सम-विषम के खिलाफ एनजीटी में याचिका, प्रदूषण में नहीं आई कमी
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जोर-शोर से चलाए गए प्रचार अभियान के बाद सम-विषम स्कीम का दूसरा भाग आज से राष्ट्रीय राजधानी में शुरू हो रहा है। सरकारी दावे के मुताबिक, इस स्कीम से राजधानी की परिवेशी वायु गुणवत्ता (एबियंट एयर क्वालिटी) में सुधार आएगा।
वहीं इस दावे के खिलाफ नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में याचिका दाखिल की गई है। याची का आरोप है कि जनवरी में हुए सम-विषम के जरिये प्रदूषण स्तर में कोई कमी नहीं आई थी।
न ही सरकार ने सुधार से संबंधित कोई ठोस आंकड़ा पेश किया था। याचिका में एनजीटी से दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण कमेटी (डीपीसीसी) व केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण कमेटी (सीपीसीबी) से स्वतंत्र तरीके से प्रदूषण स्तर मापने के संबंध में आदेश जारी करने की मांग की गई है। इस मामले पर एनजीटी मंगलवार को विचार करेगा।
सम-विषम की सफलता और छूट पर भी सवाल
याची महेंद्र पांडेय की ओर से एडवोकेट पीयूष अग्रवाल व एडवोकेट अभिजीत सिन्हा ने एनजीटी में यह याचिका दाखिल की है। मामले में दिल्ली सरकार, पर्यावरण विभाग, डीपीसीसी और सीपीसीबी को पक्षकार बनाया गया है। मालूम हो कि हाल ही में एनजीटी ने सरकार से पूछा था कि वह क्यों नहीं सम-विषम की तर्ज पर वायु प्रदूषण के अन्य स्रोतों पर जागरूकता के लिए प्रचार-प्रसार कर रही है।
याचिका में कहा गया है कि दिल्ली सरकार इस स्कीम के जरिये वाहनों से होने वाले प्रदूषण को रोकेगी, जबकि बड़े पैमाने पर ट्रक, दोपहिया, महिलाओं और वीआईपी को छूट प्रदान की गई है। प्रतिदिन दोपहिया वाहनों से भयानक प्रदूषण हो रहा है।
वहीं पहले चरण के स्कीम के बाद दिल्ली सरकार ने संचार माध्यमों में प्रचार के जरिये यह घोषणा की थी कि इस स्कीम से प्रदूषण स्तर में कमी आई है।
अधूरे आंकड़ों को देखें तो यह निष्कर्ष बेइमानी है
अगर सीपीसीबी के अधूरे आंकड़ों को देखें तो यह निष्कर्ष बेइमानी है। याचिका में दावा किया गया है कि आईआईटी रुड़की ने भी अपने अध्ययन में कहा था कि सम-विषम के बाद दिल्ली में वायु गुणवत्ता में कोई महत्वपूर्ण सुधार नहीं आएगा।
वहीं आईआईटी कानपुर ने भी ज्यादा प्रदूषण फैलाने में दोपहिया वाहनों को जिम्मेदार माना है। याचिका में कहा गया है कि सिर्फ वायु प्रदूषण ही नहीं संबंधित प्राधिकरण ध्वनि प्रदूषण मापने और नियंत्रित करने को लेकर कोई उपाय नहीं कर रहे हैं।
न हीं सम-विषम के पहले दौर में ऐसा कुछ हुआ था और दूसरे दौर में भी कोई तैयारी नहीं दिख रही है। एनजीटी इस संबंध में भी प्राधिकरणों को निर्देश दे।