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राजनीतिक पृष्ठभूमि राज्यसभा नामांकन में बाधा नहीं : हाईकोर्ट
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कहा, राष्ट्रपति को व्यापक विवेकाधिकार, सामाजिक सेवा में अनुभव रखने वालों का हो सकता है नामांकन
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को अहम फैसले में कहा कि राष्ट्रपति संविधान के अनुच्छेद 80(3) के तहत साहित्य, विज्ञान, कला और सामाजिक सेवा जैसे क्षेत्रों में विशेष ज्ञान या व्यावहारिक अनुभव रखने वाले व्यक्तियों को राज्यसभा के लिए नामांकित कर सकते हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि राजनीतिक पृष्ठभूमि किसी व्यक्ति को नामांकन से स्वतः अयोग्य नहीं बनाती, यदि उसके पास संबंधित क्षेत्रों में विशेष योग्यता हो।
मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की खंडपीठ ने कहा कि अनुच्छेद 80(3) में वर्णित श्रेणियों की संकीर्ण व्याख्या नहीं की जा सकती। संविधान राष्ट्रपति को इस मामले में व्यापक विवेकाधिकार देता है और नामांकन के लिए कोई कठोर प्रक्रिया तय नहीं है।
यह टिप्पणी भाजपा नेता सी. सदानंदन मास्टर के राज्यसभा नामांकन को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान की गई। याचिकाकर्ता और सामाजिक कार्यकर्ता सुबाष थीक्कडन ने दावा किया था कि सदानंदन मास्टर के पास आवश्यक विशेष ज्ञान या अनुभव नहीं है। हालांकि अदालत ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि सामाजिक सेवा या अन्य संबंधित क्षेत्रों में योगदान रखने वाले व्यक्ति का नामांकन वैध माना जा सकता है।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को अहम फैसले में कहा कि राष्ट्रपति संविधान के अनुच्छेद 80(3) के तहत साहित्य, विज्ञान, कला और सामाजिक सेवा जैसे क्षेत्रों में विशेष ज्ञान या व्यावहारिक अनुभव रखने वाले व्यक्तियों को राज्यसभा के लिए नामांकित कर सकते हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि राजनीतिक पृष्ठभूमि किसी व्यक्ति को नामांकन से स्वतः अयोग्य नहीं बनाती, यदि उसके पास संबंधित क्षेत्रों में विशेष योग्यता हो।
मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की खंडपीठ ने कहा कि अनुच्छेद 80(3) में वर्णित श्रेणियों की संकीर्ण व्याख्या नहीं की जा सकती। संविधान राष्ट्रपति को इस मामले में व्यापक विवेकाधिकार देता है और नामांकन के लिए कोई कठोर प्रक्रिया तय नहीं है।
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यह टिप्पणी भाजपा नेता सी. सदानंदन मास्टर के राज्यसभा नामांकन को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान की गई। याचिकाकर्ता और सामाजिक कार्यकर्ता सुबाष थीक्कडन ने दावा किया था कि सदानंदन मास्टर के पास आवश्यक विशेष ज्ञान या अनुभव नहीं है। हालांकि अदालत ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि सामाजिक सेवा या अन्य संबंधित क्षेत्रों में योगदान रखने वाले व्यक्ति का नामांकन वैध माना जा सकता है।
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