{"_id":"5f70343c3c4e1a1c591cf929","slug":"once-a-favourite-spot-of-tourist-dabchik-tourism-center-is-now-a-lonely-place-due-to-lockdown","type":"story","status":"publish","title_hn":"पलवल: डबचिक पर्यटन केंद्र में अब हाथी न घोड़ा, कभी होता था देसी-विदेशी पर्यटकों का पसंदीदा स्थल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पलवल: डबचिक पर्यटन केंद्र में अब हाथी न घोड़ा, कभी होता था देसी-विदेशी पर्यटकों का पसंदीदा स्थल
Sun, 27 Sep 2020 02:16 PM IST
प्राची प्रियम
अनूप पाराशर, पलवल
अनूप पाराशर, पलवल
Published by: प्राची प्रियम
Updated Sun, 27 Sep 2020 02:16 PM IST
विज्ञापन
वीरान पड़ा डबचिक पर्यटन केंद्र
- फोटो : अमर उजाला
कोरोना का असर पर्यटन केंद्रों पर भी दिख रहा है। पिछले छह माह से पर्यटन केंद्र सूने नजर आ रहे हैं। ऐसा ही नजारा पलवल जिले के एकमात्र पर्यटन केंद्र होडल के डबचिक का है। अब यहां न तो बाहर के पर्यटक दिखते हैं और न ही स्थानीय लोग।
लॉकडाउन से पहले इस केंद्र पर देशी-विदेशी पर्यटकों की भीड़ दिखाई पड़ती थी। पर्यटन विभाग के कर्मचारियों की मानें तो केंद्र में रोज 50 पर्यटक भी नहीं आ रहे। शादियों के सीजन में लॉकडाउन था। इस कारण शादियों की भी बुकिंग नहीं हुई।
छह माह से इस केंद्र में कोई रौनक नहीं है। अब यहां पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र रहने वाले हाथी और घोड़े भी नजर नहीं आ रहे। हरियाणा पर्यटन विभाग के अंतर्गत चल रहे डबचिक पर्यटन केंद्र की सीमा उत्तर प्रदेश में कोसी से लगती है।
विज्ञापन
इसकी दूरी मात्र एक किलोमीटर है। हरियाणा पर्यटन विभाग ने 14 अगस्त 1975 को डबचिक केंद्र की नींव रखी थी। 23 एकड़ में फैला डबचिक पर्यटन केंद्र किसी समय पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र था। मथुरा, वृंदावन, गोवर्धन, बरसाना और आगरा जाने वाले पर्यटक यहां रुकते और भोजन व हरियाली का आनंद लेते थे।
हाथी, ऊंट व घोड़े की होती थी सवारी
केंद्र के अंदर हाथी, घोड़े और ऊंट भी थे, जिन पर पर्यटक सवारी का आनंद लेते थे। इसके अलावा एयर कंडीशंड हॉल, पार्क, मोटरबोट, बच्चों के लिए झूले और केंद्र के अंदर बनाए गए तालाब में तैरती बतखें भी पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र थीं। अब यहां इनमें से कुछ नहीं है।
यहां पर्यटकों के लिए पूरी सुविधाएं हैं। यहां बैंक्वट हॉल, पर्यटकों के लिए अच्छा रेस्तरां व बार उपलब्ध हैं। ठहरने के लिए अच्छे कमरे व कॉटेज हैं। यहां से गुजरने वाले पर्यटकों के लिए शुद्ध भोजन की भी व्यवस्था है। सुरक्षा के भी बेहतर प्रबंध हैं। बच्चों के खेलने के लिए पार्क और झूले भी हैं। विश्व पर्यटन दिवस पर यहां आने वाले लोगों के लिए खासे इंतजाम किए गए हैं।
- विवेक भारद्वाज, प्रबंधक, डबचिक पर्यटन केंद्र
विज्ञापन
लॉकडाउन से पहले इस केंद्र पर देशी-विदेशी पर्यटकों की भीड़ दिखाई पड़ती थी। पर्यटन विभाग के कर्मचारियों की मानें तो केंद्र में रोज 50 पर्यटक भी नहीं आ रहे। शादियों के सीजन में लॉकडाउन था। इस कारण शादियों की भी बुकिंग नहीं हुई।
विज्ञापन
छह माह से इस केंद्र में कोई रौनक नहीं है। अब यहां पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र रहने वाले हाथी और घोड़े भी नजर नहीं आ रहे। हरियाणा पर्यटन विभाग के अंतर्गत चल रहे डबचिक पर्यटन केंद्र की सीमा उत्तर प्रदेश में कोसी से लगती है।
विज्ञापन
इसकी दूरी मात्र एक किलोमीटर है। हरियाणा पर्यटन विभाग ने 14 अगस्त 1975 को डबचिक केंद्र की नींव रखी थी। 23 एकड़ में फैला डबचिक पर्यटन केंद्र किसी समय पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र था। मथुरा, वृंदावन, गोवर्धन, बरसाना और आगरा जाने वाले पर्यटक यहां रुकते और भोजन व हरियाली का आनंद लेते थे।
हाथी, ऊंट व घोड़े की होती थी सवारी
केंद्र के अंदर हाथी, घोड़े और ऊंट भी थे, जिन पर पर्यटक सवारी का आनंद लेते थे। इसके अलावा एयर कंडीशंड हॉल, पार्क, मोटरबोट, बच्चों के लिए झूले और केंद्र के अंदर बनाए गए तालाब में तैरती बतखें भी पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र थीं। अब यहां इनमें से कुछ नहीं है।
यहां पर्यटकों के लिए पूरी सुविधाएं हैं। यहां बैंक्वट हॉल, पर्यटकों के लिए अच्छा रेस्तरां व बार उपलब्ध हैं। ठहरने के लिए अच्छे कमरे व कॉटेज हैं। यहां से गुजरने वाले पर्यटकों के लिए शुद्ध भोजन की भी व्यवस्था है। सुरक्षा के भी बेहतर प्रबंध हैं। बच्चों के खेलने के लिए पार्क और झूले भी हैं। विश्व पर्यटन दिवस पर यहां आने वाले लोगों के लिए खासे इंतजाम किए गए हैं।
- विवेक भारद्वाज, प्रबंधक, डबचिक पर्यटन केंद्र