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नर्सरीः पहले आओ पहले पाओ, अभिभावकों की शिक्षा पर दाखिला नहीं 

Sat, 01 Dec 2018 09:16 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Updated Sat, 01 Dec 2018 09:16 PM IST
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nursery admission, no admission on the basis of education of parents
nursery admission - फोटो : अमर उजाला

दिल्ली के लगभग 1700 निजी स्कूलों में शुरू होने वाली नर्सरी की रेस के लिए स्कूल अपने दाखिला मानकों में पहले आओ पहले पाओ, अभिभावकों की शिक्षा, सिस्टर कंर्सन स्कूल में कर्मचारी, पहला कजन जैसे मानकों को शामिल नहीं कर सकते। पब्लिक स्कूलों के लिए शैक्षणिक सत्र 2019-20 के नर्सरी दाखिले में इस तरह के मानकों पर रोक रहेगी। इस तरह से स्कूल दाखिले के अपने 100 अंकों के फॉर्मूले में नहीं रखेंगे।  

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नर्सरी दाखिले के लिए जारी की गई गाइडलाइंस में साफ कहा है कि स्कूलों को ऐसे मानक तय करने होंगे जो न केवल अच्छी तरह से परिभाषित हों, न्यायसंगत हों, भेदभाव रहित व स्पष्ट व पारदर्शी हों। ऐसे मानक शामिल न  किए जाएं जो कि भेदभाव बढ़ाते हों और अभिभावकों को दाखिले से वंचित करते हों। 
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कोर्ट के आदेशानुसार 50 मानकों को दाखिला मानकों में शामिल करने पर रोक रहेगी। दरअसल कुछ स्कूल अपने मानकों में ऐसे मानक शामिल कर देते हैं। इनके अंक भी दिए जाते हैं। इससे अभिभावकों बच्चे का दाखिला नहीं करा पाते हैं।  
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शिक्षा निदेशालय ने नर्सरी दाखिले को लेकर कुल 61 क्राइटेरिया पर आपत्ति जताई थी जिनमें से 11 मानकों को लेकर स्कूलों को कोर्ट से राहत मिली हुई है। जिन 50 मानकों को दाखिले का आधार नहीं बनाया जा सकता है। उनमें अभिभावकों की स्थानातंरण जॉब, अभिभावकों की शैक्षणिक योग्यता, अभिभावकों का सिस्टर कंर्सन स्कूल में कर्मचारी होना, माता-पिता दोनों का रोजगार में होना, पहला चचेरा भाई-बहन, समाज में माता-पिता का योगदान,ओरल टेस्ट,  इंटरव्यू मैनेजमेंट कोटा, नॉन स्मोकर, नॉन अल्कोहल, सरकारी कर्मचारी, संयुक्त परिवार, दादा-दादी का वालंटियर होना।


एडमिशन नर्सरी डॉट कॉम प्रमुख सुमित वोहरा ने कहा कि बीते साल भी ऐसे मानकों को दाखिले का आधार बनाने की मनाही थी। बावजूद कोर्ट के खिलाफ जाकर स्कूलों ने इन मानकों को दाखिले का आधार बनाया था। यदि इस बार स्कूल ऐसे मानकों को शामिल करें तो शिक्षा निदेशालय को कार्यवाही करनी चाहिए। 

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