दिल्ली हिंसा के विरोध में सीएम आवास के बाहर जुटे जामिया के पूर्व छात्र, पुलिस ने खदेड़ा
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दिल्ली हिंसा के विरोध में जामिया के पूर्व छात्र देर रात सीएम आवास के बाहर जुटे और नारेबाजी की। प्रदर्शनकारी छात्रों ने हिंसा में संलिप्त दोषियों के खिलाफ कार्रवाई व जल्द से जल्द शांति बहाली की मांग उठाई। पुलिस ने प्रदर्शनकारी छात्रों पर वाटर कैनन का इस्तेमाल कर उन्हें मौके से खदेड़ दिया।
Delhi: Police disperse the people who had gathered outside Chief Minister Arvind Kejriwal's residence demanding action against #DelhiViolence and seeking restoration of peace. https://t.co/NWz03HQkQT pic.twitter.com/ybGwIw0cqo
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— ANI (@ANI) February 25, 2020
केजरीवाल ने जारी की शांति बनाए रखने की अपील
मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने हिंसा पर चिंता जाहिर करते हुए सभी नागरिकों से शांति बनाए रखने की अपील की है। उन्होंने कहा कि जिसके जो भी मामले और समस्याएं हैं, उनका शांतिपूर्वक बैठकर समाधान हो सकता है। हिंसा से किसी भी मसले का कोई समाधान नहीं निकलने वाला।
इसलिए मेरी सभी लोगों से हाथ जोड़कर अपील है कि शांति-व्यवस्था बनाए रखें। हिंसक प्रदर्शन में एक पुलिसकर्मी की मौत हो गई है और कई घायल हैं। कई आम लोगों की मौत हुई है और सौ से ज्यादा घायल हैं। ये सभी दिल्ली के लोग हैं। हमारे ही देश के लोग हैं।
हिंसा बढ़ी तो कल किसी का भी नंबर आ सकता है। कई लोगों के घर जलाए गए हैं, दुकानें लूटी गई हैं। लोगों की गाड़ियों और बाइक को फूंका गया है। इसमें सभी लोगों का नुकसान हो रहा है। आज किसी का हो रहा है तो कल किसी और को होगा।
शहीद के घर पहुंचे सीएम का विरोध, वापस लौटे
मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल मंगलवार शाम उत्तर पूर्वी दिल्ली की हिंसा में शहीद रतन लाल के परिजनों से मुलाकात करने बुराड़ी पहुंचे। उनके साथ उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और स्थानीय विधायक संजीव झा भी थे। उन्हें देखते ही स्थानीय लोगों ने विरोध करना शुरू कर दिया। इसके बाद केजरीवाल को बगैर शहीद के परिजनों से मिले लौटना पड़ा।
शहीद रतन लाल का पार्थिव शरीर शाम के समय बुराड़ी पहुंचा था। वहां बड़ी संख्या में लोग शहीद के अंतिम दर्शन करने पहुंचे थे। शाम करीब 6:30 बजे अरविंद केजरीवाल भी पहुंचे। उनके काफिले को देखते ही लोगों ने नारेबाजी शुरू कर दी।
लोग ‘केजरीवाल वापस जाओ’ के नारे लगाने लगे। स्थानीय निवासियों ने बताया कि लोगों की नाराजगी को देखते हुए पुलिस उनको भीड़ से निकालकर वापस ले गई। शहीद के परिजनों से मुख्यमंत्री की मुलाकात नहीं हो सकी।