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Delhi: निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना का रास्ता साफ, कैबिनेट ने प्रारूप विधेयक को दी मंजूरी

Sat, 08 Aug 2026 08:08 AM IST
Vijay Singh Pundir अमर उजाला नेवटर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेवटर्क, नई दिल्ली Published by: Vijay Singh Pundir Updated Sat, 08 Aug 2026 08:08 AM IST
सार

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि प्रस्तावित कानून दिल्ली में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में नए युग की शुरुआत करेगा। यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप दिल्ली को वैश्विक शिक्षा केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

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Path cleared for setting up private universities; Cabinet approves draft bill
सीएम रेखा गुप्ता - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दिल्ली में निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना का रास्ता साफ हो गया है। दिल्ली कैबिनेट ने निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना और निगमित किए जाने संबंधी प्रारूप विधेयक को मंजूरी दे दी है। अब इसे विचार और पारित कराने के लिए दिल्ली विधानसभा में पेश किया जाएगा। सरकार का कहना है कि कानून लागू होने के बाद राजधानी में उच्च शिक्षा के नए विकल्प बढ़ेंगे और विश्वस्तरीय संस्थानों की स्थापना का मार्ग खुलेगा।

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मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि प्रस्तावित कानून दिल्ली में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में नए युग की शुरुआत करेगा। यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप दिल्ली को वैश्विक शिक्षा केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। वर्तमान में दिल्ली में डीयू, जेएनयू और जामिया मिलिया इस्लामिया जैसे केंद्रीय विश्वविद्यालयों के अलावा दिल्ली सरकार के गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय, डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, इंदिरा गांधी दिल्ली तकनीकी महिला विश्वविद्यालय, दिल्ली स्किल एवं उद्यमिता विश्वविद्यालय और डीटीयू जैसे प्रमुख संस्थान हैं।
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दिल्ली के छात्रों के लिए 25% सीटें आरक्षित होंगी
प्रस्तावित विधेयक में दिल्ली के विद्यार्थियों के हितों को प्राथमिकता दी गई है। प्रत्येक पाठ्यक्रम में लागू आरक्षण नीति के अनुरूप 25 प्रतिशत सीटें दिल्ली के छात्रों के लिए आरक्षित रखने का प्रावधान किया गया है। निजी विश्वविद्यालयों में प्रवेश प्रक्रिया पारदर्शी और भेदभाव रहित रखना अनिवार्य होगा।
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विदेशी संस्थानों के ऑफ-कैंपस केंद्र भी खुल सकेंगे

विधेयक के तहत अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थाओं और उनके ऑफ-कैंपस केंद्रों के लिए दिल्ली में उपस्थिति स्थापित करने का रास्ता खुलेगा। राजधानी में भूमि की सीमित उपलब्धता को देखते हुए बड़े भू-भाग वाले पारंपरिक परिसर की अनिवार्यता से आगे बढ़कर आधुनिक मॉडल अपनाने का प्रावधान किया गया है।

नियामक प्राधिकरण करेगा निगरानी
निजी विश्वविद्यालयों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए दिल्ली प्राइवेट यूनिवर्सिटीज रेगुलेटरी अथॉरिटी गठित की जाएगी। यह शिक्षण व्यवस्था, अनुसंधान, प्रवेश, परीक्षाओं, छात्र अभिलेख और संस्थानों के समग्र प्रदर्शन की निगरानी करेगी। जरूरत पड़ने पर प्राधिकरण सुधारात्मक निर्देश भी जारी कर सकेगा।

विशेषज्ञ समिति की जांच के बाद मिलेगी मंजूरी
किसी निजी विश्वविद्यालय की स्थापना से पहले वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों, शिक्षाविदों, यूजीसी प्रतिनिधियों और वित्त विशेषज्ञों की समिति प्रस्ताव की जांच करेगी। उसकी सिफारिश के आधार पर ही विश्वविद्यालय को मंजूरी मिलेगी। सभी निजी विश्वविद्यालय स्व-वित्तपोषित होंगे और उन्हें सरकार से नियमित वित्तीय सहायता नहीं मिलेगी। हालांकि, शोध परियोजनाओं के लिए वे अनुदान प्राप्त कर सकेंगे।

वैश्विक शिक्षा केंद्र के रूप में पहचान मजबूत करेगी:रेखा गुप्ता
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि विधेयक से छात्रों को विश्वस्तरीय शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार के बेहतर अवसर मिलेंगे। इससे दिल्ली वैश्विक शिक्षा केंद्र के रूप में अपनी पहचान और मजबूत करेगी।

अपने ही शहर में विश्वस्तरीय उच्च शिक्षा उपलब्ध होगी:आशीष सूद
शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने कहा कि कानून का उद्देश्य केवल निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना करना नहीं, बल्कि दिल्ली के युवाओं को अपने ही शहर में गुणवत्तापूर्ण और विश्वस्तरीय उच्च शिक्षा उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि सरकार दिल्ली को देश की नॉलेज कैपिटल के रूप में विकसित करना चाहती है।

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