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पंकज उधास अपने हर कॉन्सर्ट से पहले करते हैं ये काम, पढ़ें उनके बारे में 4 खास बातें

Fri, 31 Aug 2018 01:21 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 31 Aug 2018 01:21 PM IST
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pankaj udhas rare facts about ghazal singer
pankaj udhas

गजलों की दुनिया के बेताज बादशाह पंकज उधास अपने हर कॉन्सर्ट से पहले कौन सी चीज पढ़ते हैं और दिल्ली की उनके दिल में क्या खास जगह है ये सब वो सवाल हैं जो उनके सभी फैन्स जरूर जानना चाहेंगे। जमींदार परिवार से होने के बावजूद उनकी संगीत में दिलचस्पी कैसे बढ़ी और आज के संगीत के बारे में वो क्या सोचते हैं। जानिए उनकी ऐसी ही कुछ खास बातें जो बहुत कम लोग जानते हैं।

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pankaj udhas

पंकज उधास ने एक बार खुद बताया था कि वह आज भी अपने हर कॉन्सर्ट से पहले हनुमान चालीसा जरूर पढ़ते हैं।  उन्होंने ये भी बताया था कि वह कॉन्सर्ट करते-करते श्रोताओं का टेस्ट इतना पकड़ चुके हैं कि अब वह जान जाते हैं कि लोग कौन सा गाना सुनना चाहते हैं और सेलेक्टेड गानों को बदलकर लोगों के मूड के हिसाब से चीजें तुरंत तय कर लेते हैं। 'चांदी जैसा रंग है तेरा' और 'चिट्ठी आई है' जैसे सदाबहार गजलें गा चुके पंकज कहते हैं कि हर देश, शहर, राज्य के श्रोता अलग तरह के होते हैं ऐसे में उन्हें क्या चाहिए मैं उसके हिसाब से परफॉर्म करता हूं।

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पंकज उधास बताते हैं कि दिल्ली उनकी यादों में विशेष स्थान रखती है। वह कहते हैं, 'मेरे संगीत को लेकर दिल्ली हमेशा दयालु रही है। मुझे आज भी याद है कि 80 के दशक में दिल्ली के स्कूल के कुछ लड़कों ने मिलकर मेरे एक प्रिय मित्र के जरिए सिरी फोर्ट ऑडिटोरियम में एक कॉन्सर्ट का आयोजन किया था। उन्होंने अखबार में इसका विज्ञापन भी दिया था और एक हफ्ते के अंदर सारे टिकट बिक गए थे। इसके बाद उन्होंने दूसरे कॉन्सर्ट का भी विज्ञापन दे दिया था। दोनों कॉन्सर्ट के खत्म होने पर सारी चीजों के पेमेंट देने के बाद उन लड़कों के पास काफी पैसे बच गए थे जिसे उन्होंने छुट्टियों पर खर्च किया।'

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वो कहते हैं कि उनका संगीत का बैकग्राउंड नहीं था लेकिन लेकिन इससे उनका नाता जल्द जुड़ गया। मेरे दादा-परदादा जमींदार थे। लेकिन मेरे पिता को संगीत का शौक था और अपने जुनून के चलते उन्होंने दिलरुबा/इसराज नामक यंत्र बजाना सीखा। यही कारण है कि हम तीनों भाईयों पर संगीत का काफी असर पड़ा। मेरी मां कोई ट्रेन्ड सिंगर नहीं थीं पर वो गाती थीं। हर शादी या समारोह में मेरी मां को गाने के लिए कहा जाता था। शुरुआत में मैं नौसीखिए की तरह गजलें गाता था लेकिन बात में मैंने इसे पूरी गंभीरता से लिया और खूब अभ्यास किया।

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पंकज उधास मानते हैं कि आज कल के गायकों ने अपनी पहचान खो दी है। आजकल जब रेडियो पर गाना बजता है तो अनाउन्स कि अगला गाना शाहरुख, सलमान या अक्षय की फिल्म से न कि अरिजीत या सोनू निगम का अगला गाना। ऐसे में गायक, गीतकार और संगीतकार का क्या। मुझे लगता है कि ये सब मार्केटिंग की वजह से है।

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