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Delhi: दिल्लीवासियों को इस सुविधा के लिए देना होगा चार्ज, केंद्र सरकार के कानून के तहत उठाया गया कदम

Mon, 07 Apr 2025 10:38 PM IST
आकाश दुबे अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: आकाश दुबे Updated Mon, 07 Apr 2025 10:38 PM IST
सार

2011 की जनगणना के अनुसार दिल्ली में लगभग 43 लाख घर हैं और आबादी करीब 192 लाख थी, लेकिन बीते 14 वर्षों में यह आंकड़ा तेजी से बढ़ा है और अब दिल्ली की आबादी तीन करोड़ के करीब मानी जा रही है।

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People of Delhi will have to pay a charge for this facility
एमसीडी मुख्यालय - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राजधानी के निवासियों को अब अपने घर के कूड़े का यूजर चार्ज देना होगा। दरअसल एमसीडी ने केंद्र सरकार के नौ साल पहले बनाए कानून के तहत कूड़ा उठाने के बदले यूजर चार्ज वसूलने का फैसला किया है। वह व्यावसायिक परिसरों से ही नहीं, बल्कि रिहायशी परिसरों से भी यह चार्ज लेगी। उसने वर्तमान वित्तीय वर्ष से यह चार्ज वसूलने की शुरुआत कर दी है। एमसीडी ने अपने आर्थिक संकट से उबरने के लिए यह कदम उठाया है।

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दिल्ली में रहने वाले लोगों को अपने मकान के आकार के अनुसार सालाना यूजर चार्ज देना होगा। एमसीडी ने यह चार्ज संपत्ति कर विभाग के माध्यम से वसूलने का निर्णय लिया है और इसे संपत्ति कर के साथ जोड़ दिया गया है। खास बात यह है कि इसे प्रति माह के बजाय पूरे वर्ष का एकमुश्त लिया जाएगा, इसकी जानकारी एमसीडी ने पहले सार्वजनिक रूप से नहीं दी थी, मगर हाल ही में जब एमसीडी का संपत्ति कर जमा करने का पोर्टल चालू हुआ तो लोगों को इस चार्ज के बारे में पता चला, जिसके बाद आम लोगों से लेकर राजनीतिक गलियारों तक में हड़कंप मच गया।

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केंद्र सरकार के कानून के तहत 50 वर्गमीटर तक के मकान पर 50 रुपये प्रति माह, 50 से 200 वर्गमीटर तक के मकान पर 100 रुपये प्रति माह और 200 वर्गमीटर से अधिक बड़े मकान पर 200 रुपये प्रति माह यूजर चार्ज तय है, लेकिन एमसीडी की ओर से इसे सालाना रूप में जोड़ दिया है। दरअसल वह संपत्ति कर एक साल का एक बार में लेती है। इस कारण पोर्टल पर 100 वर्गमीटर के मकान पर सीधे 5000 रुपये की मांग की जा रही है, जो तय राशि से कई गुना अधिक है। इस बारे में शिकायत मिलने पर एमसीडी जांच कर रही है।

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एमसीडी के अनुसार, यह कदम इसलिए जरूरी है क्योंकि दिल्ली में हर दिन लगभग 11,000 मीट्रिक टन से अधिक कूड़ा निकलता है, जिसे संभालने के लिए संसाधनों की भारी जरूरत है। उसका कहना है कि 2011 की जनगणना के अनुसार दिल्ली में लगभग 43 लाख घर हैं और आबादी करीब 192 लाख थी, लेकिन बीते 14 वर्षों में यह आंकड़ा तेजी से बढ़ा है और अब दिल्ली की आबादी तीन करोड़ के करीब मानी जा रही है। दिल्ली के 12 जोन और 250 वार्डों में फैली कॉलोनियों से निकलने वाले कूड़े के प्रबंधन में होने वाला खर्च एमसीडी के लिए एक बड़ी चुनौती है। ऐसे में उसका कहना है कि यह यूजर चार्ज जरूरी है ताकि साफ-सफाई की व्यवस्था को बनाए रखा जा सके।

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