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दिल्ली दंगा: हाईकोर्ट ने रद्द कीं लूटपाट और आगजनी से जुड़ी चार एफआईआर, एक ही अपराध के लिए कई प्राथमिकी दर्ज नहीं हो सकती
Thu, 02 Sep 2021 01:08 PM IST
पूजा त्रिपाठी
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: पूजा त्रिपाठी
Updated Thu, 02 Sep 2021 01:08 PM IST
सार
सीएए के समर्थकों और विरोधियों के बीच विवाद से शुरू हुए दंगों में कुल 755 एफआईआर दर्ज की गई थीं और 1,829 लोगों को गिरफ्तार किया था।
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delhi violence
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
दिल्ली हाईकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि एक ही घटना के लिए पांच अलग मामले दर्ज नहीं किए जा सकते। अदालत ने कहा यह सर्वोच्च न्यायालय द्वारा तय दिशानिर्देश व कानून के खिलाफ है। अदालत ने इस टिप्पणी के साथ पिछले साल उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों के दौरान लूटपाट और परिसर में आग लगाने के आरोप में दर्ज पांच में से चार प्राथमिकी रद्द कर दी। अदालत ने कहा कि एक ही संज्ञेय अपराध के लिए पुलिस पांच प्राथमिकी दर्ज नहीं कर सकती है।
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पुलिस ने एक ही घटना के लिए एक आरोपी के खिलाफ मार्च 2020 को हुए दंगों के सिलसिले में पांच मामले दर्ज कर लिए थे। न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद ने अपने फैसले में कहा कि एक ही संज्ञेय अपराध के लिए दूसरी प्राथमिकी और नई जांच नहीं हो सकती है। अदालत ने कहा कि एक ही घटना के लिए पांच अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज नहीं की जा सकती है क्योंकि यह सर्वोच्च अदालत द्वारा तय कानून के विपरीत है।
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उच्च न्यायालय ने एक प्राथमिकी को बरकरार रखते हुए पिछले साल मार्च महीने में जाफराबाद पुलिस थाना में उन्हीं आरोपियों के खिलाफ दर्ज चार अन्य प्राथमिकी को रद्द कर दिया। न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद ने कहा यह नहीं कहा जा सकता कि घटनाएं अलग थीं या अपराध अलग थे। उन्होंने कहा पहले कहा गया है कि संबंधित प्राथमिकी में दायर आरोपपत्रों के अवलोकन से पता चलता है कि वे कमोबेश एक जैसे हैं और आरोपी भी वही हैं।
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हालांकि अगर आरोपी के खिलाफ कोई सामग्री मिलती है तो उसके खिलाफ प्राथमिकी में दर्ज किया जा सकता है। अदालत ने मामले में आरोपी अतीर की चार याचिकाओं पर फैसला दिया है। दिल्ली पुलिस द्वारा एक ही परिवार के विभिन्न सदस्यों की शिकायतों पर दर्ज पांच प्राथमिकी में आरोपी को अभियोजन का सामना करना पड़ रहा था। आरोप है कि जब पीड़ित 24 फरवरी की शाम को मौजपुर इलाके में अपने घर पहुंचे तो उन्होंने देखा कि उनका घर आग के हवाले कर दिया गया है जिससे 7-10 लाख रुपये की संपत्ति का नुकसान हुआ।
आरोपी अतीर की ओर से अधिवक्ता तारा नरूला ने दलील दी कि सभी प्राथमिकी एक ही घर से संबंधित हैं जिसे परिवार के विभिन्न सदस्यों द्वारा दायर किया गया है और यहां तक कि दमकल की एक ही गाड़ी आग बुझाने आई थी। उन्होंने दलील दी कि यह प्रकरण उच्चतम न्यायालय द्वारा प्रतिपादित सिद्धांत के दायरे में है कि एक अपराध के लिए एक से ज्यादा प्राथमिकी दर्ज नहीं की जा सकती है।
दिल्ली पुलिस ने दावा किया कि सभी शिकायतों में संपत्ति अलग थी और नुकसान को अलग लोगों ने व्यक्तिगत रूप से झेला है और प्रत्येक प्राथमिकी का विषय दूसरों से अलग है। अदालत ने कहा कि सभी पांच प्राथमिकी की सामग्री एक समान है और कमोबेश एक जैसे ही हैं और एक ही घटना से संबंधित हैं।
अदालत ने कहा संपत्ति में फ्लोर भले ही अलग हैं लेकिन संपत्ति एक ही है। घटना के साइड प्लान से भी स्पष्ट है कि संपत्ति एक ही परिसर की है और उसे अलग नहीं बताया जा सकता। न ही मामले में अलग जांच की जा सकती है।