{"_id":"68922b026f96fc010601b9e5","slug":"panel-formed-to-determine-school-for-autistic-student-delhi-ncr-news-c-340-1-del1011-100158-2025-08-05","type":"story","status":"publish","title_hn":"Delhi NCR News: ऑटिस्टिक छात्र के स्कूल का निर्धारण करने के लिए पैनल गठित","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Delhi NCR News: ऑटिस्टिक छात्र के स्कूल का निर्धारण करने के लिए पैनल गठित
विज्ञापन
नई दिल्ली। उच्च न्यायालय ने मंगलवार को विशेषज्ञों की एक समिति गठित की है जो यह मूल्यांकन करेगी कि क्या ऑटिज्म से पीड़ित एक लड़की को राजधानी के किसी निजी स्कूल में दाखिला दिया जा सकता है। समिती यह देखेगी कि उसे विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए बने स्कूल की आवश्यकता है या फिर निजी स्कूल उसके लिए ठीक है। मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला की पीठ ने जीडी गोयनका पब्लिक स्कूल की तरफ से दायर अपील पर सुनवाई कर रही थी।
स्कूल ने उस आदेश के खिलाफ यह अपील की है जिसमें स्कूल को निर्देश दिया गया था कि वह बच्ची को उपयुक्त कक्षा में फीस देने वाले छात्र के रूप में दाखिला दे। पीठ ने संबंधित डॉक्टर को बच्ची की जांच करने और निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए आवश्यक अध्ययन करने का भी निर्देश दिया। यह अदालत उच्च न्यायालय के एकल न्यायाधीश के 1 जुलाई के आदेश के खिलाफ अपील पर सुनवाई कर रही थी जिसमें कहा गया था कि समावेशी शिक्षा का अर्थ है अपनापन, यह मानते हुए कि कक्षा में प्रत्येक बच्चे का स्थान है, इसलिए नहीं कि वे एक जैसे हैं, बल्कि इसलिए कि वे अलग हैं, क्योंकि यह अंतर सभी के लिए सीखने के माहौल को समृद्ध बनाता है। एकल न्यायाधीश की पीठ के समक्ष दायर याचिका में दावा किया गया था कि बच्ची का जन्म मई 2017 में हुआ था। नवंबर 2019 में एक डॉक्टर को संदेह हुआ कि वह ऑटिज्म से पीड़ित है और उसने उसका उपचार शुरू किया, जो कोविड-19 के कारण बाधित हो गया।
विज्ञापन
स्कूल ने उस आदेश के खिलाफ यह अपील की है जिसमें स्कूल को निर्देश दिया गया था कि वह बच्ची को उपयुक्त कक्षा में फीस देने वाले छात्र के रूप में दाखिला दे। पीठ ने संबंधित डॉक्टर को बच्ची की जांच करने और निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए आवश्यक अध्ययन करने का भी निर्देश दिया। यह अदालत उच्च न्यायालय के एकल न्यायाधीश के 1 जुलाई के आदेश के खिलाफ अपील पर सुनवाई कर रही थी जिसमें कहा गया था कि समावेशी शिक्षा का अर्थ है अपनापन, यह मानते हुए कि कक्षा में प्रत्येक बच्चे का स्थान है, इसलिए नहीं कि वे एक जैसे हैं, बल्कि इसलिए कि वे अलग हैं, क्योंकि यह अंतर सभी के लिए सीखने के माहौल को समृद्ध बनाता है। एकल न्यायाधीश की पीठ के समक्ष दायर याचिका में दावा किया गया था कि बच्ची का जन्म मई 2017 में हुआ था। नवंबर 2019 में एक डॉक्टर को संदेह हुआ कि वह ऑटिज्म से पीड़ित है और उसने उसका उपचार शुरू किया, जो कोविड-19 के कारण बाधित हो गया।
विज्ञापन