No Fuel Policy: ओवरएज्ड वाहनों पर लगा फ्यूल बैन हटा, 1 नवंबर से NCR के पांच जिलों में भी होगा लागू
बता दें कि राजधानी में 10 साल से अधिक पुराने डीजल, 15 साल से अधिक पुराने पेट्रोल वाहनों को ईंधन देने से रोक लगा दी गई थी। जिस पर दिल्ली सरकार ने यू-टर्न लेते हुए पुराने वाहनों की जब्ती का अभियान रोक दिया था।
विस्तार
राजधानी में 15 साल पुरानी पेट्रोल और 10 साल पुरानी डीजल गाड़ियों पर लगी ईंधनबंदी फिलहाल हटा दी गई है। यह फैसला वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) की 24वीं बैठक में मंगलवार को लिया गया। ऐसे में आयोग ने अपने फैसले में कहा है कि एएनपीआर कैमरा सिस्टम या ईंधन पंप स्टेशनों पर स्थापित अन्य ऐसी प्रणालियों के माध्यम से पहचाने गए सभी समय पूरा कर चुके वाहन (ईओएल) वाहनों को दिल्ली, गुरुग्राम, फरीदाबाद, गाजियाबाद, गौतमबुद्ध नगर और सोनीपत के पांच उच्च वाहन घनत्व वाले जिलों में 1 नवंबर, 2025 और शेष एनसीआर में 1 अप्रैल, 2026 से ईंधन भरने से मना कर दिया जाएगा।
आयोग ने कहा है कि ऐसे ईओएल वाहनों के संबंध में तत्काल कानूनी कार्रवाई की जाएगी, जिसमें आरवीएसएफ नियम, 2021 और अन्य मौजूदा प्रावधानों के अनुसार जब्त करना और आगे का निपटान करना शामिल है। इसके अलावा, दिल्ली सरकार और एनसीआर राज्यों के परिवहन विभाग को एएनपीआर प्रणाली की उचित स्थापना और संचालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है। परिवहन विभागों को यह भी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है कि एएनपीआर प्रणाली का परीक्षण किया जाए और समय पर जनशक्ति का प्रशिक्षण किया जाए। वे ईंधन स्टेशनों सहित सभी हितधारकों के बीच इस निर्देश का व्यापक प्रचार-प्रसार करेंगे और प्रभावी प्रवर्तन उपायों के माध्यम से इसका सख्त अनुपालन सुनिश्चित करेंगे। साथ ही, ईओएल के बड़े बेड़े के परिसमापन की दिशा में सभी संबंधित एजेंसियों की तरफ से शुरू की गई समन्वित कार्रवाइयों की रिपोर्ट मासिक आधार पर आयोग को दी जाएगी।
राजधानी में ओवरएज हो चुके वाहनों को फ्यूल देने पर लगी थी रोक
बता दें कि पिछले दिनों राजधानी में ओवरएज हो चुके वाहनों को फ्यूल देने पर रोक लगा दी गई थी। इस नियम की काफी आलोचना हो रही थी। यहां तक कि इसको लेकर सियासत भी खूब हो रही थी। आम आदमी पार्टी लगातार दिल्ली की रेखा गुप्ता सरकार पर हमले बोल रही थी। इसके बाद दिल्ली सरकार ने प्रदूषण नियंत्रण निकाय से इस नियम को वापस लेने के लिए पत्र लिखा था।
सिरसा ने लिखा था सीएक्यूएम को पत्र
दिल्ली सरकार के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने प्रदूषण नियंत्रण निकाय को पत्र लिखकर ओवरएज हो चुके वाहनों के लिए ईंधनबंधी के फैसले पर रोक लगाने को कहा था। उन्होंने कहा था कि आग्रह है कि आदेश को तत्काल प्रभाव से तब तक के लिए रोक दिया जाए जब तक कि ऑटोमेटिक नंबर प्लेट पहचान (एएनपीआर) सिस्टम पूरे एनसीआर में इंटिग्रेट नहीं हो जाता।
उपराज्यपाल ने सीएम को लिखा था पत्र
आदेश की लगातार हो रही आलोचना और सियासी हमलों के बीच उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने भी इस मसले पर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को एक पत्र लिखा था। उन्होंने ओवरएज वाहनों को फ्यूल नहीं देने की योजना पर गंभीर आपत्ति जताते हुए कहा था कि दिल्ली अभी इस तरह के प्रतिबंध के लिए तैयार नहीं है। इस फैसले से आम लोगों खास तौर पर मध्यम वर्गीय लोगों को भारी नुकसान होगा। यह फैसला सामाजिक और आर्थिक दोनों ही लिहाज से उचित नहीं लगता।
सीएम ने सुप्रीम कोर्ट तक जाने की कही थी बात
इसके बाद मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का भी बयान सामने आया था। उन्होंने कहा था कि उनकी सरकार इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का रुख करेगी। दिल्ली सरकार शीर्ष अदालत को प्रदूषण की रोकथाम के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी देगी। साथ ही, गुजारिश करेगी कि वह राजधानी में ओवरएज वाहनों पर श के बाकी हिस्सों की तरह समान नियम लागू करने की इजाजत दे।