{"_id":"5fed9a708ebc3e3f7e5d3ec0","slug":"people-of-all-religions-and-castes-coming-closer-with-farmer-movement","type":"story","status":"publish","title_hn":"किसान आंदोलन के सहारे नजदीक आ रहे सभी मजहब व जातियों के लोग...","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
किसान आंदोलन के सहारे नजदीक आ रहे सभी मजहब व जातियों के लोग...
Thu, 31 Dec 2020 03:01 PM IST
विक्रांत चतुर्वेदी
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: विक्रांत चतुर्वेदी
Updated Thu, 31 Dec 2020 03:01 PM IST
सार
- देशभर से आ रहे किसान संगठन किसान आंदोलन से जुड़ रहे, फिलहाल 500 से अधिक संगठन किसान आंदोजन से जुड़े, सभी कर रहे मंच सांझा
विज्ञापन
आंदोलन कर रहे किसान
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
समय और हालात के साथ एक दूसरे से बिछुड़े बहुत से मजहब और जातियों के लोगों को किसान आंदोलन ने जोड़ने का काम किया है। सिंघु बार्डर हो या टिकरी व गाजीपुर बार्डर, यहां हर वर्ग, जाति व मजहब के लोग आंदोलन का हिस्सा बन गए हैं। खासकर पश्चिम उत्तर-प्रदेश में चंद वर्षों पूर्व हुई सांप्रदायिक हिंसा के बाद तो दो समुदायों में काफी दूरियां पैदा हो गई थीं।
लेकिन किसानों ने उन सभी को दरकिनार करते हुए आज एक दूसरे का हाथ थाम लिया है। बार्डर पर लगभग सभी मजहबों के लोगों का भरपूर साथ मिल रहा है। नरेश टिकैत ने कहा कि सरकार की हठधर्मी की वजह से किसानों को एकता का मंच मिला है। पूरे देश की हर बिरादरी और हर मजहब के लोग इस आंदोलन से जुड़ते जा रहे हैं।
बार्डर पर लगे लंगर में कौशांबी के काशिफ और आसिफ स्कूल के बाद अपनी सेवाएं देने आते हैं। उनके माता-पिता उनको लंगर में सेवा के लिए भेजते हैं। उत्तराखंड से आए किसान गुरजीत ने बताया कि लंगर में किसी का नाम या मजहब देखकर खाना नहीं दिया जाता। यहां आने वाले हर शख्स को इस लंगर पर बराबर का हक है। इंसान नहीं ऊपर वाला सभी को रोटी दे रहा है।
विज्ञापन
गाजीपुर बार्डर पर ही बौद्ध धर्म के कुछ साधुओं ने अपना तंबू लगाकर विरोध-प्रदर्शन शुरू कर दिया है। उनका कहना है कि कृषि कानून देश के भविष्य का सवाल है। इस पर कोई समझौता नहीं हो सकता है। आज साधुओं को भी किसानों के समर्थन में आना पड़ रहा है। गाजीपुर में लंगर सेवा देने वाले लगभग सभी धर्मों से हेँ। यहां भगवा वस्त्र पहने व जालीदार टोपी वाले भी खूब दिखते हैं।
विज्ञापन
लेकिन किसानों ने उन सभी को दरकिनार करते हुए आज एक दूसरे का हाथ थाम लिया है। बार्डर पर लगभग सभी मजहबों के लोगों का भरपूर साथ मिल रहा है। नरेश टिकैत ने कहा कि सरकार की हठधर्मी की वजह से किसानों को एकता का मंच मिला है। पूरे देश की हर बिरादरी और हर मजहब के लोग इस आंदोलन से जुड़ते जा रहे हैं।
विज्ञापन
बार्डर पर लगे लंगर में कौशांबी के काशिफ और आसिफ स्कूल के बाद अपनी सेवाएं देने आते हैं। उनके माता-पिता उनको लंगर में सेवा के लिए भेजते हैं। उत्तराखंड से आए किसान गुरजीत ने बताया कि लंगर में किसी का नाम या मजहब देखकर खाना नहीं दिया जाता। यहां आने वाले हर शख्स को इस लंगर पर बराबर का हक है। इंसान नहीं ऊपर वाला सभी को रोटी दे रहा है।
विज्ञापन
गाजीपुर बार्डर पर ही बौद्ध धर्म के कुछ साधुओं ने अपना तंबू लगाकर विरोध-प्रदर्शन शुरू कर दिया है। उनका कहना है कि कृषि कानून देश के भविष्य का सवाल है। इस पर कोई समझौता नहीं हो सकता है। आज साधुओं को भी किसानों के समर्थन में आना पड़ रहा है। गाजीपुर में लंगर सेवा देने वाले लगभग सभी धर्मों से हेँ। यहां भगवा वस्त्र पहने व जालीदार टोपी वाले भी खूब दिखते हैं।