Delhi: पतंग उड़ाने, बनाने, बिक्री-खरीद और भंडारण पर प्रतिबंध लगाने की मांग, हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर
याचिकाकर्ता अधिवक्ता संसेर पाल सिंह ने कहा कि पतंग उड़ाने वालों के बीच एक प्रतियोगिता होती है, जो कभी न खत्म होने वाला है, जिसमें हर अवसर पर प्रत्येक पतंग उड़ाने वाले दूसरे पतंगबाज प्रतियोगी की पतंग की डोर को काटकर उसे प्रतियोगिता से बाहर निकालने की कोशिश करता है।
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पतंग की डोर से होने वाली दुर्घटनाओं को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट में केंद्र और दिल्ली सरकार को पतंग उड़ाने, बनाने, बिक्री-खरीद, भंडारण और परिवहन पर प्रतिबंध लगाने का निर्देश देने की मांग को लेकर जनहित याचिका दायर की गई है।
याचिका में कहा गया है कि पतंग की डोर से होने वाली दुर्घटनाओं के कारण कई व्यक्ति और पक्षी मारे गए और घायल हो गए और ऐसी दुर्घटनाएं नियमित रूप से हो रही हैं। पतंगबाजी से दिल्ली निवासियों और पक्षियों का जीवन और सुरक्षा खतरे में है। पतंगों को उड़ाने, बनाने, बेचने-खरीदने, भंडारण और परिवहन पर पूर्ण प्रतिबंध और पतंग बनाने और उड़ाने में उपयोग की जाने वाली वस्तुओं के निर्माण पर रोक एकमात्र समाधान है। क्योंकि कुछ मामलों में पतंग की डोर से दुर्घटना होने पर जिम्मेदार अपराधी को पकड़ना काफी असंभव है।
याचिका में कहा गया है कि प्रतिवादी उचित कार्रवाई करने में पूरी तरह से विफल रहे है क्योंकि दिल्ली पुलिस अधिनियम 1978 की धारा 94 के अनुसार पतंगबाजी पहले से ही निषिद्ध है। पतंग या कोई अन्य चीज जिससे व्यक्तियों, जानवरों या संपत्ति के लिए खतरा है, उस पर प्रतिबंध है। याचिकाकर्ता अधिवक्ता संसेर पाल सिंह ने कहा कि पतंग उड़ाने वालों के बीच एक प्रतियोगिता होती है, जो कभी न खत्म होने वाला है, जिसमें हर अवसर पर प्रत्येक पतंग उड़ाने वाले दूसरे पतंगबाज प्रतियोगी की पतंग की डोर को काटकर उसे प्रतियोगिता से बाहर निकालने की कोशिश करता है।
पीआईएल के अनुसार, इस कारण प्रत्येक पतंगबाज प्रतिद्वंद्वी की तुलना में एक बेहतर और अधिक शक्तिशाली धागे का उपयोग करने की कोशिश करता है। इसके लिए प्रत्येक पतंगबाज कांच कोटेड या धातु की डोरी का स्रोत और उपयोग करने की कोशिश करता है, जो लोकप्रिय रूप से चीनी मांझा के रूप में जाना जाता है जो कि अधिक खतरनाक हैं और इस पतंग मांझा के कारण पक्षियों के अलावा मनुष्य का जीवन और सुरक्षा भी है।
याचिकाकर्ता ने कहा कि हाल ही में हुई दुर्घटना पतंग के तार की वजह से हुई थी, जहां 25 जुलाई को दिल्ली के हैदरपुर फ्लाईओवर पर एक 30 वर्षीय व्यक्ति की जान चली गई थी। दिल्ली पुलिस ने भी 13 अगस्त 2021 को एक एडवाइजरी जारी की थी और धातु पाउडर-लेपित धागे के उपयोग से बचने के लिए इसे अखबार में प्रकाशित किया था।
याची ने कहा कि वह खुद 2006 में एक दुर्घटना का शिकार हुआ था, जब उसके शरीर में एक पतंग का तार उलझ गया था और उसे गले तक पहुंचने से रोकने के प्रयास में याचिकाकर्ता ने उसे अपनी उंगली पर ले लिया, जिसके परिणामस्वरूप उसकी उंगली आधी कट गई थी।