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Noida News: अंग्रेजी शासन में भी होती थी द्रोणाचार्य मंदिर में पूजा

Wed, 13 Sep 2023 12:35 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Wed, 13 Sep 2023 12:35 AM IST
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Worship was done in Dronacharya temple even during British rule.
द्रोण तालाब में पानी नहीं भरने के रहस्य को जानने का अंग्रेजी हुकूमत ने भी किया था प्रयास
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संवाद न्यूज एजेंसी

दनकौर। गौतमबुद्धनगर में भी महाभारतकालीन की धरोहर द्रोणाचार्य मंदिर, तालाब समेत एकलव्य उद्यान व एकलव्य प्रतिमा कई रूपों में आज भी मौजूद है। इनमें न सिर्फ संस्कृति व संस्कारों को संजोया जाता है, बल्कि आज भी यहां के शिक्षण संस्थानों और अखाड़े में गुरु द्रोण के बताए रास्ते पर चलने की दीक्षा दी जाती है। दनकौर कस्बे में द्रोण तालाब है और इसमें कभी पानी नहीं ठहरता है। श्री द्रोण गोशाला समिति के अध्यक्ष रजनीकांत अग्रवाल का कहना है कि जब यमुना ने अंग्रेजी हुकूमत के दौरान अपना कहर बरपाया था तो दनकौर और आसपास का क्षेत्र पानी से डूब गया था, मगर दनकौर का पूरा पानी द्रोण तालाब के माध्यम से जमीन में उतर गया था।

इसके बाद अंग्रेजों ने इस द्रोण मंदिर और तालाब का सौंदर्यीकरण कराया था। साथ ही इस अजब-गजब व्यवस्था का परीक्षण कराया, लेकिन इस रहस्य से पर्दा नहीं उठा पाए। इसके बाद द्रोणाचार्य मंदिर में पूजा-अर्चना शुरू कराई गई। इतना ही नहीं ब्रिटिश सरकार ने तालाब के लिए सीढ़ियां बनाकर यहां पर कुश्ती करानी शुरू की और फिर इसे अखाड़े का रूप दे दिया। रजनीकांत अग्रवाल ने बताया कि आज भी मान्यता है कि कौरव-पांडव शिक्षा के दौरान इसी तालाब में कुश्ती लड़ते थे। 100 साल से यहां हर साल जन्माष्टमी पर द्रोण मेले का आयोजन किया जाता रहा है। इसमें देश के विभिन्न राज्यों से महिला-पुरुष पहलवान कुश्ती में ताकत आजमाने आते हैं। द्रोण नाट्य मंच पर देशभक्ति और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। यहां पर आज भी एकलव्य प्रतिमा व उद्यान, पारसी नाट्य मंच, द्रोण गोशाला और एकलव्य द्वारा धनुर्विद्या सीखने के लिए स्थापित की गई द्रोणाचार्य की मूर्ति मौजूद है। द्रोण गोशाला द्वारा संचालित एसडीआरवी कॉन्वेंट स्कूल के पूर्व संचालक संदीप जैन ने बताया कि साल 2013 में द्रोणाचार्य मंदिर और द्रोण तालाब को पुरातत्व विभाग द्वारा स्मारक के रूप में निर्मित करने की घोषणा की जा चुकी है।
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