{"_id":"690cba0479dd1581f6045493","slug":"yeida-to-expand-heritage-city-in-vrindavan-four-times-bigger-grnoida-news-c-23-1-lko1064-79806-2025-11-06","type":"story","status":"publish","title_hn":"Noida News: मथुरा के ध्यानार्थ\nवृंदावन में हेरीटेज सिटी को चार गुना बड़ा बनाएगा यीडा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Noida News: मथुरा के ध्यानार्थ वृंदावन में हेरीटेज सिटी को चार गुना बड़ा बनाएगा यीडा
विज्ञापन
वृंदावन में हेरीटेज सिटी को चार गुना बड़ा बनाएगा यीडा
- यमुना प्राधिकरण बोर्ड बैठक आज दोपहर में तीन बजे से होगी शुरू
- राया अर्बन सेंटर के विकास के मॉडल पर भी होगा फैसला
- हाइड्रोजन फ्यूल से बस संचालन और वन मैप प्रोजेक्ट को शुरू करने की भी मिल सकती है मंजूरी
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। यमुना सिटी में बस रहे राया अर्बन सेंटर में प्रस्तावित हेरीटेज सिटी के क्षेत्रफल में बदलाव हो सकता है। बृज की संस्कृति को सहेजते हुए बसने जा रहे हेरीटेज सिटी को करीब चार गुना बड़ा बनाने की योजना है। इसके अलावा यहां विकसित होने वाली सुविधाओं को पीपीपी मॉडल पर बनाया जा सकता है। इसके लिए प्रस्ताव शुक्रवार को होने वाली यीडा की बोर्ड बैठक में रखा जाएगा। यह बोर्ड बैठक दोपहर में करीब तीन बजे से यीडा के चेयरमैन व प्रमुख सचिव उद्योग आलोक कुमार की अध्यक्षता में होगी।
अधिकारियों का कहना है कि हेरीटेज सिटी को अभी तक 750 एकड़ में बसाए जाने की योजना थी। लेकिन, वृंदावन और मथुरा में बनी हुई मांग को देखते हुए अब इसका क्षेत्रफल 3000 एकड़ किए जाने की योजना है। इससे अधिक संख्या में लोगों को आवास व व्यावसायिक उपयोग के लिए भूखंड मिल सकेंगे। जहां हेरीटेज सिटी का विकास होना है। वह जगह रोड नेटवर्क और दूसरे संसाधनों के विकास के लिए उपयुक्त है। अभी आवश्यक जमीन भी यहां उपलब्ध है जिससे योजना में शामिल किया जा सकता है। इसके अलावा आंशिक रूप से पीपीपी मॉडल पर यहां सुविधाओं के विकास पर भी मंजूरी बोर्ड से ली जानी है।
इसके अलावा यमुना सिटी में हाइड्रोजन फ्यूल से बसों का संचालन शुरू किए जाने पर भी मंजूरी बोर्ड से होनी है। नोएडा एयरपोर्ट के लिए इन बसों को चलाया जाएगा। एनटीपीसी इन बसों की आपूर्ति करेगा। हाइड्रोजन फ्यूल भी एसटीपी के पानी से तैयार कर दिया जाना है। यूपी में ग्रीन ट्रांसपोर्ट के रूप में यह पहला प्रयोग होगा। तीन साल के लिए इसका पायलट प्रोजेक्ट होना है। सभी सुविधाओं और विकास कार्य को एक ही पोर्टल से निगरानी करने के लिए वन मैप को भी लांच किया जा सकता है। बोर्ड बैठक में इसके लिए प्रस्ताव रखा जाएगा। वन मैप को आमजन के लिए भी खोला जाना है, इसके लिए भी बोर्ड से निर्देश मिल सकते हैं।
विज्ञापन
फंसे हुए प्रोजेक्टों पर भी बोर्ड से मिलने हैं निर्देश
अधिकारियों का कहना है कि फंसे हुए प्रोजेक्ट को लेकर भी एक प्रस्ताव रखा जाना तय हुआ है। प्रयास यही है कि इन प्रोजेक्टों में लोगों की रजिस्ट्री शुरू कराई जा सकें। बोर्ड के फैसले से सैकड़ों परिवारों को राहत मिल सकती है।
विज्ञापन
- यमुना प्राधिकरण बोर्ड बैठक आज दोपहर में तीन बजे से होगी शुरू
- राया अर्बन सेंटर के विकास के मॉडल पर भी होगा फैसला
- हाइड्रोजन फ्यूल से बस संचालन और वन मैप प्रोजेक्ट को शुरू करने की भी मिल सकती है मंजूरी
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। यमुना सिटी में बस रहे राया अर्बन सेंटर में प्रस्तावित हेरीटेज सिटी के क्षेत्रफल में बदलाव हो सकता है। बृज की संस्कृति को सहेजते हुए बसने जा रहे हेरीटेज सिटी को करीब चार गुना बड़ा बनाने की योजना है। इसके अलावा यहां विकसित होने वाली सुविधाओं को पीपीपी मॉडल पर बनाया जा सकता है। इसके लिए प्रस्ताव शुक्रवार को होने वाली यीडा की बोर्ड बैठक में रखा जाएगा। यह बोर्ड बैठक दोपहर में करीब तीन बजे से यीडा के चेयरमैन व प्रमुख सचिव उद्योग आलोक कुमार की अध्यक्षता में होगी।
अधिकारियों का कहना है कि हेरीटेज सिटी को अभी तक 750 एकड़ में बसाए जाने की योजना थी। लेकिन, वृंदावन और मथुरा में बनी हुई मांग को देखते हुए अब इसका क्षेत्रफल 3000 एकड़ किए जाने की योजना है। इससे अधिक संख्या में लोगों को आवास व व्यावसायिक उपयोग के लिए भूखंड मिल सकेंगे। जहां हेरीटेज सिटी का विकास होना है। वह जगह रोड नेटवर्क और दूसरे संसाधनों के विकास के लिए उपयुक्त है। अभी आवश्यक जमीन भी यहां उपलब्ध है जिससे योजना में शामिल किया जा सकता है। इसके अलावा आंशिक रूप से पीपीपी मॉडल पर यहां सुविधाओं के विकास पर भी मंजूरी बोर्ड से ली जानी है।
विज्ञापन
इसके अलावा यमुना सिटी में हाइड्रोजन फ्यूल से बसों का संचालन शुरू किए जाने पर भी मंजूरी बोर्ड से होनी है। नोएडा एयरपोर्ट के लिए इन बसों को चलाया जाएगा। एनटीपीसी इन बसों की आपूर्ति करेगा। हाइड्रोजन फ्यूल भी एसटीपी के पानी से तैयार कर दिया जाना है। यूपी में ग्रीन ट्रांसपोर्ट के रूप में यह पहला प्रयोग होगा। तीन साल के लिए इसका पायलट प्रोजेक्ट होना है। सभी सुविधाओं और विकास कार्य को एक ही पोर्टल से निगरानी करने के लिए वन मैप को भी लांच किया जा सकता है। बोर्ड बैठक में इसके लिए प्रस्ताव रखा जाएगा। वन मैप को आमजन के लिए भी खोला जाना है, इसके लिए भी बोर्ड से निर्देश मिल सकते हैं।
विज्ञापन
फंसे हुए प्रोजेक्टों पर भी बोर्ड से मिलने हैं निर्देश
अधिकारियों का कहना है कि फंसे हुए प्रोजेक्ट को लेकर भी एक प्रस्ताव रखा जाना तय हुआ है। प्रयास यही है कि इन प्रोजेक्टों में लोगों की रजिस्ट्री शुरू कराई जा सकें। बोर्ड के फैसले से सैकड़ों परिवारों को राहत मिल सकती है।