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Noida News: पहले बजट से भी नहीं करवाए काम, फंसने का डर देख बिना टेंडर पूरे हुए कार्य
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- सेक्टर में नई लगाई जा रहीं स्ट्रीट लाइटें, सीवर लाइनों की टेपिंग भी करवाई जाने लगी
नोट- फोटो हैं पहले बगैर पेंट के पड़े और बाद में पेंट के बाद ब्रेकर, स्ट्रीट लाइटें लगाते कर्मचारियों की।
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। सेक्टर-150 में जिस जगह पर हादसा हुआ वहां से सड़क सुरक्षा के इंतजाम नदारद थे। ब्रेकर से कार बेकाबू होने और फिर नाला पार कर पानी में कार गिर गई। ब्रेकर पर पेंट तक नहीं था। रेडियम संकेतक और बोर्ड भी नहीं लगे थे इसके अलावा स्ट्रीट लाइटें भी नहीं थीं। अब यहां सभी इंतजाम दुरुस्त हो गए हैं। पहले प्राधिकरण के जिम्मेदार विभाग के अधिकारी बजट से भी काम नहीं करवा पाए। एसआईटी जांच शुरू होने पर जब फंसने का डर सताने पर बिना टेंडर के काम होने लगे हैं। यह पैसा कहां से आया अब तक स्पष्ट नहीं हो पा रहा है। इसे देखकर सेक्टर के निवासी भी हैरान हैं।
नोएडा प्राधिकरण में काम कराने के लिए वर्क ऑर्डर की व्यवस्था पिछले कई माह से बंद है। इसके बाद काम सिर्फ टेंडर के जरिये होते हैं। इतने कम समय में टेंडर जारी कर एजेंसी का चयन भी नहीं हो सकता है। यहां पर अधिकतर काम ट्रैफिक सेल व विद्युत यांत्रिक विभाग की तरफ से करवाए गए हैं। सिविल में वर्क सर्कल-10 की तरफ से बैरिकेडिंग करवाई गई है। बैरिकेड्स भी पुराने हैं। करवाए जाने वाले काम को लेकर प्राधिकरण का कोई अधिकारी बोलने के लिए तैयार नहीं है।
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नोट- फोटो हैं पहले बगैर पेंट के पड़े और बाद में पेंट के बाद ब्रेकर, स्ट्रीट लाइटें लगाते कर्मचारियों की।
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। सेक्टर-150 में जिस जगह पर हादसा हुआ वहां से सड़क सुरक्षा के इंतजाम नदारद थे। ब्रेकर से कार बेकाबू होने और फिर नाला पार कर पानी में कार गिर गई। ब्रेकर पर पेंट तक नहीं था। रेडियम संकेतक और बोर्ड भी नहीं लगे थे इसके अलावा स्ट्रीट लाइटें भी नहीं थीं। अब यहां सभी इंतजाम दुरुस्त हो गए हैं। पहले प्राधिकरण के जिम्मेदार विभाग के अधिकारी बजट से भी काम नहीं करवा पाए। एसआईटी जांच शुरू होने पर जब फंसने का डर सताने पर बिना टेंडर के काम होने लगे हैं। यह पैसा कहां से आया अब तक स्पष्ट नहीं हो पा रहा है। इसे देखकर सेक्टर के निवासी भी हैरान हैं।
नोएडा प्राधिकरण में काम कराने के लिए वर्क ऑर्डर की व्यवस्था पिछले कई माह से बंद है। इसके बाद काम सिर्फ टेंडर के जरिये होते हैं। इतने कम समय में टेंडर जारी कर एजेंसी का चयन भी नहीं हो सकता है। यहां पर अधिकतर काम ट्रैफिक सेल व विद्युत यांत्रिक विभाग की तरफ से करवाए गए हैं। सिविल में वर्क सर्कल-10 की तरफ से बैरिकेडिंग करवाई गई है। बैरिकेड्स भी पुराने हैं। करवाए जाने वाले काम को लेकर प्राधिकरण का कोई अधिकारी बोलने के लिए तैयार नहीं है।
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