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आप ने मुफ्त योजनाओं में खर्च किया केंद्र से मिला पैसा : सीएम
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कैग की रिपोर्ट का हवाला देकर विधानसभा सत्र में मुख्यमंत्री ने तत्कालीन आप सरकार को घेरा
कहा - जिन योजनाओं में प्रधानमंत्री शब्द जुड़ा था उन्हें दिल्ली में लागू ही नहीं किया गया
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4800 करोड़ रुपये की ग्रांट केंद्र से मिली थी
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बृहस्पतिवार को विधानसभा में नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की वित्त मामलों पर रिपोर्ट पर तत्कालीन आप सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि कैग रिपोर्ट ने पिछली सरकार की पोल खोल दी।
सदन को मुख्यमंत्री ने बताया कि केंद्र सरकार से दिल्ली को 4800 करोड़ रुपये की ग्रांट मिली थी लेकिन इस पूरी राशि को मुफ्त योजनाओं में खर्च कर दिया गया। इसमें 463 करोड़ रुपये पानी आपूर्ति, 482 करोड़ फ्री बस सेवा और 3250 करोड़ रुपये फ्री बिजली योजना में लगाए गए। इन योजनाओं को इस तरह प्रचारित किया गया मानो विधायक या मंत्री अपनी जेब से जनता को मुफ्त दे रहे हों जबकि यह सारा पैसा जनता का ही था।
उन्होंने कहा कि विकास कार्यों को जानबूझकर नजरअंदाज किया गया। जिन योजनाओं में प्रधानमंत्री शब्द जुड़ा था उन्हें दिल्ली में लागू ही नहीं किया गया। केंद्र सरकार ने पीएम श्री स्कूल, आयुष्मान भारत, विश्वकर्मा योजना और स्वनिधि जैसी योजनाओं के लिए फंड जारी किया लेकिन दिल्ली सरकार ने या तो इन योजनाओं को लागू ही नहीं किया या उपयोग नहीं किया। इतना ही नहीं मुख्यमंत्री ने बताया कि 3760 करोड़ रुपये की ग्रांट मिलने के बावजूद दिल्ली सरकार ने उसका यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट तक नहीं भेजा।
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8600 करोड़ का घाटा, स्वास्थ्य व शिक्षा में भारी गिरावट
मुख्यमंत्री ने कैग रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि वर्ष 2022-23 में दिल्ली सरकार का राजस्व अधिशेष 4566 करोड़ रुपये था लेकिन यह पूरा पैसा व्यय हो गया और 2023-24 में सरकार 3934 करोड़ रुपये के घाटे में पहुंच गई यानी दो साल में कुल मिलाकर लगभग 8600 करोड़ रुपये का घाटा हुआ। सार्वजनिक स्वास्थ्य में 50 प्रतिशत, शिक्षा व खेल में 42 प्रतिशत और लोक निर्माण विभाग के कार्यों में 40 प्रतिशत तक की गिरावट आई। स्वास्थ्य व्यवस्था की उपेक्षा का सबसे बड़ा उदाहरण 24 नए अस्पतालों की आधारशिला रखी गई थी लेकिन आज तक एक भी अस्पताल पूरा नहीं हो पाया। इन पर 3427 करोड़ रुपये की लागत आनी थी लेकिन अब निर्माण में देरी के कारण यह लागत 2700 करोड़ रुपये और बढ़ गई है। यह सीधा संसाधनों का दुरुपयोग और जनसेवा की उपेक्षा है।
विकास को रोका, प्रचार में लगाई ताकत
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने आप सरकार पर आरोप लगाया कि उन्होंने प्रचार और विज्ञापन पर फिजूलखर्ची की लेकिन जनता की मूलभूत जरूरतों को नजरअंदाज किया। न कोई नया फ्लाईओवर बना व न कोई बड़ी सड़क परियोजना पूरी हुई। शहरी विकास के बजट में 36 प्रतिशत की कटौती की गई। इससे दिल्लीवासियों को भारी नुकसान हुआ। केंद्र सरकार की ओर से 31 मार्च 2024 तक 842 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि दी गई थी जिसका भी उपयोग नहीं किया गया। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और मेट्रो परियोजनाओं में भी दिल्ली सरकार ने अपना हिस्सा नहीं दिया जबकि केंद्र बराबर साझेदारी कर रहा था।
पीएसी से जांच की मांग
मुख्यमंत्री ने विधानसभा अध्यक्ष से कैग रिपोर्ट को लोक लेखा समिति के पास भेजने की मांग की। उन्होंने कहा कि यह आवश्यक है कि जनता को बताया जाए कि उनका पैसा किस तरह और कहां खर्च हुआ। जनता के नाम पर राजनीति करने वालों ने जनता के पैसों का ही अपमान किया है। अब उन्हें जवाब देना ही होगा।
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कहा - जिन योजनाओं में प्रधानमंत्री शब्द जुड़ा था उन्हें दिल्ली में लागू ही नहीं किया गया
4800 करोड़ रुपये की ग्रांट केंद्र से मिली थी
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बृहस्पतिवार को विधानसभा में नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की वित्त मामलों पर रिपोर्ट पर तत्कालीन आप सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि कैग रिपोर्ट ने पिछली सरकार की पोल खोल दी।
सदन को मुख्यमंत्री ने बताया कि केंद्र सरकार से दिल्ली को 4800 करोड़ रुपये की ग्रांट मिली थी लेकिन इस पूरी राशि को मुफ्त योजनाओं में खर्च कर दिया गया। इसमें 463 करोड़ रुपये पानी आपूर्ति, 482 करोड़ फ्री बस सेवा और 3250 करोड़ रुपये फ्री बिजली योजना में लगाए गए। इन योजनाओं को इस तरह प्रचारित किया गया मानो विधायक या मंत्री अपनी जेब से जनता को मुफ्त दे रहे हों जबकि यह सारा पैसा जनता का ही था।
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उन्होंने कहा कि विकास कार्यों को जानबूझकर नजरअंदाज किया गया। जिन योजनाओं में प्रधानमंत्री शब्द जुड़ा था उन्हें दिल्ली में लागू ही नहीं किया गया। केंद्र सरकार ने पीएम श्री स्कूल, आयुष्मान भारत, विश्वकर्मा योजना और स्वनिधि जैसी योजनाओं के लिए फंड जारी किया लेकिन दिल्ली सरकार ने या तो इन योजनाओं को लागू ही नहीं किया या उपयोग नहीं किया। इतना ही नहीं मुख्यमंत्री ने बताया कि 3760 करोड़ रुपये की ग्रांट मिलने के बावजूद दिल्ली सरकार ने उसका यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट तक नहीं भेजा।
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8600 करोड़ का घाटा, स्वास्थ्य व शिक्षा में भारी गिरावट
मुख्यमंत्री ने कैग रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि वर्ष 2022-23 में दिल्ली सरकार का राजस्व अधिशेष 4566 करोड़ रुपये था लेकिन यह पूरा पैसा व्यय हो गया और 2023-24 में सरकार 3934 करोड़ रुपये के घाटे में पहुंच गई यानी दो साल में कुल मिलाकर लगभग 8600 करोड़ रुपये का घाटा हुआ। सार्वजनिक स्वास्थ्य में 50 प्रतिशत, शिक्षा व खेल में 42 प्रतिशत और लोक निर्माण विभाग के कार्यों में 40 प्रतिशत तक की गिरावट आई। स्वास्थ्य व्यवस्था की उपेक्षा का सबसे बड़ा उदाहरण 24 नए अस्पतालों की आधारशिला रखी गई थी लेकिन आज तक एक भी अस्पताल पूरा नहीं हो पाया। इन पर 3427 करोड़ रुपये की लागत आनी थी लेकिन अब निर्माण में देरी के कारण यह लागत 2700 करोड़ रुपये और बढ़ गई है। यह सीधा संसाधनों का दुरुपयोग और जनसेवा की उपेक्षा है।
विकास को रोका, प्रचार में लगाई ताकत
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने आप सरकार पर आरोप लगाया कि उन्होंने प्रचार और विज्ञापन पर फिजूलखर्ची की लेकिन जनता की मूलभूत जरूरतों को नजरअंदाज किया। न कोई नया फ्लाईओवर बना व न कोई बड़ी सड़क परियोजना पूरी हुई। शहरी विकास के बजट में 36 प्रतिशत की कटौती की गई। इससे दिल्लीवासियों को भारी नुकसान हुआ। केंद्र सरकार की ओर से 31 मार्च 2024 तक 842 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि दी गई थी जिसका भी उपयोग नहीं किया गया। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और मेट्रो परियोजनाओं में भी दिल्ली सरकार ने अपना हिस्सा नहीं दिया जबकि केंद्र बराबर साझेदारी कर रहा था।
पीएसी से जांच की मांग
मुख्यमंत्री ने विधानसभा अध्यक्ष से कैग रिपोर्ट को लोक लेखा समिति के पास भेजने की मांग की। उन्होंने कहा कि यह आवश्यक है कि जनता को बताया जाए कि उनका पैसा किस तरह और कहां खर्च हुआ। जनता के नाम पर राजनीति करने वालों ने जनता के पैसों का ही अपमान किया है। अब उन्हें जवाब देना ही होगा।