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Delhi NCR News: अब गड़बड़ी नहीं कर सकेंगी मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीनें, लाइव ट्रैकिंग पोर्टल शुरू
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एमसीडी ने सफाई व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए की शुरुआत
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। एमसीडी ने सफाई व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीनों (एमआरएसएम) की लाइव ट्रैकिंग सुविधा शुरू की है। इसके जरिये अब नागरिक वास्तविक समय में जान सकेंगे कि सफाई मशीनें कब और कहां काम कर रही हैं। इस तकनीकी पहल के बाद मशीनों के संचालन में गड़बड़ी या लापरवाही की गुंजाइश खत्म हो जाएगी।
एमसीडी के पास 52 मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीनें हैं। ये मशीनें रोजाना रात 10 बजे से सुबह छह बजे तक कार्य करती हैं, इनके जरिये प्रतिदिन करीब 1600 किलोमीटर लंबी और 60 फीट से अधिक चौड़ी सड़कों की सफाई की जाती है। मशीनें धूल प्रदूषण को नियंत्रित करने और सड़कों को धूल-मिट्टी से मुक्त रखने में भी सहायक हैं। अब तक इनकी निगरानी पारदर्शी तरीके से नहीं हो पाती थी, स्थायी समिति की बैठक में इनके संचालन पर पार्षदों ने सवाल उठाया था। इस दौरान समिति अध्यक्ष सत्या शर्मा ने इस दिशा में कदम उठाने के निर्देश दिए थे।
नई ऑनलाइन ट्रैकिंग व्यवस्था से अब न केवल अधिकारी बल्कि आम नागरिक भी यह देख सकेंगे कि कौन सी मशीन किस समय और किस मार्ग पर काम कर रही है। यानी मशीनें अब केवल कागजों पर चलने की बजाय वास्तव में सफाई करने को मजबूर होंगी। इससे कार्य में ढिलाई पर स्वतः रोक लगेगी। एमसीडी आयुक्त अश्वनी कुमार ने कहा कि यह कदम तकनीक के जरिये नगरीय प्रबंधन को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। एमसीडी का कहना है कि इस पोर्टल के माध्यम से नागरिक सीधे तौर पर सफाई प्रक्रिया का हिस्सा बन सकेंगे। यदि किसी क्षेत्र में मशीनें समय पर कार्य नहीं करेंगी तो यह तुरंत स्पष्ट हो जाएगा।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। एमसीडी ने सफाई व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीनों (एमआरएसएम) की लाइव ट्रैकिंग सुविधा शुरू की है। इसके जरिये अब नागरिक वास्तविक समय में जान सकेंगे कि सफाई मशीनें कब और कहां काम कर रही हैं। इस तकनीकी पहल के बाद मशीनों के संचालन में गड़बड़ी या लापरवाही की गुंजाइश खत्म हो जाएगी।
एमसीडी के पास 52 मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीनें हैं। ये मशीनें रोजाना रात 10 बजे से सुबह छह बजे तक कार्य करती हैं, इनके जरिये प्रतिदिन करीब 1600 किलोमीटर लंबी और 60 फीट से अधिक चौड़ी सड़कों की सफाई की जाती है। मशीनें धूल प्रदूषण को नियंत्रित करने और सड़कों को धूल-मिट्टी से मुक्त रखने में भी सहायक हैं। अब तक इनकी निगरानी पारदर्शी तरीके से नहीं हो पाती थी, स्थायी समिति की बैठक में इनके संचालन पर पार्षदों ने सवाल उठाया था। इस दौरान समिति अध्यक्ष सत्या शर्मा ने इस दिशा में कदम उठाने के निर्देश दिए थे।
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नई ऑनलाइन ट्रैकिंग व्यवस्था से अब न केवल अधिकारी बल्कि आम नागरिक भी यह देख सकेंगे कि कौन सी मशीन किस समय और किस मार्ग पर काम कर रही है। यानी मशीनें अब केवल कागजों पर चलने की बजाय वास्तव में सफाई करने को मजबूर होंगी। इससे कार्य में ढिलाई पर स्वतः रोक लगेगी। एमसीडी आयुक्त अश्वनी कुमार ने कहा कि यह कदम तकनीक के जरिये नगरीय प्रबंधन को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। एमसीडी का कहना है कि इस पोर्टल के माध्यम से नागरिक सीधे तौर पर सफाई प्रक्रिया का हिस्सा बन सकेंगे। यदि किसी क्षेत्र में मशीनें समय पर कार्य नहीं करेंगी तो यह तुरंत स्पष्ट हो जाएगा।
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