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विश्व फेफड़ा दिवस आज : प्रदूषण ने पांच वर्ष में दोगुने कर दिए अस्थमा रोगी

Thu, 25 Sep 2025 05:32 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Thu, 25 Sep 2025 05:32 AM IST
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World Lung Day today: Pollution has doubled the number of asthma patients in five years.
प्रतीकात्मक तस्वीर। 
लखनऊ। शहर में वायु प्रदूषण के बढ़ते प्रभाव की वजह से अस्थमा रोगी तेजी से बढ़ रहे हैं। केजीएमयू के श्वसन विभाग की ओपीडी में पिछले पांच वर्ष में अस्थमा रोगियों की संख्या दोगुनी हो गई है। इसकी सबसे बड़ी वजह प्रदूषण है।
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केजीएमयू में रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग के प्रमुख प्रो. सूर्यकांत ने बताया कि पांच वर्ष पहले तक ओपीडी में हर महीने करीब 100 अस्थमा रोगी आते थे। अब इनकी संख्या 180 से 200 तक पहुंच चुकी है। अस्थमा की बीमारी में सांस की नली में सूजन आ आती है। इस वजह से व्यक्ति को सांस लेने में समस्या होती है। इसके रोगी देश में तेजी से बढ़ते जा रहे हैं। वायु प्रदूषण की वजह से यह समस्या ज्यादा हो रही है। वायु प्रदूषण के लिए शहर में वाहनों की संख्या और बड़े स्तर पर हो रहे निर्माण कार्य जिम्मेदार हैं।
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अस्थमा बढ़ने के अन्य प्रमुख कारण
सिजेरियन प्रसव : सामान्य प्रसव की संख्या लगातार कम हो रही है और सिजेरियन की संख्या बढ़ रही है। कई अध्ययनों में यह बात सामने आई है कि सिजेरियन प्रसव वाले बच्चों में अस्थमा का खतरा सामान्य बच्चों के मुकाबले ज्यादा होता है।
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धूम्रपान : समाज में धूम्रपान का चलन काफी बढ़ गया है। धूम्रपान करने वालों के साथ ही उनके आसपास रहने वालों को भी अस्थमा और सांस की बीमारियों होने का खतरा ज्यादा रहता है।


खानपान : हमारे खानपान का असर फेफड़ों पर भी पड़ता है। फास्टफूड और पैक्ड भोजन करने से भी अस्थमा का खतरा होता है।
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प्रदूषण से बचने के उपाय

- अपने आसपास ज्यादा से ज्यादा पौधे रोपें।

- धूम्रपान न करें और ऐसा करने वालों से दूरी बनाए रखे।

- घर से बाहर निकलने पर मास्क का उपयोग करें।

- नियमित तौर पर प्राणायाम करें।

- निर्माण के दौरान मानकों का पालन हो और उन्हें ढका जाए।
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वायु प्रदूषण के लिए इंदौर की तरह शहर में एक दिन नो कार डे के साथ ही कई अन्य व्यवस्थाएं अपनाई जा सकती हैं। इसी तरह निर्माण से पहले बिल्डर को कम से कम एक हजार पौधे लगाने के लिए कहा जाना चाहिए। जन्मदिन पर पौधे रोपकर भी हम प्रदूषण से निपट सकते हैं।
- प्रो. सूर्यकांत, विभागाध्यक्ष रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग केजीएमयू
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