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डेढ़ घंटे चली बैठक नहीं बनी बात, अलीगढ़ की बसें न चलने से यात्री परेशान

Tue, 09 Aug 2016 06:19 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, फरीदाबाद
ब्यूरो/अमर उजाला, फरीदाबाद Updated Tue, 09 Aug 2016 06:19 PM IST
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permit dispute between haryana and UP goes unresolve
- फोटो : ‌file photo

यूपी और हरियाणा राज्यों के परिवहन विभाग में जारी खींचतान खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। इसका खामियाजा दोनों राज्यों के यात्रियों को भुगतना पड़ रहा है। खींचतान के चलते सोमवार को भी अलीगढ़ रूट पर एक भी बस नहीं चल पाई। कर्मचारियों को मनाने के लिए सोमवार को यूपी परिवहन निगम के क्षेत्रीय प्रबंधक फरीदाबाद डिपो पहुंचे। जहां ट्रैफिक मैनेजर की मध्यस्थता में करीब डेढ़ घंटे चली बैठक बेनतीजा रही।

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दरअसल, 1983 में हुए समझौते के मुताबिक उत्तर प्रदेश और हरियाणा रोडवेज की बसें अलीगढ़ रूट पर आती-जाती हैं। रूट पर यूपी रोडवेज की करीब 50 बसें और हरियाणा रोडवेज की 14 बसें आवागमन करती हैं लेकिन अलीगढ़ के एआरटीओ की कथित मनमानी के कारण दोनों राज्यों के रोडवेज निगम परेशान हैं। एआरटीओ द्वारा पिछले छह महीने में हरियाणा रोडवेज की 10 से ज्यादा बसों का चालान काटे जा चुके हैं।
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इसके एवज में रोडवेज निगम एक लाख रुपये से अधिक जुर्माना भुगत चुका है। एआरटीओ की मनमानी से नाराज रोडवेज कर्मचारियों ने अब प्रदेश सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए अलीगढ़ रूट पर बसें ले जाने से मना कर दिया है। साथ ही शुक्रवार को रोडवेज कर्मियों ने फैजाबाद, इटावा, शिकोहाबाद, अलीगढ़ रूट की सात बसों को पकड़ कर डिपो में बंद कर दिया। एक सप्ताह की खींचातानी के कारण यात्रियों को बेहद परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बसों की कमी के चलते यात्रियों को घंटों बसों का इंतजार करना पड़ता है।
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नहीं माना यूपी परिवहन विभाग
रोडवेज कर्मचारियों द्वारा पकड़ी बसों को छुड़ाने के लिए सोमवार सुबह यातायात प्रबंधक सराफ खान अपने दो अधिकारियों के साथ पहुंचे। जहां उन्होंने बल्लभगढ़ डिपो के यातायात प्रबंधक नेत्रपाल खत्री की मध्यस्थता में कर्मचारी नेताओं से वार्ता की। वार्ता के दौरान यूपी टीएम ने फोन कर अलीगढ़ आरटीओ से हरियाणा रोडवेज बसों को छोड़ने के लिए कहा। लेकिन आरटीओ ने बस छोड़ने की एवज में जुर्माना भरने की दलील दी। आरटीओ की सख्त रवैये को देखते हुए रोडवेज कर्मचारी भी भड़क गए और वार्ता बीच में छोड़ कर चले गए। वार्ता में कर्मचारी नेता रामआसरे, रविंद्र नागर, ओमी और शहजाद आदि मौजूद रहे। कर्मचारियों ने दो टूक जवाब देते हुए कहा कि यदि एआरटीओ की मनमानी बंद नहीं हुई तो वह उग्र आंदोलन करने पर विवश होंगे। यूनियन ने इस मुद्दे पर प्रदेश सरकार से हस्तक्षेप करने की मांग की है।


यूपी प्रशासन गलती करने के बावजूद नहीं मान रहा है। आरटीओ ने पकड़ी गई बसों को छोड़ने के एवज में 1.85 लाख रुपये का जुर्माना बताया है। यदि सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया तो यूनियन डिपो की एक भी बस को नहीं चलने देगी।-रविंद्र नागर, जिला महासचिव, हरियाणा रोडवेज वर्कर्स यूनियन

अलीगढ़ रूट पर पहले से ही बसों की कमी है। अब विवाद के कारण बस नहीं चल रही हैं। अलीगढ़ जाने के लिए निजी वाहनों का इंतजार करना पड़ रहा है।-कविता, यात्री

दोनों राज्यों के बीच यात्री पिस रहे है। बसों की कमी के चलते निजी वाहनों ने किराया भी बढ़ा दिया है।-कमल भारद्वाज, यात्री

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