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यहां अब भी चल रहा 1857 का कानून
मयंक तिवारी/ अमर उजाला, गुड़गांव
Updated Sat, 01 Feb 2014 08:24 AM IST
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गुड़गांव में आयुध डिपो के प्रतिबंधित क्षेत्र में रहने वाले लाखों लोगों को नगर निगम के आयुक्त प्रवीण कुमार की ठोस पैरवी से बड़ी राहत मिली है।
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उन्होंने शुक्रवार को मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट में आयुध डिपो के लिए बने कानून व उसके विस्थापन को लेकर कई गंभीर सवाल उठाए। इसके बाद अदालत ने प्रतिबंधित एरिया में रहने वालों को विभिन्न शर्तों के साथ बिजली, पानी मुहैया कराने के आदेश दिए।
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आयुध डिपो के प्रतिबंधित क्षेत्र में बने मकानों में रहने वाले लोगों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने को लेकर डाली गई याचिका पर हुई सुनवाई के दौरान निगमायुक्त ने अदालत को बताया कि वायु सेना का कानून 1857 के गदर का है। जिसमें हिन्दुस्तानियों को आयुध डिपो के 900 मीटर दायरे में घुसने की मनाही थी।
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जब सिंगापुर में आयुध डिपो के 200 मीटर के दायरे में लोग बसे हैं तो यहां क्यों संभव नहीं। निगमायुक्त ने बताया कि अदालत को आयुध डिपो को फरीदाबाद के तिलपत रेंज शिफ्ट करने का भी सुझाव दिया गया।
जहां वायु सेना का एयरपोर्ट भी है। वहां से हिण्डेन व नेशनल एयरपोर्ट की दूरी समान है। यही नहीं गुड़गांव आयुध डिपो में बम रखना भी न्याय उचित नहीं।