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....तो महिलाओं के लिए असुरक्षित है ये पुलिस लाइन

Sun, 24 Jan 2016 09:41 AM IST
ऐहतेशाम उद्दीन अहमद/ अमर उजाला, नई दिल्ली
ऐहतेशाम उद्दीन अहमद/ अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sun, 24 Jan 2016 09:41 AM IST
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police line is not safe for women in faridabad

फरीदाबाद। पुलिस की नजर में शहर की महिलाएं शायद पुलिस आयुक्त कार्यालय और पुलिस लाइन में सबसे ज्यादा असुरक्षित हैं। इसी वजह से पुलिस ने बिल्डिंग ए सेफ सिटी फॉर वूमन (महिलाओं के लिए एक सुरक्षित शहर का निर्माण) मुहिम के तहत सार्वजनिक स्थानों पर लगाई जाने वाली 40 सोलर लाइट पुलिस लाइन और पुलिस आयुक्त कार्यालय में लगा डालीं।

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शहर में अन्य जगहों पर लगाई गई 160 सोलर लाइटें भी रखरखाव के अभाव में बेकार हो गई हैं। आरटीआई कार्यकर्ता अजय बहल ने पुलिस विभाग पर एक करोड़ रुपये बर्बाद करने का आरोप लगाया है।
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नेशनल हाइड्रो पावर कॉरपोरेशन (एनएचपीसी) ने कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) के तहत 2013-14 में बिल्डिंग ए सेफ सिटी फॉर वूमन कार्यक्रम चलाया था।

एनएचपीसी की ओर से उन स्थानों पर, जो पुलिस की नजर में शाम को इसलिए असुरक्षित थे कि वहां स्ट्रीट लाइट नहीं हैं, सोलर लाइट लगाने का प्रस्ताव पुलिस को भेजा गया था। विभाग की ओर से 200 स्थान चिह्नित कर रिपोर्ट एनएचपीसी को भेजी गई थी।
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कैसे खराब हुई इस इलाके की लाइटें

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200 सोलर लाइट लगाने के लिए एनएचपीसी की ओर से पुलिस विभाग को एक करोड़ रुपये दिए गए थे। पुलिस विभाग को 200 सोलर लाइट की स्थापना के बाद हर सप्ताह उनकी सफाई और रखरखाव भी करना था।

इनमें से 30 सोलर लाइट पुलिस लाइन परिसर में विभिन्न जगहों पर और 10 पुलिस आयुक्त कार्यालय में लगवाई गईं। आटीआई कार्यकर्ता अजय बहल का कहना है कि पुलिस ने 20 फीसदी स्ट्रीट लाइट अपने उपयोग में ले लीं और बाकी 160 सोलर लाइट लगा कर उन्हें भूल गई।

रखरखाव के अभाव में यह लाइटें खराब हो चुकी हैं, कुछ जगहों पर तो चोर बैटरी भी निकाल ले गए। सोलर लाइट लगाए जाने के बारे में मुझे जानकारी नहीं है। मामला एक साल पुराना है, कागजात का अध्ययन करने के बाद ही कुछ बता पाऊंगा। -जगदीश नागर, संयुक्त पुलिस आयुक्त

इस बारे में मुझे जानकारी नहीं है यदि आरटीआई में खुलासा हुआ है तो यह सही होगा। सोमवार को इसके बारे में जानकारी जुटा कर अधिकारियों को सूचित करूंगा। -एके सिंह प्रबंधक, एनएचपीसी

यहां लगाई गईं सोलर लाइट

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पुलिस लाइन में
-मेस के बाहर
-दो शौचालयों के पास
-वीटा डेयरी
-परेड ग्राउंड का पार्क
-पावर हाउस के पास
-बैडमिंटन कोर्ट के बीच
-एसीपी आवास के रास्ते सहित तीस जगहों पर

पुलिस आयुक्त कार्यालय में
-जेनरेटर सेट के पास
-सिक्योरिटी ब्रांच के पीछे
-गार्ड रूम के पीछे
-पाकंग एरिया में
-अकाउंट विभाग के सामने
-पुलिस आयुक्त कार्यालय की चाहरदीवारी के पास
-मेन गली सहित दस जगहों पर

हैं और भी खामियां

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अजय बहल कहते हैं कि पुलिस विभाग ने जल्दबाजी में एक करोड़ रुपये बर्बाद कर दिए। उन्होंने बताया कि 31 मार्च 2014 से पहले यदि एक करोड़ रुपये खर्च नहीं किए जाते तो धनराशि लैप्स हो जाती।

इसलिए तत्कालीन एसीपी हेडक्वार्टर ने यह धन खर्च करने के आदेश 7 मार्च 2014 को जारी किए। उनका आरोप है कि बिना पूर्व नियोजित योजना के आनन-फानन सोलर लाइट खरीदी गईं और जहां समझ में आया लगा दी गईं।

यहां तक कि नगर निगम या हुडा से भी सहमति और अनापत्ति नहीं ली गई। उन्होंने कहा कि सोलर लाइट की स्थापना के बाद उसको चलाने, सफाई का जिम्मा भी पुलिस विभाग का ही है लेकिन इसके लिए न तो किसी को ट्रेनिंग दी गई और न ही सफाई होती है।

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