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अफसरों की ‘लीला’ में लटकी केवट संवाद लीला
राजीव शर्मा/अमर उजाला, गाजियाबाद
Updated Fri, 16 Oct 2015 10:08 AM IST
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गाजियाबाद की सबसे प्राचीन सुल्लामल रामलीला कमेटी का राम-केवट संवाद मंचन अधिकारियों की लापरवाही और आपसी खींचतान की भेंट चढ़ गया।
रमते राम रोड स्थित रामघाट मंदिर के पीछे बने पक्का तालाब में केवट द्वारा भगवान राम, लक्ष्मण और सीता को नाव से नदी पार कराने का मंचन किया जाता था।
मंचन को जीवंत बनाने के लिए घंटाघर रामलीला मैदान से वन में जाने के लिए राम, लक्ष्मण, सीता पैदल ही पक्का तालाब तक पहुंचते थे।
इस दौरान हजारों की संख्या में मंचन देखने वाले लोग भी उनके पीछे-पीछे यहां तक पहुंचते थे। शहर के पुराने लोगों की मानें तो मंचन के दौरान ऐसा लगता था, जैसे भगवान राम वास्तव में केवट से नदी पार करने का आग्रह कर रहे हैं।
सीता और लक्ष्मण के साथ केवट का पात्र निभाने वाले कलाकार पक्का तालाब में नाव चलाकर मंचन को जीवंत बना देते थे। लेकिन दो दशक पूर्व नाव पलटने के हादसे के बाद से इस मंचन को बंद कर दिया गया था।
दिवंगत महापौर दमयंती गोयल ने इस पक्के तालाब का जीर्णोद्धार कराकर शहर की पारंपरिक व्यवस्था को फिर शुरू करने का एक कदम उठाया था। इसके लिए 4.5 करोड़ का बजट भी नगर निगम ने खर्च किया।
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करीब ढाई साल निर्माण कार्य चला, लेकिन विवादों में फंसने की वजह से पक्का तालाब आज भी वीरान पड़ा है। पूरी तरह सूख चुका पक्का तालाब अपना अस्तित्व खोने की कगार पर है।
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रमते राम रोड स्थित रामघाट मंदिर के पीछे बने पक्का तालाब में केवट द्वारा भगवान राम, लक्ष्मण और सीता को नाव से नदी पार कराने का मंचन किया जाता था।
मंचन को जीवंत बनाने के लिए घंटाघर रामलीला मैदान से वन में जाने के लिए राम, लक्ष्मण, सीता पैदल ही पक्का तालाब तक पहुंचते थे।
इस दौरान हजारों की संख्या में मंचन देखने वाले लोग भी उनके पीछे-पीछे यहां तक पहुंचते थे। शहर के पुराने लोगों की मानें तो मंचन के दौरान ऐसा लगता था, जैसे भगवान राम वास्तव में केवट से नदी पार करने का आग्रह कर रहे हैं।
सीता और लक्ष्मण के साथ केवट का पात्र निभाने वाले कलाकार पक्का तालाब में नाव चलाकर मंचन को जीवंत बना देते थे। लेकिन दो दशक पूर्व नाव पलटने के हादसे के बाद से इस मंचन को बंद कर दिया गया था।
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दिवंगत महापौर दमयंती गोयल ने इस पक्के तालाब का जीर्णोद्धार कराकर शहर की पारंपरिक व्यवस्था को फिर शुरू करने का एक कदम उठाया था। इसके लिए 4.5 करोड़ का बजट भी नगर निगम ने खर्च किया।
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करीब ढाई साल निर्माण कार्य चला, लेकिन विवादों में फंसने की वजह से पक्का तालाब आज भी वीरान पड़ा है। पूरी तरह सूख चुका पक्का तालाब अपना अस्तित्व खोने की कगार पर है।