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विशेषज्ञों ने जताई चिंता: बारिश से पंजाब में धान की कटाई में देरी, बढ़ सकता है पराली जलाने का संकट

Sat, 01 Oct 2022 08:17 AM IST
शाहरुख खान एजेंसी, नई दिल्ली
एजेंसी, नई दिल्ली Published by: शाहरुख खान Updated Sat, 01 Oct 2022 08:17 AM IST
सार

विशेषज्ञों के मुताबिक, बारिश के कारण पंजाब में धान की कटाई में देरी हो गई है। इसकी भरपाई करने के लिए और खेतों को अगली फसल के लिए जल्द तैयार करने के लिए किसान पराली जला सकते हैं। वहीं मौसम विभाग के मुताबिक, उत्तर भारत में 4 से 8 अक्तूबर के बीच बारिश होने की संभावना है। इस वजह से कई क्षेत्रों में कटाई में देरी हो सकती है। 

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Paddy harvesting delayed in Punjab due to rain, may increase the crisis of stubble burning
फाइल फोटो - फोटो : amar ujala

विस्तार

सर्दी आते ही दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण के स्तर में बढ़ोतरी होने लगती है। इसके पीछे ग्रीन हाउस गैसों के अलावा पंजाब के किसानों द्वारा खेतों में पराली जलाने को भी एक प्रमुख कारण के तौर पर देखा जाता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, बारिश के कारण पंजाब में धान की कटाई में देरी हो गई है। 
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इसकी भरपाई करने के लिए और खेतों को अगली फसल के लिए जल्द तैयार करने के लिए किसान पराली जला सकते हैं। वहीं मौसम विभाग के मुताबिक, उत्तर भारत में 4 से 8 अक्तूबर के बीच बारिश होने की संभावना है। इस वजह से कई क्षेत्रों में कटाई में देरी हो सकती है। 
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पंजाब कृषि विश्वविद्यालय के कृषि इंजीनियरिंग विभाग के प्रमुख डॉ. महेश नारंग ने कहा कि पिछले हफ्ते बारिश के कारण पंजाब के कई क्षेत्रों में कटाई में देरी हुई। खास तौर से अमृतसर और तरनतारण में यह विकट स्थिति देखने को मिली। 
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यहां पर किसान गेहूं से पहले आलू और मटर की खेती करते हैं। ऐसे में जल्दी खेत खाली करने के लिए किसान मशीनरी तंत्र की जगह पराली जलाने का काम कर सकते हैं। यह कोई आदर्श स्थिति नहीं है। 

अक्तूबर मध्य से हो सकती हैं पराली जलाने का काम

वहीं भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई) के मुख्य वैज्ञानिक विनय सहगल ने कहा कि 20 सितंबर से पराली जलाने के मामले सामने आने लगते हैं। पिछले हफ्ते बारिश के कारण पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने का काम नहीं हुआ। ऐसे में 12 से 14 अक्तूबर तक इनकी संख्या में कमी रहेगी। 

वहीं बारिश के कारण दिल्ली-एनसीआर के प्रदूषण में भी कमी हुई है। सहगल ने कहा, अगले हफ्ते बारिश होने की संभावना है। इसलिए पराली जलाने की घटनाएं अक्तूबर के मध्य में हो सकती है। 

इस बार दिवाली पर नहीं होगा प्रदूषण
वहीं पंजाब विश्वविद्यालय के प्रोफेसर के मुताबिक, पिछले साल दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण के तीन कारण आग लगने की घटनाएं, पटाखे और मौसम संबंधी दिक्कत शामिल थे। उनके मुताबिक, इस बार दिवाली 24 अक्तूबर को है और पराली जलाने की घटनाएं नवंबर में अधिक होती है। यह एक महत्वपूर्ण तथ्य है। लिहाजा, इस बार दिवाली पर प्रदूषण से संबंधित अधिक विकट स्थिति देखने को नहीं मिलेगी। 

पिछले साल 71 हजार पराली जलाने की घटनाएं हुईं
आईएआरआई के रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले साल 15 सितंबर से 30 नवंबर के बीच पंजाब से 71,304 पराली जलाने की घटनाएं सामने आई थीं। वहीं 2020 में इसी 45 दिन के बीच 83,002 घटनाएं हुई थीं। पिछले साल 7 नवंबर को पराली के कारण दिल्ली में पीएम 2.5 प्रदूषण का स्तर सबसे ज्यादा 48 प्रतिशत दर्ज की गई थी। 
 
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