20 AAP विधायक मामला: विपक्ष का तंज- आप MLAs को ज्यादा खुश होने की जरूरत नहीं..
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
दिल्ली प्रदेश भाजपा अध्यो्ष के मनोज तिवारी ने कहा है कि हाई कोर्ट ने आप विधायकों को लाभ के पद के मामले में दोष से मुक्त नहीं किया है। कोर्ट पुन: सुनवाई का निर्देश दिया है।
इस कारण आप विधायकों पर अयोग्य हो जाने की तलवार लटकी हुई है। वहीं उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी के 20 विधायकों पर लाभ के पद के मामले में हाई कोर्ट का चुनाव आयोग को पुन: सुनवाई करने का निर्देश न्यायपालिका की स्वतंत्रता एवं भारतीय लोकतंत्र का एक अनूठा प्रमाण है।
भाजपा ने जिस तरह कोर्ट एवं चुनाव आयोग के पिछले निर्देशों का स्वागत किया था उसी तरह आज के निर्देश का भी सम्मान करती हैं। निश्चित तौर पर चुनाव आयोग को पुन: सुनवाई करनी चाहिए।
आप विधायक खुश न हो
दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अजय माकन ने कहा कि हाई कोर्ट के फैसले से आप के 20 विधायकों को खुश होने की जरुरत नहीं है।
कोर्ट ने अपने फैसले में चुनाव आयोग को दोबारा सुनवाई करने के लिए कहा है। इस कारण आप विधायकों को थोड़ा सा फायदा मिला है जो कुछ समय के लिए ही है।
क्योंकि कोर्ट ने केस को वापस अंतिम सुनवाई के लिए चुनाव आयोग के पास भेजा है, जबकि राष्ट्रपति के उस आदेश को खारिज नहीं किया है जिसके तहत राष्ट्रपति ने चुनाव आयोग को इन 20 विधायकों के खिलाफ लाभ के पद को लेकर आई शिकायत की जांच करने के लिए कहा था।
कोर्ट ने आप विधायकों को अस्थायी राहत दी है
दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के नेता विजेन्द्र गुप्ता ने कहा कि हाई कोर्ट आप के 20 विधायकों को अस्थायी राहत दी है और चुनाव आयोग को उन्हें दुबारा सुनने का निर्देश दिया है।
इस कारण कोर्ट ने उनको दोषमुक्त नहीं करार दिया है। इसके अलावा कोर्ट ने मूल विषय लाभ के पद के मामले और राष्ट्रपति की अनुशंसा पर कोई सवाल खड़े नहीं किए हैं।
उन्होंने कहा कि वह कोर्ट के निर्णय का सम्मान करते हैं। चुनाव आयोग ने सुनवाई की लगभग ढाई वर्ष की अवधि में 12 से भी अधिक बार सुनवाई के अवसर दिए थे। परन्तु इन्हें जानबूझकर नजरअंदाज किया गया।