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यूजीसी का फरमानः अब दाखिले के साथ नहीं रख सकेंगे मूल प्रमाणपत्र
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Tue, 06 Nov 2018 06:34 AM IST
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यूजीसी
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सेंट्रल, स्टेट, डीम्ड -टू बी यूनिवर्सिटी व प्राइवेट यूनिवर्सिटी अब दाखिले के दौरान छात्रों के मूल प्रमाणपत्र नहीं रख सकेंगे। इसके साथ ही यूजीसी ने दाखिला फीस वापस करने को लेकर भी अधिसूचना जारी कर दी है। नवंबर से यह नियम लागू हो गए हैं। यदि कोई शिक्षण संस्थान नियमों का पालन नहीं करता है तो यूजीसी रेगुलेशन 2016 के तहत जुर्माने के साथ मान्यता रद्द की जाएगी।
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यूजीसी के सचिव प्रो. रजनीश जैन ने बताया कि विश्वविद्यालयों व उच्च शिक्षण संस्थानों को इस बारे में पत्र लिखकर दिशा-निर्देश दे दिए गए हैं। छात्र और अभिभावकों को फीस और मूल प्रमाण पत्र को लेकर समस्या आती है तो वह यूजीसी या मानव संसाधन विकास मंत्रालय को शिकायत भेज सकते हैं। नए नियम अंडरग्रेजुएट, पोस्ट ग्रेजुएट, एमफिल व पीएचडी प्रोग्राम में लागू होंगे।
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संस्थान अब छात्रों के मूल प्रमाण पत्र, स्थानांतरण प्रमाण पत्र, अंक पत्र, या डिग्री प्रमाण पत्र नहीं रख सकेंगे। कोई भी संस्थान छात्र को प्रोस्पेक्टस खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकता। प्रोस्पेक्टस में दी हुई जानकारी वेबसाइट पर भी उपलब्ध होनी चाहिए। कॉलेजों को दाखिला आवेदन पत्र के साथ स्वयं सत्यापित आवेदन पत्र भी देना होगा।
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इस दौरान कॉलेज प्रबंधन को मूल प्रमाण पत्र जांचने के बाद वापस करनी होगी। कॉलेज प्रबंधन अब स्वयं सत्यापित प्रमाण पत्र की कॉपी रख सकेंगे। यदि छात्र दाखिला सुनिश्चित करता है तो संस्थान स्थानांतरण प्रमाणपत्र रख सकते हैं। अब छात्रों के पास मनपसंद कॉलेज में दाखिला लेने की पूरी आजादी होगी।
कुछ महत्वपूर्ण बिंदू :-
नए नियम के तहत अब दाखिला आवेदन विंडो बंद होने से 15 दिन या उससे पहले यदि कोई छात्र सीट छोड़ता है तो उसकी सौ फीसदी फीस वापस करनी होगी।
यदि कोई छात्र दाखिला बंद होने के पंद्रह दिन के भीतर सीट छोड़ता है तो उसे 80 फीसदी फीस वापस करनी होगी। जबकि 16 से 30 दिन में सीट छोड़ने पर 50 फीसदी फीस लौटानी होगी।
संस्थान कुल दाखिला फीस का पांच फीसदी या फिर अधिकतम पांच हजार रुपये तक ही प्रोसेसिंग फीस काट सकते हैं।
अब उच्च शिक्षण संस्थान सेमेस्टर या वार्षिक फीस ही ले सकेंगे। एक साथ छात्रों से फीस नहीं ले सकते हैं।