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Delhi NCR News: नन्हीं उम्र में पीतमपुरा की कैरवी का कराटे में कमाल
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- जोनल से लेकर नेशनल तक में 25 से अधिक मेडल अपने नाम कर चुकी हैं
काजल कुमारी
नई दिल्ली। पीतमपुरा की 10 वर्षीय कैरवी चौहान ने कम उम्र में ही कराटे में अपनी मजबूत पहचान बना ली है। महज 4 साल की उम्र से खेल की शुरुआत करने वाली कैरवी अब तक जोनल से नेशनल स्तर तक 25 से अधिक मेडल जीत चुकी हैं। इतनी छोटी उम्र में ब्लैक बेल्ट हासिल करना उनकी मेहनत और लगन का बड़ा उदाहरण है। वर्ष 2025 में कैरवी ने स्टेट स्तर पर काता में ब्रॉन्ज और कुमिते में गोल्ड मेडल जीता। साथ ही टीम काता में गोल्ड और नेशनल स्तर पर ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया। इससे पहले 2024 में उन्होंने स्टेट काता में सिल्वर और कुमिते में गोल्ड, जबकि नेशनल कुमिते में गोल्ड मेडल हासिल किया।
वर्ष 2023 उनके करियर का अहम पड़ाव रहा, जब उन्होंने स्टेट स्तर पर काता और कुमिते दोनों में गोल्ड जीता और नेशनल कुमिते में ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया। 2022 और 2021 में भी उन्होंने लगातार शानदार प्रदर्शन कर अपने खेल की मजबूत नींव रखी। कैरवी की सफलता के पीछे उनके कोच सुनील सुलिया का अहम योगदान है। उनके मार्गदर्शन में कैरवी ने तकनीकी कौशल के साथ मानसिक मजबूती भी विकसित की है। परिवार का सहयोग भी उनकी उपलब्धियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। अब कैरवी का लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन करना है।
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काजल कुमारी
नई दिल्ली। पीतमपुरा की 10 वर्षीय कैरवी चौहान ने कम उम्र में ही कराटे में अपनी मजबूत पहचान बना ली है। महज 4 साल की उम्र से खेल की शुरुआत करने वाली कैरवी अब तक जोनल से नेशनल स्तर तक 25 से अधिक मेडल जीत चुकी हैं। इतनी छोटी उम्र में ब्लैक बेल्ट हासिल करना उनकी मेहनत और लगन का बड़ा उदाहरण है। वर्ष 2025 में कैरवी ने स्टेट स्तर पर काता में ब्रॉन्ज और कुमिते में गोल्ड मेडल जीता। साथ ही टीम काता में गोल्ड और नेशनल स्तर पर ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया। इससे पहले 2024 में उन्होंने स्टेट काता में सिल्वर और कुमिते में गोल्ड, जबकि नेशनल कुमिते में गोल्ड मेडल हासिल किया।
वर्ष 2023 उनके करियर का अहम पड़ाव रहा, जब उन्होंने स्टेट स्तर पर काता और कुमिते दोनों में गोल्ड जीता और नेशनल कुमिते में ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया। 2022 और 2021 में भी उन्होंने लगातार शानदार प्रदर्शन कर अपने खेल की मजबूत नींव रखी। कैरवी की सफलता के पीछे उनके कोच सुनील सुलिया का अहम योगदान है। उनके मार्गदर्शन में कैरवी ने तकनीकी कौशल के साथ मानसिक मजबूती भी विकसित की है। परिवार का सहयोग भी उनकी उपलब्धियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। अब कैरवी का लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन करना है।
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