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मुस्लिम वोटरों के बूते गुड़गांव फतह की तैयारी
यशलोक सिंह/अमर उजाला, गुड़गांव
Updated Sun, 16 Mar 2014 03:58 PM IST
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गुड़गांव लोकसभा सीट में आने वाला मेवात भले ही प्रदेश का सबसे उपेक्षित क्षेत्र हो लेकिन चुनाव के मद्देनजर तो हॉट केक है। सभी राजनीतिक दल और उम्मीदवारों की निगाहें मेवात के वोट पर टिकी हुई हैं।
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यहां के मुस्लिम समाज में पैठ बनाने के लिए जोर आजमाइश जारी है। चुनावी मैदान में उतर चुके या उतरने वाले सभी प्रत्याशी खुद को मेवात का सबसे बड़ा पैरोकार साबित करने में जुटे हैं।
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गुड़गांव लोकसभा सीट के लिए सबसे पहले घोषित ‘आप’ प्रत्याशी योगेंद्र यादव के एजेंडे में मेवात के विकास का मुद्दा शामिल है। क्षेत्र की उपेक्षा के प्रति वह चिंता भी व्यक्त कर चुके हैं। इसके पीछे यह भी कारण है कि योगेंद्र यादव मेवात के ही रहने वाले हैं।
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वहीं, इनेलो ने जाकिर हुसैन को उम्मीदवार घोषित कर मेवात में 1989 के बाद एक बार फिर चौधरी को लाने का राजनीतिक तीर छोड़ा। इसका मकसद भी मेव वोटों का ध्रुवीकरण करना है।
बसपा के घोषित उम्मीदवार धर्मपाल कोटा ने मेवात की जनता से विकास का वादा किया है। उधर, भाजपा से राव इंद्रजीत सिंह की दावेदारी ने सभी को थोड़ा चिंतित किया है। वह भी मेवात के विकास का भरपूर दावा करते हैं।
मेवात की गिनती हरियाणा के सबसे पिछड़े क्षेत्र के तौर पर होती है। चुनाव आते है ही हर पार्टी और नेता को इसके विकास की चिंता सताने लगती है। ऐसा माना जाता है कि लोकसभा चुनाव में जीत सुनिश्चित करने के लिए मेवात के वोटरों को अपने पाले में लाना बहुत जरूरी है। यहां तकरीबन पांच लाख (4,58,564) मुस्लिम वोटर हैं।