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ग्रेनो: भतीजों का हक मारने के लिए तीन सगे भाइयों ने मृत भाई को बताया जिंदा, प्लॉट बेचने के लिए किया फर्जीवाड़ा
Thu, 14 Nov 2024 08:25 PM IST
श्याम जी.
अमर उजाला नेटवर्क, ग्रेटर नोएडा
अमर उजाला नेटवर्क, ग्रेटर नोएडा
Published by: श्याम जी.
Updated Thu, 14 Nov 2024 08:25 PM IST
सार
ग्रेटर नोएडा में भतीजों का हक मारने के लिए फर्जी संरक्षण आदेश तैयार कराने वाले तीन सगे भाइयों को गिरफ्तार किया गया है। राधेश्याम ने महकार से कहा था कि भतीजों का संरक्षण बनाने का आदेश कराकर प्लॉट की रजिस्ट्री करा लेंगे।
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आरोपी गिरफ्तार
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
कासना कोतवाली पुलिस ने भतीजों का हक मारने के लिए फर्जी संरक्षण आदेश तैयार कराने वाले तीन सगे भाइयों को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान घंघौला गांव निवासी तीन सगे भाई नीरज, महकार, वेदपाल के रूप में हुई है। कोर्ट के आदेश पर कासना कोतवाली पुलिस ने घंघोला गांव के महकार की शिकायत पर राधेश्याम निवासी गांव पतला खेड़ा, रोहित निवासी गांव कुलीपुरा, काली उर्फ कालीचरण निवासी धंघौला गांव के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज किया था।
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महकार व उसके भाइयों व माता की कृषि भूमि का अधिग्रहण ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण द्वारा वर्ष 2010-2011 में किया गया था। महकार व उसके भाइयों व माता को प्राधिकरण ने 6 प्रतिशत आबादी प्लॉट के रूप में 220 वर्ग मीटर का प्लॉट व जिसका प्लॉट नंबर 238 है। प्लॉट उसके साथ भाई वेदपाल, राजसिंह, नीरज व मां राजों के नाम दर्ज है। महकार के भाई राजसिंह का देहांत वर्ष-2017 उनकी पत्नी सुमन का देहांत वर्ष 2019 व मां का वर्ष-2019 में देहांत हो चुका है। मृतक के भाई के दो नाबालिग बच्चे हैं। महकार ने प्लॉट बेचने का सौदा राधेश्याम, रोहित व कालीचरण से किया था। राधेश्याम ने महकार से कहा था कि भतीजों का संरक्षण बनाने का आदेश कराकर प्लॉट की रजिस्ट्री करा लेंगे।
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महकार ने कहा था कि करीब 7 लाख रुपये उसके साथ भाई वेदपाल व नीरज के बैंक खाते में आये हैं। महकार ने आरोप लगाया था कि राधेश्याम ने झांसे में लेकर उसके मृतक भाई, उसकी पत्नी व मां का मृत्यु प्रमाण लिया था। इसके बाद आरोपियों ने फिर फर्जी संरक्षण आदेश की कापी थमाई थी। वहीं कोतवाली प्रभारी विनोद कुमार का कहना है कि 2023 में एक फर्जी एग्रीमेंट तैयार हुआ था। जिसमें मृतक राजसिंह के हस्ताक्षर थे। जांच पर पता चला कि आरोपी गाजियाबाद खोड़ा की एक महिला को प्लॉट बेचना चाहते थे। आरोपियों के खाते में 12 लाख रुपये आए थे, लेकिन कोर्ट में वारिसान पत्र की जांच हुई तो वह फर्जी मिला।
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एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर भी फर्जी मिले। खुद को फंसता देख महकार ने साजिशन कोर्ट के आदेश पर मुकदमा करा दिया, लेकिन जब जांच हुई तो पता चला कि राधेश्याम ने फर्जी समझौता कराया था। इसके बाद महकार ने राधेश्याम, रोहित और कालीचरण के खिलाफ मुकदमा लिखवा दिया। जांच के बाद तीन सगे भाई महकार, वेदपाल और नीरज को गिरफ्तार किया गया है। आरोपी अपने सगे भाई के भतीजों का हक हड़पना चाह रहे थे। बाद में खुद को फंसता देख आरोपियों ने कोर्ट का सहारा लेकर मुकदमा दर्ज कराया था।राधेश्याम इलाहाबाद हाईकोर्ट से जमानत लेकर आया है। वहीं दो आरोपियों की तलाश जारी है।