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मंडियों में नहीं शुरू हो पाई धान की खरीद, सरकार से नाराज किसान
ब्यूरो/अमर उजाला, फरीदाबाद
Updated Mon, 17 Oct 2016 12:03 AM IST
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सीएम मनोहर लाल खट्टर
- फोटो : amar ujala
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एक अक्तूबर से शुरू होने वाली धान और बाजरे की सरकारी खरीद 15 दिन बीत जाने के बावजूद शुरू नहीं हो पाई है। सरकारी खरीद न होने के कारण किसानों को समर्थन मूल्य से भी कम पर अपनी फसल को बेचना पड़ रहा है।
किसानों का आरोप है कि को सरकार नहीं खरीद रही है। जबकि कांग्रेस के शासन में बाजरे को सरकार के स्तर पर खरीदा गया था। इस बार बाजरा और धान का सरकार ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत बीमा भी किया है। लेकिन किसानों को इस योजना के तहत सरकार से कुछ भी खास मिलने की उम्मीद दिखाई नहीं देती। पेश है संवाददाता मुकेश शर्मा की रिपोर्ट
सुबह 10 बजे
अनाज मंडी में धान के सीजन में भी ज्यादा धान की ढेरी दिखाई नहीं दे रही है।इक्का-दुक्का ढेरी पर किसान बैठे है। सरकारी खरीद शुरू करने का इंतजार कर रहे है।
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इनमें से एक-दो किसान मार्केट कमेटी के कार्यालय पहुंचे और धान खरीद के लिए मौजूद कर्मचारियों को कहा। कर्मचारियों ने कहा, यहां खरीद नहीं होती। सरकारी एजेंसी वाले आएं, तो खरीद हो जाएगी।
मन-मसोस कर वापस किसान अपने फसल के पास पहुंच गए और दुखी मन से सरकार को कोसते है। घघौला गांव के पूरन ने कहा, ‘इसबार धान ने पट मार दिया। लागत भी नहीं निकल रही।
भाव इतना कम है, गुजारा करना मुश्किल हो जाएगा। दुखी मन से दूसरे किसान हरिचंद ने कहा, ‘खाद, बीज, लेबर सब मंहगी हो गई। एक एकड़ को काटने के लिए लेबर 4000 रुपये मांगी है। क्या करें, समझ में नहीं आ रहा।
प्रात: 11 बजे
मंडी के शेड के नीचे धान की बोरियों पर बैठे लठौली गांव के जगवीर कहते है, ‘इसबार बारिश ने फसल को नीचे गिरा दिया। जिससे धान का झाड़ कम निकल रहा है। इसके बावजूद सरकार भाव नहीं बढ़ा रही है। इबसार 1509 धान पूरी मेहनत से बोया था। लेकिन इसका भाव 1600 से ऊपर नहीं जा रहा है। जबकरृ कांग्रेस राज में यह धान तीन हजार से साढ़े चार हजार तक बिका था।
प्रात: 11:30 बजे
किसान मन्नू ने इसबार चार एकड़ धान बोया। अच्छा खाद, बीज लगाया। लेकिन जब बेचने मंडी पहुंचा तो सिर चकरा गया। कहने लगा, धान की कीमत सुनकर रोना आता है।
लेबर, खाद, बीज मिलाकर एक एकड़ में करीब 15 हजार रुपये की लागत आती है। छह माह मेहनत करने के बाद एकड़ में 12 से 15 क्विंटल की पैदावार हुई। जिसका भाव सिर्फ 12 सौ रुपये चल रहा है। क्या करें, समझ में नहीं आ रहा? पास में बैठे चत्तर सिंह ने कहा कि इस बार प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत नुकसान भरपाई का मुआवजा मिलेगा या नहीं, यह भी कहना मुश्किल है।
दोपहर 12: 15 बजे
इसी दौरान मंडी में निजी ट्रेडर्स का एक दल मंडी पहुंचा। उन्होंने दो आढ़तियों को साथ लिया और मौजूद किसानों से धान खरीदने पर बात हुई। किसानों ने आढ़ति पर भाव छोड़ दिया और कहा, जो ये कहेंगे वैसा करेंगे।
करीब आधा घंटे की मशक्कत के बाद राइस मिल के प्रतिनिधिमंडल ने ढेरी देख परमल 1250, धान 1121 दो हजार और 1509 धान को 1610 में खरीद लिया। जबकि सरकार द्वारा धान का समर्थन मूल्य 1510 प्रति क्विंटल घोषित किया जा चुका है।
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किसानों का आरोप है कि को सरकार नहीं खरीद रही है। जबकि कांग्रेस के शासन में बाजरे को सरकार के स्तर पर खरीदा गया था। इस बार बाजरा और धान का सरकार ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत बीमा भी किया है। लेकिन किसानों को इस योजना के तहत सरकार से कुछ भी खास मिलने की उम्मीद दिखाई नहीं देती। पेश है संवाददाता मुकेश शर्मा की रिपोर्ट
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सुबह 10 बजे
अनाज मंडी में धान के सीजन में भी ज्यादा धान की ढेरी दिखाई नहीं दे रही है।इक्का-दुक्का ढेरी पर किसान बैठे है। सरकारी खरीद शुरू करने का इंतजार कर रहे है।
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इनमें से एक-दो किसान मार्केट कमेटी के कार्यालय पहुंचे और धान खरीद के लिए मौजूद कर्मचारियों को कहा। कर्मचारियों ने कहा, यहां खरीद नहीं होती। सरकारी एजेंसी वाले आएं, तो खरीद हो जाएगी।
मन-मसोस कर वापस किसान अपने फसल के पास पहुंच गए और दुखी मन से सरकार को कोसते है। घघौला गांव के पूरन ने कहा, ‘इसबार धान ने पट मार दिया। लागत भी नहीं निकल रही।
भाव इतना कम है, गुजारा करना मुश्किल हो जाएगा। दुखी मन से दूसरे किसान हरिचंद ने कहा, ‘खाद, बीज, लेबर सब मंहगी हो गई। एक एकड़ को काटने के लिए लेबर 4000 रुपये मांगी है। क्या करें, समझ में नहीं आ रहा।
प्रात: 11 बजे
मंडी के शेड के नीचे धान की बोरियों पर बैठे लठौली गांव के जगवीर कहते है, ‘इसबार बारिश ने फसल को नीचे गिरा दिया। जिससे धान का झाड़ कम निकल रहा है। इसके बावजूद सरकार भाव नहीं बढ़ा रही है। इबसार 1509 धान पूरी मेहनत से बोया था। लेकिन इसका भाव 1600 से ऊपर नहीं जा रहा है। जबकरृ कांग्रेस राज में यह धान तीन हजार से साढ़े चार हजार तक बिका था।
प्रात: 11:30 बजे
किसान मन्नू ने इसबार चार एकड़ धान बोया। अच्छा खाद, बीज लगाया। लेकिन जब बेचने मंडी पहुंचा तो सिर चकरा गया। कहने लगा, धान की कीमत सुनकर रोना आता है।
लेबर, खाद, बीज मिलाकर एक एकड़ में करीब 15 हजार रुपये की लागत आती है। छह माह मेहनत करने के बाद एकड़ में 12 से 15 क्विंटल की पैदावार हुई। जिसका भाव सिर्फ 12 सौ रुपये चल रहा है। क्या करें, समझ में नहीं आ रहा? पास में बैठे चत्तर सिंह ने कहा कि इस बार प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत नुकसान भरपाई का मुआवजा मिलेगा या नहीं, यह भी कहना मुश्किल है।
दोपहर 12: 15 बजे
इसी दौरान मंडी में निजी ट्रेडर्स का एक दल मंडी पहुंचा। उन्होंने दो आढ़तियों को साथ लिया और मौजूद किसानों से धान खरीदने पर बात हुई। किसानों ने आढ़ति पर भाव छोड़ दिया और कहा, जो ये कहेंगे वैसा करेंगे।
करीब आधा घंटे की मशक्कत के बाद राइस मिल के प्रतिनिधिमंडल ने ढेरी देख परमल 1250, धान 1121 दो हजार और 1509 धान को 1610 में खरीद लिया। जबकि सरकार द्वारा धान का समर्थन मूल्य 1510 प्रति क्विंटल घोषित किया जा चुका है।