हवलदार मनोज ने इससे पूर्व भी आग में फंसी एक दिव्यांग लड़की को बचाया था। मनोज सहित अन्य पुलिसकर्मियों का वीडियो वायरल होने के बाद से लोग उनके साहस को सलाम कर रहे हैं। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मूलत: सोनीपत का रहने वाला मनोज वर्ष 2003 में दिल्ली पुलिस में भर्ती हुआ। वर्ष 2014 में वह हवलदार बना। जून 2016 से वह चूनामंडी का बीट अफसर है। गंगा देवी की जान बचाने वाला सिपाही संदीप दिल्ली पुलिस में वर्ष 2010 में भर्ती हुआ।संदीप ने बताया कि उसका मकसद सिर्फ महिला की जान बचाना था। इस दौरान छज्जे पर उसका हाथ भी फिसला था। लेकिन उसने अपने पैर पर महिला को लटकाकर उसे बचा लिया।
वहीं मूलत: राजस्थान के अलवर निवासी अमित वर्ष 2010 में दिल्ली पुलिस में भर्ती हुआ था। हवलदार मनोज ने बताया कि आग से निकल रहे धुएं से काम करना मुश्किल हो रहा था। लेकिन उन लोगों का मकसद सिर्फ दंपती की जान बचाना था। स्थानीय लोगों की मदद से उनलोगों ने सीढ़ी का इंतजाम किया और फिर एक दूसरे का हाथ पकड़कर उन्हें बचा लिया। मनोज ने बताया कि उन्होंने पिछले साल जनवरी माह में आग लगने के दौरान एक 15 साल की दिव्यांग को बचाया था। आग चूना मंडी की गली नंबर दस में लगी थी।
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fire in paharganj
- फोटो : अमर उजाला
पुलिसकर्मियों ने आग में फंसे दंपती की बचाई जान: पहाड़गंज के चूनामंडी गली नंबर एक में बुधवार सुबह चार मंजिला इमारत में आग लग गई। यहां रहने वाले दंपती समेत तीन लोग आग में फंस गए। पुलिसकर्मियों ने जान पर खेलकर तीसरी मंजिल पर फंसी महिला और उसके पति को बचा लिया। जितेंद्र नाम के शख्स ने ऊपर कूदकर जान बचाई। उसका गंगाराम अस्पताल में इलाज चल रहा है। दमकल की दस गाड़ियों ने आग पर काबू पाया। शुरूआती जांच में शार्ट सर्किट की वजह से आग लगने की बात सामने आ रही है। पुलिस आग लगने के कारणों और इससे हुए नुकसान का आकलन कर रही है।
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खौफनाक मंजर से गुजरने वाले दंपति पेशे से एक्यूप्रेशर डॉक्टर बलराज चौधरी (52)और 50 वर्षीय गंगा देवी अभी भी सदमे में हैं। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, दंपती की जान बचाने वाले बहादुर पुलिसकर्मी हवलदार मनोज कुमार, सिपाही संदीप और अमित को पुरस्कृत किया जाएगा। बुधवार सुबह करीब छह बजे पहाड़गंज थानेे के कई स्टाफ ईद की वजह से ड्यूटी पर थे। चूना मंडी के बीट अफसर हवलदार मनोज, सिपाही अमित और संदीप की तैनाती हरी मस्जिद के पास थी। मस्जिद के ठीक सामने चूना मंडी गली नंबर एक के एक इमारत से मनोज ने धुआं निकलता हुआ देखा। तीनों भागकर वहां पहुंचे।
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उन लोगों ने देखा कि आग और धुंआ पहली और दूसरी मंजिल से निकल रही थी। जबकि तीसरी मंजिल के ग्रिल पर गंगा देवी लटकी हुई थी और अपनी जान बचाने की गुहार लगा रही थी। वहीं उनके पति बलराज चौथी मंजिल पर फंसे थे। पुलिसकर्मियों ने देखा कि इमारत की सीढ़ियों से ऊपर जाना मुमकिन नहीं है। पुलिसकर्मियों ने तुरंत पड़ोस के मकान से उक्त मकान की छत पर पहुंचे। ऊपर का दरवाजा बंद था। पुलिसकर्मियों ने लात मारकर दरवाजा तोड़ दिया। सिपाही संदीप इमारत की खिड़की पर बने छज्जे पर उतर गया। उसके बाद एक सीढ़ी को महिला के नजदीक ले गया। लेकिन महिला सीढ़ी नहीं पकड़ पाई। फिर संदीप ने हाथ पकड़कर महिला को छज्जे पर खींच लिया और सीढ़ी की मदद से उसे छत पर भेजा। उसके बाद पुलिसकर्मियों ने बलराज को बचा लिया। लेकिन इस दौरान दूसरी तरफ आग में फंसे जितेंद्र ने उपर से छलांग लगा दी। पुलिसकर्मियों ने तुरंत उसे अस्पताल में भर्ती कराया।