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वर्ल्ड अर्थराइटिस डे : हर तीसरे व्यक्ति को गठिया, 2025 तक बिगड़ेंगे हालात

Mon, 11 Oct 2021 07:39 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Mon, 11 Oct 2021 07:39 PM IST
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World Arthritis Day: Every third person has arthritis, condition will worsen by 2025
नोएडा। विश्व में हर तीसरा व्यक्ति गठिया (अर्थराइटिस) से पीड़ित है। भारत में गठिया के मरीजों की संख्या करीब 18 लाख तक पहुंच चुकी है। हर साल जोड़ों के दर्द की शिकायत लेकर करीब 1.35 लाख मरीज डॉक्टरों के पास पहुंचते हैं। साधारण समझी जाने वाली यह बीमारी साल 2025 तक खतरनाक रूप धारण कर लेगी, क्योंकि औस्टियोेर्र्थइटिस (गठिया का एक प्रकार) से पीड़ित मरीजों के मामले में भारत विश्व का नंबर एक देश बन जाएगा। यह बीमारी विश्व की सबसे बड़ी गैर संक्रामक बीमारी बन जाएगी। वर्ल्ड अर्थराइटिस डे पर मिशन अर्थराइटिस इंडिया (एमएआई) की ओर से सोमवार को सेक्टर-31 स्थित इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) हाउस में पत्रकारों को संबोधित कर प्रसिद्ध रूमेटाइडिस्ट एवं मिशन निदेशक डॉ. किरण सेठ ने यह जानकारी दी।
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उन्होंने बताया कि, गठिया न सिर्फ शरीर के जोड़ों को खराब करता है बल्कि आंख, आंत, दिल, फेफड़ों, रीढ़ के अलावा अन्य हिस्सों को भी खराब करता है। चिंताजनक बात यह है कि इस बीमारी को सामाजिक और शासन स्तर पर हल्के में लिया जा रहा है। देश के 80 फीसदी लोग इसके प्रति जागरूक नहीं है। साधारण से बीमारी समझकर गंभीरता से न लेना भारी पड़ सकता है। इस बीमारी से बड़ी संख्या में महिलाएं प्रभावित हो रही हैं। युवाओं को भी यह रोग तेजी से अपनी चपेट में ले रहा है। इसके लक्षणों के आधार पर शुरुआती तीन से छह महीने में उपचार शुरू हो जाए तो इसके प्रभाव को रोका जा सकता है। डॉ. सेठ ने बताया कि 21 नवंबर को संस्था शहर में बड़े स्तर पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करेगी।
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इस दौरान दिल्ली-एनसीआर व उत्तर प्रदेश ब्रांच ने विभिन्न जनपदों में पीड़ितों के लिए विशेष अभियान चलाने की घोषणा की।
एमएआई के चेयरमैन अंकुर शुक्ला ने अर्थराइटिस मरीजों को स्वास्थ्य बीमा के दायरे में नहीं लाए जाने को नीतिगत नाकामी करार दिया। उन्होंने कहा कि बीमारी से पीड़ित युवा और महिलाएं आर्थिक लाचारी के कारण समय पर उपचार नहीं करवा पाते। इस कारण वह अप्राकृतिक दिव्यांगता के शिकार हो रहे हैं। मौके पर कोषाध्यक्ष अंकिता सोनी, संयुक्त सचिव सुशीला, आईटी सेल के पंकज, कानूनी सलाहकार हरिशंकर, कास इंडिया के सचिव रत्नेश आदि मौजूद रहे।
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कोविड-19 के बाद खतरा और बढ़ा
डॉ. किरण सेठ ने बताया कि वर्ष 2020 में विश्वभर में फैली कोरोना महामारी के कारण गठिया की तकलीफ के लक्षण पहले के मुकाबले अधिक दिखाई दे रहे हैं। कोरोना की दूसरी लहर के बाद ठीक हुए मरीज इससे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। एनसीआर में बढ़ता प्रदूषण और धूम्रपान भी एक बड़ी वजह है।
डॉक्टर से कब करें संपर्क
- आमतौर पर लोग शरीर में होने वाले सामान्य दर्द और बुखार को अनदेखा कर देते हैं। इसके घातक परिणाम हो सकते हैं।
- शरीर के जोड़ों में हर समय दर्द बना रहता है। अगर यह दर्द 6-8 हफ्ते या इससे अधिक तक पेन किलर लेने के बाद भी बना रहता है तो तुरंत चिकित्सक से मिलें।
- सामान्य और आसानी से किए जाने वाले कामकाज में दर्द और तकलीफ का एहसास होता है या काम करने की क्षमता पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है।
- गठिया से पीड़ित को जोड़ों, जोड़ के आसपास के हिस्से में सूजन और जकड़न होना, इस कारण अंगों में विकृति दिखाई देना।
- गठिया अगर गंभीर रूप जैसे रूमेटाइड अर्थराइटिस का रूप ले लेता है तब भूख की कमी के साथ ही व्यक्ति की प्रतिरोधक क्षमता भी कम होती है।
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