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हाईकोर्ट: पीएफआई ने जांच अवधि 60 दिन बढ़ाने के निर्णय को दी चुनौती, अगली सुनवाई 25 जनवरी को

Tue, 10 Jan 2023 07:39 AM IST
आकाश दुबे अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: आकाश दुबे Updated Tue, 10 Jan 2023 07:39 AM IST
सार

याचिकाकर्ताओं के वकील मोहम्मद यूसुफ और अन्य लोगों ने निचली अदालत के जांच करने की समय सीमा 60 दिन बढ़ाने के 19 दिसंबर के फैसले को गलत बताया है। उन्होंने कहा कि अभियोजक की रिपोर्ट का नोटिस उन्हें दिए बिना एजेंसी को अतिरिक्त समय दिया गया है।

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PFI challenges decision to extend investigation period to 60 days
दिल्ली हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) को प्रतिबंधित संगठन पीएफआई के खिलाफ आतंकवाद रोधी यूएपीए कानून के तहत दर्ज मामले में जांच पूरी करने के लिए और समय दिये जाने के खिलाफ संगठन के गिरफ्तार सदस्यों ने सोमवार को दिल्ली उच्च न्यायालय में चुनौती दी है। न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल और न्यायमूर्ति तलवंत सिंह की पीठ ने अगली सुनवाई 25 जनवरी को करना तय किया है।

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याचिकाकर्ताओं के वकील मोहम्मद यूसुफ और अन्य लोगों ने निचली अदालत के जांच करने की समय सीमा 60 दिन बढ़ाने के 19 दिसंबर के फैसले को गलत बताया है। उन्होंने कहा कि अभियोजक की रिपोर्ट का नोटिस उन्हें दिए बिना एजेंसी को अतिरिक्त समय दिया गया है। रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में जमा की गयी है। एनआईए के वकील ने कहा कि उच्च न्यायालय के पहले के फैसले के अनुसार अभियोजक की रिपोर्ट यूएपीए के किसी मामले में किसी आरोपी को नहीं दी जा सकती और मौजूदा मामले में निचली अदालत ने आरोपियों का पक्ष सुना है। याचिकाकर्ताओं के वकील ने कहा कि जांच एजेंसी ने तफ्तीश की समय-सीमा बढ़ाने के लिए कोई विशिष्ट कारण नहीं बताया।
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यह भी दलील दी गयी कि अभियोजक की रिपोर्ट को सीलबंद लिफाफे में जमा करना कानून के खिलाफ है। यूएपीए के तहत यदि जांच 90 दिन की अवधि के भीतर पूरा करना संभव नहीं है तो निचली अदालत इसे 180 दिन तक बढ़ा सकती है। पीएफआई पर 28 सितंबर 2022 को लगाए गए राष्ट्रव्यापी प्रतिबंध से पहले बड़े पैमाने पर छापेमारी के दौरान कई राज्यों में बड़ी संख्या में कथित पीएफआई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया या गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद सरकार ने यूएपीए के तहत पीएफआई और उसके कई सहयोगी संगठनों पर पांच साल के लिए प्रतिबंध लगा दिया था।

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तीन बार अदालती कार्यवाही में बाधा डालने के मामले में फंसे अधिवक्ता
नई दिल्ली। उच्च न्यायालय ने सोमवार को एक वकील पर तीन बार अदालती कार्यवाही में बाधा डालने के लिए हाइब्रिड या वर्चुअल कॉन्फ्रेंसिंग (वीसी) मोड के माध्यम से उपस्थित होने पर एक महीने की अवधि के लिए रोक लगा दी। न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह ने कहा कि वकील जो अपने घर से पेश हो रहा थे और वीडियो भी चालू कर रहे थे। इस दौरान वह अदालत की मर्यादा का पालन नहीं कर रहे थे। निर्देश दिया कि एक महीने की अवधि के लिए आईटी टीम और रजिस्ट्री यह सुनिश्चित करेगी कि वकील को हाइब्रिड या वीसी सुनवाई में शामिल होने की अनुमति नहीं है।

अमित शाह से मुलाकात का आश्वासन देकर ठगी के आरोपी को नहीं मिलेगी अग्रिम जमानत
उच्च न्यायालय ने रेलवे के एक ठेके के संबंध में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कराने का झूठा आश्वासन देकर एक व्यापारी से दो करोड़ रुपये की ठगी करने के आरोपी को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि शिकायतकर्ता को धोखा देने के लिए ऐसे संवैधानिक अधिकारियों के नामों का इस्तेमाल करना अपराध की गंभीरता को बढ़ा देता है। ऐसे में आरोपी अनीश बंसल को अग्रिम जमानत देने का कोई आधार नहीं बनता है।

न्यायमूर्ति स्वर्णकांत शर्मा ने कहा इसके अलावा यह अदालत यह भी गौर करती है कि आरोपी लोगों ने शिकायतकर्ता को बड़ी रकम देने के लिए प्रेरित करने की खातिर केंद्रीय गृह मंत्री के नाम का इस्तेमाल किया है। जबकि वह अच्छी तरह जानते थे कि पीड़ित को दिया जा रहा आश्वासन झूठा है। यह आरोप अपराध की गंभीरता को बढ़ा देता है कि शिकायतकर्ता को धोखा देने के लिए ऐसे संवैधानिक प्राधिकारी और उनके परिवार के नामों का इस्तेमाल किया गया।

पीएफआई के दो नेताओं की अंतरिम जमानत याचिका पर सुनवाई से इनकार
उच्च न्यायालय ने धनशोधन के एक मामले में प्रतिबंधित संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के दो नेताओं की अंतरिम जमानत याचिका पर फिलहाल सुनवाई से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा उन्हें इस मामले में निचली अदालत के आदेश का इंतजार करना चाहिए। पीएफआई की दिल्ली इकाई के अध्यक्ष मोहम्मद परवेज अहमद और कार्यालय सचिव अब्दुल मुकीत ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा मामले में इस आधार पर अंतरिम जमानत की मांग की थी कि एजेंसी (ईडी) गिरफ्तारी से बाद 60 दिनों की निर्धारित अवधि में आरोपपत्र दाखिल नहीं कर पायी है और यह अवधि 21 नवंबर, 2022 को पूरी हो गयी थी। उनके वकील मुजीब उर रहमान ने उच्च न्यायालय में कहा कि 17 दिसंबर, 2022 को वे (उनके मुवक्किल) वैधानिक जमानत पाने के वास्ते निचली अदालत गये थे।

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