली मौतों को 85 प्रतिशत तक रोका जा सकता है।

इस अध्ययन में बताया गया कि पूरे भारत में 3-4 लाख प्रीमैच्योर मौतों को होने से रोका जा सकता है अगर विश्व स्वास्थ संगठन के मानक को माना जाए। लेकिन भारत में वायु में मौजू पीएम 2.5 को कम करने की कोई सोच ही नहीं रहा। अगर ऐसा नहीं किया गया तो वायु प्रदूषण से होने वाली मौतों का आंकड़ा 20-30 प्रतिशत बढ़ जाएगा।

छोटे-मोटे उपायों से नहीं बनेगी बात

polluted air taking 80 lives each day in delhi

इस अध्ययन के बाद यह पाया गया है कि दिल्ली के हर घन मीटर में 150 माइक्रोग्राम्स पीएम 2.5 है। इसका मतलब है कि इतना प्रदूषण है जो राष्ट्रीय मानक से चार गुना और डब्लयूएचओ के तय किए गए मानक से 15 गुना अधिक है।

यह अध्ययन यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास के जो‌शुआ एस आप्टे, यूनिवर्सिटी ऑफ मिनीसोट के जूलियन ‌डी मार्शल, हेल्थ इफेक्ट्स इंस्टीट्यूट के ऐरॉन जे कोहेन, यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिटिश कोलंबिया के माइकल ब्रायर ने किया है।

इन वैज्ञानिकों के मुताबिक वायु में कुछ मात्रा में पीएम 2.5 के कम हो जाने से मौतें नहीं रुकेंगी। इनके अनुसार अगर छोटे-मोटे स्टेप लेकर यह सोचा जाए कि वायु प्रदूषण को कंट्रोल किया जा सकता है तो ऐसा बिल्कुल नहीं है। इसके लिए बड़े और ठोस कदम उठाने पड़ेंगे।

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