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Delhi: 727 रुपये के बदले चुकाना होगा 10 हजार का जुर्माना, वेज की जगह भेज दी थी नॉनवेज थाली

Tue, 17 Jun 2025 04:37 AM IST
विजय पुंडीर गौरव बाजपेई, अमर उजाला, नई दिल्ली
गौरव बाजपेई, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: विजय पुंडीर Updated Tue, 17 Jun 2025 04:37 AM IST
सार

यह मामला अनुष्का रनदेवा द्वारा दायर शिकायत से संबंधित है। उसमें उन्होंने प्रीत विहार, दिल्ली स्थित बेरको रेस्तरां पर उनकी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने और गलत भोजन आपूर्ति का आरोप लगाया था।

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Non-veg thali was sent instead of veg, 13 times the fine will have to be paid
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Freepik

विस्तार

पूर्वी दिल्ली जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने बेरको रेस्तरां और इसके साझेदारों को सेवा में कमी के लिए ऑर्डर की रकम का 13 गुना जुर्माना भरने का निर्देश दिया है। अदालत ने शाकाहारी भोजन के ऑर्डर के बदले मांसाहारी भोजन की आपूर्ति को सेवा में कमी मानते हुए 727 रुपये के ऑर्डर के मुआवजे के तौर पर 10 हजार रुपये के मुआवजे का आदेश दिया। यह मामला अनुष्का रनदेवा द्वारा दायर शिकायत से संबंधित है। उसमें उन्होंने प्रीत विहार, दिल्ली स्थित बेरको रेस्तरां पर उनकी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने और गलत भोजन आपूर्ति का आरोप लगाया था।

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आयोग के अध्यक्ष सुखवीर सिंह मल्होत्रा और सदस्य रवि कुमार की पीठ ने अपने फैसले में कहा कि शिकायतकर्ता ने 16 फरवरी 2023 को जोमैटो एप से रेस्तरां से चिली पनीर ग्रेवी और चिली गार्लिक नूडल्स (शाकाहारी) का ऑर्डर दिया था। इसके लिए 727 रुपये का भुगतान किया। हालांकि, डिलीवरी के बाद भोजन मांसाहारी निकला, जिससे उनकी धार्मिक भावनाएं आहत हुईं। शिकायतकर्ता ने रेस्तरां से रिफंड की मांग की, जिसके जवाब में जोमैटो ने 728 रुपये का प्रोमो कोड जारी किया, लेकिन रेस्तरां ने कोई राशि वापस नहीं की।
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रेस्तरां ने अपने बचाव में दावा किया कि उन्होंने सही शाकाहारी भोजन पैक किया था, लेकिन गलती जोमैटो के डिलीवरी बॉय की हो सकती है। हालांकि, आयोग ने पाया कि रेस्तरां ने इस दावे को साबित करने के लिए कोई सबूत या दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया। आयोग ने कहा कि चूंकि जोमैटो ने शिकायतकर्ता को 728 रुपये का रिफंड प्रोमो कोड के रूप में दे दिया था, जिसे शिकायतकर्ता ने उपयोग कर लिया। इसलिए रेस्तरां से दोबारा रिफंड की मांग उचित नहीं है। फिर भी गलत भोजन की आपूर्ति को सेवा में कमी मानते हुए आयोग ने रेस्तरां और इसके साझेदारों को संयुक्त रूप से 10,000 रुपये का मुआवजा (मुकदमे की लागत सहित) देने का आदेश दिया।
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यह राशि 30 दिनों के भीतर भुगतान करने का निर्देश दिया गया है, अन्यथा 16 मई 2025 से 9% वार्षिक ब्याज के साथ भुगतान करना होगा। शिकायतकर्ता ने 5 लाख रुपये के मुआवजे और 1 लाख रुपये की कानूनी लागत की मांग की थी, लेकिन आयोग ने इसे अत्यधिक मानते हुए केवल 10,000 रुपये का मुआवजा उचित समझा।

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