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मैदानों से पहाड़ों तक मलेरिया का प्रकोप, भारत सरकार ने जारी किए आंकड़े

Mon, 21 Mar 2016 09:26 AM IST
सौम्य मिश्र/अमर उजाला, नोएडा
सौम्य मिश्र/अमर उजाला, नोएडा Updated Mon, 21 Mar 2016 09:26 AM IST
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Outbreaks of malaria from the plains to the mountains, the Indian government has released figures
मलेरिया का प्रकोप

मई से अक्तूबर तक मिलने वाले मलेरिया के मामले लगभग पूरे साल मिल रहे हैं। नेशनल वेक्टर बॉर्न जिसीज कंट्रोल प्रोग्राम, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक मैदान ही नहीं जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तरांचल में भी मलेरिया के रोगियों की संख्या कम नहीं है।

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डॉक्टरों के मुताबिक मच्छरों का प्रकोप बढ़ा है। इसकी एक वजह ग्लोबल वार्मिंग भी है, जिसमें पहाड़ों का तापमान मच्छरों के प्रजनन के लिए अनुकूल बनता जा रहा है।
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नोएडा के ईएसआई अस्पताल में मलेरिया का एक मामला मिला है। डॉक्टरों के मुताबिक यह मौसम मलेरिया का सीजन नहीं है लेकिन तापमान को लेकर मच्छरों के अनुकूलन के कारण अब मरीज लगभग हर महीने मिल जाते हैं।

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2016 में 54 हजार 613 मलेरिया के पॉजिटिव रोगी

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मलेरिया का प्रकोप

नेशनल वेक्टर बार्न डिसीज कंट्रोल प्रोग्राम की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2013 में देश में मलेरिया के आठ लाख 81 हजार 730 मरीज मिले थे। इसमें जानलेवा पैरासाइट प्लाज्मोडियम फैल्सीपेरम के चार लाख 63 हजार 846 मरीज थे।

इनमें से 440 मरीजों की जान गई थी। 2014 में 11 लाख 2205 मरीज मिले थे। इनमें फैल्सीपेरम के सात लाख 22 हजार 546 मरीज शामिल थे। 562 मरीजों की जान गई थी।

2015 में 11 लाख 26 हजार 661 मरीज थे, जिसमें फैल्सीपेरम के सात लाख 56 हजार 751 मरीज थे। इनमें से 287 की जान गई थी। 2016 में जनवरी और फरवरी में 54 हजार 613 मलेरिया के पॉजिटिव रोगी मिल चुके हैं। तीन की जान जा चुकी है।

आंकड़े चौंकाने वाले हैं

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जम्मू कश्मीर में 2014 में मलेरिया के 291 मरीज मिले थे। इनमें फैल्सीपेरम की 21 में पुष्टि हुई थी। 2015 में 216 मरीज मिले। 2016 में चार मरीज मिल चुके हैं।

हिमाचल प्रदेश में 2014 में 102 मरीजों में और 2015 में 60 मरीजों में मलेरिया की पुष्टि हुई। उत्तराखंड में 2015 में 73 और इस साल फरवरी तक 12 रोगियों में मलेरिया की पुष्टि हो चुकी है।

उत्तर प्रदेश में 2014 में 41 हजार 612, 2015 में 42 हजार 563 और 2016 में 510 मरीजों में मलेरिया की पुष्टि हो चुकी है। इसमें फैल्सीपेरम के मामले भी शामिल हैं।

ग्लोबल वार्मिंग की वजह से पहाड़ों और मैदानों का तापमान गड़बड़ा गया है

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अध्ययन बताते हैं कि इंजेक्शन सबसे पसंदीदा गर्भ निरोधकों में से है।

ईएसआई और निजी अस्पताल मलेरिया के रोगियों की रिपोर्ट मलेरिया विभाग को नहीं देते हैं। बीते माह की रिपोर्ट स्वास्थ्य केंद्रों और जिला अस्पताल से 21 मार्च को मिलेगी। मच्छरों की रोकथाम के लिए शहरी इलाकों में फॉगिंग का जिम्मा प्राधिकरण का है जबकि ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य विभाग की ओर से दवा का छिड़काव कराया जाता है।
डॉ.आरके गर्ग (सीएमओ, गौतमबुद्ध नगर)

मरीजों को छुट्टी दी जा चुकी है--
मरीज मेडिसिन वार्ड में भर्ती हुई थी। वह इलाज के बाद ठीक है और उसे छुट्टी दी जा चुकी है।
डॉ. नीलिमा, चिकित्सा निदेशक (ईएसआई अस्पताल, नोएडा)

ग्लोबल वार्मिंग की वजह से पहाड़ों और मैदानों का तापमान गड़बड़ा गया है। इससे सिर्फ प्रकृति पर ही असर नहीं पड़ रहा है, बीमारियां उन स्थानों पर भी पहुंच गई है, जहां उनकी उम्मीद तक नहीं की जा सकती थी। मच्छरों का प्रकोप बढ़ने का एक कारण ग्लोबल वार्मिंग भी है।
डॉ. जुगल किशोर (प्रोफेसर, सफदरजंग अस्पताल, दिल्ली)

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