फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   PM Modi attended DU centenary celebrations

Delhi: डीयू शताब्दी समारोह में शामिल हुए पीएम मोदी, बोले- पहले शिक्षा का मतलब होता था डिग्री और प्लेसमेंट

Fri, 30 Jun 2023 09:37 PM IST
Digvijay Singh अमर उजाला ब्यूरो, दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, दिल्ली Published by: Digvijay Singh Updated Fri, 30 Jun 2023 09:37 PM IST
सार

प्रधानमंत्री ने कहा कि युवाओं के इस बदलाव का असर दिखने लगा है। उन्होंने पिछले दिनों अमेरिका की यात्रा के बारे में कहा कि आप सबने देखा होगा कि भारत का सम्मान और गौरव कितना बढ़ा है।

विज्ञापन
PM Modi attended DU centenary celebrations
डीयू शताब्दी समारोह में पीएम मोदी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि एक समय था जब किसी संस्थान में दाखिले से पहले प्लेसमेंट को प्राथमिकता देते थे। उनके लिए दाखिले का मतलब डिग्री और डिग्री का अर्थ नौकरी होता था। शिक्षा यहीं तक सीमित थी। लेकिन आज युवाओं की सोच में बदलाव आया है। वे जिंदगी को बांधना नहीं, वे कुछ नया करना चाहता है। 2014 से पहले देश में स्टार्टअप की संख्या कुछ सौ थी। जबकि आज यह संख्या एक लाख को पार कर गई है। वे डीयू के नार्थ कैंपस में शुक्रवार को शताब्दी समारोह में छात्रों को संबोधित कर रहे थे।

विज्ञापन

प्रधानमंत्री ने कहा कि युवाओं के इस बदलाव का असर दिखने लगा है। उन्होंने पिछले दिनों अमेरिका की यात्रा के बारे में कहा कि आप सबने देखा होगा कि भारत का सम्मान और गौरव कितना बढ़ा है। यह सब भारत की क्षमता और भारत के युवाओं पर विश्व के भरोसा बढ़ने का नतीजा है। उन्होने बताया कि उनकी इसी यात्रा में भारत और अमेरिका के बीच इनिशिएटिव ऑन क्रिटिकल एंड इमर्जिंग टेक्नोलॉजी पर एक डील हुई है। इस एक समझौते से हमारे युवाओं के लिए धरती से लेकर स्पेस तक, सेमीकंडक्टर से लेकर एआई तक तमाम फील्ड्स में नए अवसर पैदा होने वाले हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

तीसरा दशक भारत की विकास यात्रा में शिक्षा को रफ्तार देगा:

पीएम ने कहा कि डीयू का अपना इतिहास है। यह सिर्फ एक यूनिवर्सिटी नहीं, बल्कि एक मूवमेंट है। इसने हर आंदोलन को देखा और जिया है। आज यहां लड़कों की तुलना में लड़कियों की संख्या ज्यादा है। देश में भी जेंडर रेश्यो में सुधार आया है। सौ साल पहले स्वतंत्रता लक्ष्य था। अब लक्ष्य 2047 तक विकसित भारत का निर्माण है। पिछली शताब्दी के तीसरे दशक में स्वतंत्रता संग्राम को नई गति दी। इस शताब्दी का ये तीसरा दशक भारत की विकास यात्रा को नई रफ्तार देगा। आज देशभर में बड़ी संख्या में विश्वविद्यालय बनाए जा रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों में आईआईटी, आईआईएम जैसी संस्थाओं की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हुई है। ये न्यू इंडिया के बिल्डिंग ब्लॉक हैं। शिक्षा सिर्फ सिखाने नहीं, सीखने की भी प्रक्रिया है। लंबे समय तक शिक्षा का फोकस इसी बात पर रहा कि छात्रों को क्या पढ़ाया जाना चाहिए। हमने शिक्षा पर फोकस किया और सबके प्रयास से राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 बनीं। आप सब अपनी इच्छा, पसंद के विषयों की पढ़ाई कर सकते हैं।

विज्ञापन

हिस्ट्री, हेरिटेज और कल्चर में युवाओं के लिए अपार संभावनाएं:

पीएम ने कहा कि भारत जी 20 की अध्यक्षता कर रहा है। आज दुनियाभर के लोग भारतीय संस्कृति, इतिहास, धरोहर को जानना चाहते हैं। कोरोना के समय दुनिया का हर देश अपनी जरूरतों के लिए परेशान था, लेकिन भारत अपनी जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ दूसरे देशों की भी मदद कर रहा था। लिहाजा विश्व में ये जानने का कौतूहल पैदा हुआ कि भारत में वो कौन से संस्कार हैं, जो संकट में भी सेवा का संकल्प पैदा करते हैं। उन्होंने कहा कि युवाओं के लिए हिस्ट्री, हेरिटेज और कल्चर क्षेत्र में काम करने की अपार संभावनाएं हैं। राज्यों में ट्राइबल म्यूजियम बन रहे हैं। दिल्ली में विश्व का सबसे बड़ा हेरिटेज म्यूजियम बनने जा रहा है। कला, संस्कृति और इतिहास से जुड़े युवाओं के लिए पैशन को प्रोफेशन बनाने के इतने अवसर पैदा हो रहे हैं।

भारत की सॉफ्ट पावर युवाओं की सक्सेस स्टोरी बन सकती:

मोदी ने कहा कि दुनिया में भारतीय शिक्षकों की भी एक अलग पहचान बनी है। भारत की सॉफ्ट पावर भारतीय युवाओं की सक्सेस स्टोरी बन सकती है। डीयू को अपने लिए रोड़ मैप बनाकर अपने लक्ष्यों को तय करना होगा, ताकि जब आप इस संस्थान के 125 वर्ष मनाएं, तब आपकी गिनती दुनिया की टॉप रैंकिंग वाली यूनिवर्सिटीज़ में हो। इसके लिए तैयारी करें। फ्यूचर मेकिंग इनोवेशन्स आपके यहाँ हों, दुनिया के बेस्ट आइडिया और लीडर आपके यहाँ से निकलें, इसके लिए आपको लगातार काम करना होगा। 

नॉर्थ और साउथ कैंपस के व्यंजनों का स्वाद न भूलें:

पीएम ने छात्रों से कैंपस और आसपास की यादों को ताजा रखने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि भविष्य में वे कहीं भी रहें, लेकिन नॉर्थ और साउथ कैंपस के आसपास खाद्य स्टॉल के व्यंजनों का स्वाद कभी ना भूलें। बदलावों के बीच कभी आप लोग पूरी तरह मत बदल जाइएगा। अब यह आपको सुनिश्चित करना होगा कि नॉर्थ कैंपस में पटेल चेस्ट की चाय, नूडल्स, साउथ कैंपस में चाणक्याज के मोमोज आदि इनका टेस्ट ना बदल जाए। दोनों कैंपस अपनी चाय और विभिन्न प्रकार के व्यंजनों का लुत्फ उठाने के लिए जाने जाते है, जहां न केवल छात्र, बल्कि अन्य लोग भी आते हैं। आज इस आयोजन के जरिये यहां नए और पुराने छात्र भी साथ मिल रहे हैं। स्वभाविक है, कुछ सदाबहार चर्चाएं भी होंगी। नॉर्थ कैंपस के लोगों के लिए कमला नगर, हडसन लाइन और मुखर्जी नगर से जुड़ी यादें, साउथ कैंपस वालों के लिए सत्य निकेतन के किस्से, आप चाहे जिस भी साल के पासआउट हों, दो डीयू वाले मिलकर इन पर कभी भी घंटों निकाल सकते हैं। 

समारोह से चार लाख दर्शक जुड़े:

शताब्दी वर्ष समारोह के समापन समारोह का सीधा प्रसारण भी किया गया। इसे डीयू के विभागों और कॉलेजों में स्क्रीन लगा कर दिखाया गया। इस तरह ऐतिहासिक समारोह को प्रत्यक्ष और वर्चुअल माध्यम से चार लाख से अधिक दर्शकों ने देखा।

एआई और वीआर कोई साइंस फिक्शन नहीं, जीवन का हिस्सा:

पीएम मोदी ने कहा, ''एआई और वीआर अब साइंस फिक्शन नहीं, हमारे जीवन का हिस्सा हैं। ड्राइविंग से लेकर सर्जरी तक, सभी कुछ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से संभव हो रहा है। हमारे शिक्षण संस्थान दुनिया में अपनी अलग पहचान बना रहे हैं। क्योंकि हमारी सबसे बड़ी गाइडिंग फोर्स भारत की युवा शक्ति है। उन्होंने कहा किकभी डीयू में केवल 3 कॉलेज थे, आज 90 से ज्यादा हैं। कभी भारत की इकॉनमी खस्ता हालत में थी, आज दुनिया की टॉप 5 इकॉनमी में शामिल हो गई है।

वीसी ने कविता से किया पीएम का स्वागत:

डीयू कुलपति प्रोफेसर योगेश सिंह ने प्रधानमंत्री का स्वागत विशेष अंदाज से किया। उन्होंने अपनी कविता के माध्यम से कहा कि ''ऐसे प्रधानमंत्री कहां मिलते हैं...''. उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को अद्भुत रूप से प्रभावी, मेहनती और देशप्रेमी भी बताया। प्रो. सिहं ने कहा कि पीएम ने मिशन मोड में भर्ती का आह्वान किया और शिक्षा मंत्री ने इसकी समीक्षा की। इसी कारण डीयू ने दशकों के बाद 2200 शिक्षकों की भर्ती की है। अपने 100 वर्षों में डीयू दिल्ली के हर घर के साथ देश के हर जिले,तहसील में गया। दुनिया के जितने भी देश हैं, वहां पर डीयू के छात्र मिलेंगे। पीएम ने 2047 तक भारत एक विकसित राष्ट्र का संकल्प किया है। डीयू भी इसमें शामिल होगा। इसके लिए हमने भी अपना एक स्ट्रेटजी प्लान तैयार किया है, ताकि भारत सरकार के सहयोग से यह प्रभावी और आवश्यक भूमिका निभा सके।

डीयू ने एनईपी 2020 लागू करने में अहम जिम्मेदारी निभायी: धर्मेन्द्र प्रधान

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने कहा कि डीयू नाम में बेशक दिल्ली जुड़ता है। लेकिन यह सिर्फ दिल्ली का ही नहीं बल्कि पूरे देश का और हर नागरिक का विश्वविद्यालय है। दिल्ली विश्वविद्यालय ने एनईपी 2020 लागू करने में अहम जिम्मेदारी निभायी है। शिक्षा मंत्री ने कहा कि आजादी के 75 वर्ष पूरे होने पर हम अमृत महोत्सव मना रहे हैं, लेकिन 1973-74 में जब भारत के संविधान पर संकट आया था और उसके बाद आपातकाल लागू होने पर नागरिकों के मौलिक अधिकार छीन लिये गए थे तब इसके खिलाफ किसी ने आवाज उठायी थी..तो वह दिल्ली विश्वविद्यालय ही था। 

विश्वविद्यालय ने आजादी की लड़ाई देखी, यहां शहीद भगत सिंह आए और आजादी की लड़ाई लड़ते-लड़ते चंद्रशेखर आजाद ने भी इसमें कदम रखा था। डीयू ने देश को अनेकों वैज्ञानिक दिये हैं। इसके अलावा लोक नीति निर्माता, उद्योग जगत से जुड़ी हस्तियां , कला एवं सहित्य जगत से लेकर न्यायविद दिये। उन्होंने कहा कि संस्थान जब अपने 100 साल पूरे कर रहा है जब चुनौतियां और जिम्मेदारियां बढ़ गई है। पीएम के चलते देश को 34 साल बाद राष्ट्रीय शिक्षा नीति 20202 मिली और इसके अनुपालन को भी तीन साल हो गए हैं। डीयू ने बिना देरी एनईपी लागू की और आज दुनिया के सर्वश्रेष्ठ 500 की सूची में शुमार हो गया है।

गौरवपूर्ण 100 वर्षों की यात्रा पर प्रदर्शनी:

डीयू के मल्टीपर्पज हॉल के बेसमेंट में एक प्रदर्शनी का आयोजन भी किया गया। विश्वविद्यालय के गौरवपूर्ण 100 वर्षों की यात्रा पर आयोजित इस प्रदर्शनी में विभिन्न कॉलेजों व विश्वविद्यालय के केंद्रीय अभिलेखागार आदि से विशिष्ट सामग्री जुटाई गई थी। इसके अतिरिक्त विदेशी छात्र, डीयू से पासआउट पैरा ओलंपियनों और एनसीवेब सहभागियों ने भी इसमें भाग लिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रदर्शनी का अवलोकन करते हुए छात्रों से बात भी की।

पूर्व उपराष्ट्रपति ने किया था शताब्दी समारोह का आगाज:

डीयू की स्थापना एक मई 1922 में हुई थी। इसी के तहत डीयू ने अपनी स्थापना की सौ वर्ष पूरे होने पर शताब्दी वर्ष समारोह का आयोजन किया था। विश्वविद्यालय के शताब्दी समारोह का उद्घाटन एक मई, 2022 को तत्कालीन उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने किया था। इस दौरान उन्होंने विश्वविद्यालय की 100 वर्ष की ऐतिहासिक यात्रा के आलोक में शताब्दी स्मारक टिकट तथा 100 रुपये मूल्य का स्मारक सिक्का भी जारी किया था।

वर्ष भर चलता रहा कार्यक्रमों का दौर:

वर्ष भर चले शताब्दी समारोह के दौरान अनेकों कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस वर्ष के दौरान सेंटेनरी चान्स के तहत उन पूर्व विद्यार्थियों को भी अपनी डिग्रियां पूरी करने का मौका मिला जो किन्हीं कारणों से अपने समय में अपनी डिग्रियां पूरी नहीं कर पाए थे। दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा शताब्दी वर्ष में अनेक बड़े अकादमिक एवं प्रशासनिक फैसले लिए गए। इनमें राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप नए यूजीसीएफ पाठ्यक्रम को स्वीकार एवं लागू करना और सीयूईटी के माध्यम से प्रवेश परीक्षा के आधार पर स्नातक एवं स्नातकोत्तर स्तर पर नामांकन जैसे महत्त्वपूर्ण फैसले शामिल हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed