व्हेल मछली जैसी है सामूहिक आत्महत्या की प्रवृत्ति, बुराड़ी की मौतों पर क्या कहते हैं मनोवैज्ञानिक
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तनाव का डंक आत्महत्या के रूप में पूरे परिवार को खत्म कर सकता है। कई बार इस तरह की घटनाएं सामने भी आती हैं, लेकिन रविवार को दिल्ली के बुराड़ी इलाके में एक ही घर में मिले 11 शव ने तनाव के उस स्तर को सामने ला दिया है, जिसे तकनीकी तौर पर मास सुसाइड (छह-सात लोग से ज्यादा की आत्महत्या) कहते हैं।
दुनिया में इस तरह की आत्महत्या की घटनाएं बेहद कम देखने को मिलती हैं। भारतीय वैज्ञानिकों की मानें तो इस तरह की आत्महत्या समुद्र में रहने वाली व्हेल मछली करती हैं। ज्यादा वजन और लंबे समय से पानी में रहने से परेशान ये जीव एक गुट में बाहर आकर दम तोड़ते हैं।
चूंकि व्हेल और इंसान स्तनधारी जीव हैं और इनमें काफी समानताएं देखने को मिलती हैं। इसलिए चिली गणराज्य जैसे देशों के वैज्ञानिकों ने इस पर काफी शोध भी किए हैं। न्यूयार्क में भी इसे मेडिकल शिक्षा में शामिल किया जा रहा है।
केंद्र सरकार के इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च में बतौर न्यूरो वैज्ञानिक डॉ. विकास ढ़िकव का कहना है, दिल्ली की घटना वाकई चौंकाने वाली है। चूंकि अभी तक पुलिस ने स्पष्ट नहीं किया है इसलिए आत्महत्या कहना जल्दबाजी होगा, लेकिन जांच में यह आत्महत्या पाई जाती है तो निश्चित ही तनाव का बिगड़ा रूप देखने को मिलेगा।
इससे साबित भी हो सकेगा कि दिमागी तौर पर तनाव को समय रहते नियंत्रित नहीं किया गया तो यह कई लोगों की जान ले सकता है। हालांकि, इस घटना को कल्ट सुसाइड से जोड़कर भी देखा जा रहा है। डॉ. ढ़िकव बताते हैं कि कल्ट सुसाइड एक तरह से हार्ड लाइनर होता है, जो अध्यात्म से जुड़ा होता है और किसी बहकावे में आकर जीवनलीला समाप्त करना होता है।
इतिहास में चुनिंदा हैं ऐसी घटनाएं
मास सुसाइड की बात करें तो इतिहास में चुनिंदा घटनाएं ही ऐसी हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार, भारत में कोई सरकारी रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है, लेकिन कई वर्ष पहले देहरादून में एक ही परिवार के 10 लोगों के आत्महत्या की घटना सामने आई थी। दिल्ली में मिले 11 शव देश की सबसे बड़ी घटना हो सकती है।
जबकि एक ही परिवार के चार से पांच या छह से सात लोगों के आत्महत्या करने की कई घटनाएं देखने को मिलती हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, आत्महत्या की घटनाएं तेजी से बढ़ती जा रही हैं। वर्ष 2012 में देश में करीब 90 हजार सालाना आत्महत्याएं हो रही थीं, जो कि वर्ष 2017 में बढ़कर एक लाख 70 हजार पर पहुंच चुकी है।
सरकारी रिपोर्ट में आत्महत्या की स्थिति
वर्ष देश दिल्ली
2015 1,33,623 1845
2016 1,43,121 1910
2017 1,70, 312 2070