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दिल्ली: यात्रियों का इंतजार खत्म, अब डीटीसी-क्लस्टर बसों में सभी सीटों पर बैठकर सफर करने की इजाजत, लेकिन...
Wed, 11 Nov 2020 11:07 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: शाहरुख खान
Updated Wed, 11 Nov 2020 11:07 AM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
राजधानी दिल्ली में डीटीसी और क्लस्टर बसों में सभी सीटों पर बैठकर सफर करने की इजाजत मिलने से संक्रमण का खतरा एक बार फिर बढ़ गया है। रोजाना हजारों संक्रमितों के पॉजीटिव होने के बाद भी नियमों का सख्ती से पालन करने की बजाय अनदेखी हो रही है।
अंतरराज्यीय बसों में भी सभी सीट पर यात्रियों को बैठने की अनुमति है, ऐसे में यात्रियों के बीच की दूरी दो गज की बजाय, 10-15 सेंटीमीटर रह गई है। कोरोना काल में यात्रियों की सहूलियत के लिए बस सेवाएं शुरू की गईं।
पहले डीटीसी और क्लस्टर बसों में सवार होने से पहले यात्रियों की थर्मल स्क्रीनिंग होती थी, लेकिन अब वह भी बंद है। दूसरे राज्यों को जाने वाली बसों में भी संक्रमण से सुरक्षा के लिहाज से किए गए इंतजाम नाकाफी हैं।
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आईएसबीटी पर यात्रियों की कोरोना जांच के लिए शिविर लगाए गए हैं, लेकिन वहां भारी तादाद में पहुंच रहे यात्रियों के बीच की दूरी भी काफी कम है। बस यात्रियों का कहना है कि जब थर्मल स्क्रीनिंग और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन जरूरी है उस वक्त, निगरानी के लिए तैनात टीमें अक्सर नदारद होती हैं।
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अंतरराज्यीय बसों में भी सभी सीट पर यात्रियों को बैठने की अनुमति है, ऐसे में यात्रियों के बीच की दूरी दो गज की बजाय, 10-15 सेंटीमीटर रह गई है। कोरोना काल में यात्रियों की सहूलियत के लिए बस सेवाएं शुरू की गईं।
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पहले डीटीसी और क्लस्टर बसों में सवार होने से पहले यात्रियों की थर्मल स्क्रीनिंग होती थी, लेकिन अब वह भी बंद है। दूसरे राज्यों को जाने वाली बसों में भी संक्रमण से सुरक्षा के लिहाज से किए गए इंतजाम नाकाफी हैं।
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आईएसबीटी पर यात्रियों की कोरोना जांच के लिए शिविर लगाए गए हैं, लेकिन वहां भारी तादाद में पहुंच रहे यात्रियों के बीच की दूरी भी काफी कम है। बस यात्रियों का कहना है कि जब थर्मल स्क्रीनिंग और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन जरूरी है उस वक्त, निगरानी के लिए तैनात टीमें अक्सर नदारद होती हैं।
कांटेक्टलेस टिकटिंग में देरी से बढ़ेंगी मुश्किलें
मेट्रो में यात्रियों की सुरक्षा के लिए कार्ड के जरिये सफर की इजाजत दी गई। लेकिन बसों में दो महीने से अधिक देर तक ट्रायल चलने के बाद भी कांटेक्टलेस टिकटिंग की शुरुआत नहीं हो सकी है। ऐसे में नकद लेन देन और कागजी टिकट का अभी भी धड़ल्ले से इस्तेमाल हो रहा है।
मौजूदा हालात को देखते हुए दिल्ली वासियों का कहना है कि इसे पहले लागू किया जाना चाहिए था। कोरोना संक्रमितों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी जारी है, ऐसे में देरी से मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।
मौजूदा हालात को देखते हुए दिल्ली वासियों का कहना है कि इसे पहले लागू किया जाना चाहिए था। कोरोना संक्रमितों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी जारी है, ऐसे में देरी से मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।