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Noida News: पांच साल बाद यूपीआईडी को मिले 10 स्थायी असिस्टेंट प्रोफेसर, पढ़ाई और रिसर्च को मिलेगा नया संबल
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- अब 12 हुईं स्थायी फैकल्टी, संविदा शिक्षकों पर निर्भरता होगी कम
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। पांच साल के लंबे इंतजार के बाद डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय (एकेटीयू) के सेक्टर-62 स्थित उत्तर प्रदेश इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन (यूपीआईडी) को 10 नए स्थायी असिस्टेंट प्रोफेसर मिल गए हैं। नई नियुक्तियों के बाद संस्थान में स्थायी फैकल्टी की संख्या बढ़कर 12 हो गई है। इससे नियमित पढ़ाई, शोध और शैक्षणिक गतिविधियों को नई गति मिलने की उम्मीद है। अब तक संस्थान में केवल दो स्थायी असिस्टेंट प्रोफेसर कार्यरत थे, जबकि अधिकांश शिक्षण कार्य संविदा शिक्षकों के भरोसे चल रहा था। इसका असर नियमित कक्षाओं, रिसर्च प्रोजेक्ट और अन्य शैक्षणिक गतिविधियों पर पड़ रहा था।
यूपीआईडी को वर्ष 2019 में चार स्थायी असिस्टेंट प्रोफेसर मिले थे, लेकिन दो वर्ष के भीतर दो शिक्षकों के संस्थान छोड़ने के बाद स्थायी फैकल्टी की संख्या घटकर दो रह गई थी। इसके बाद लंबे समय तक संविदा शिक्षकों के माध्यम से शिक्षण कार्य संचालित किया गया। संस्थान के निदेशक डॉ. कुमार संभव ने बताया कि नए असिस्टेंट प्रोफेसरों की नियुक्ति से विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक माहौल मिलेगा। साथ ही रिसर्च, इंडस्ट्री सहयोग, नवाचार और डिजाइन आधारित शोध गतिविधियों को भी मजबूती मिलेगी।
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माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। पांच साल के लंबे इंतजार के बाद डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय (एकेटीयू) के सेक्टर-62 स्थित उत्तर प्रदेश इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन (यूपीआईडी) को 10 नए स्थायी असिस्टेंट प्रोफेसर मिल गए हैं। नई नियुक्तियों के बाद संस्थान में स्थायी फैकल्टी की संख्या बढ़कर 12 हो गई है। इससे नियमित पढ़ाई, शोध और शैक्षणिक गतिविधियों को नई गति मिलने की उम्मीद है। अब तक संस्थान में केवल दो स्थायी असिस्टेंट प्रोफेसर कार्यरत थे, जबकि अधिकांश शिक्षण कार्य संविदा शिक्षकों के भरोसे चल रहा था। इसका असर नियमित कक्षाओं, रिसर्च प्रोजेक्ट और अन्य शैक्षणिक गतिविधियों पर पड़ रहा था।
यूपीआईडी को वर्ष 2019 में चार स्थायी असिस्टेंट प्रोफेसर मिले थे, लेकिन दो वर्ष के भीतर दो शिक्षकों के संस्थान छोड़ने के बाद स्थायी फैकल्टी की संख्या घटकर दो रह गई थी। इसके बाद लंबे समय तक संविदा शिक्षकों के माध्यम से शिक्षण कार्य संचालित किया गया। संस्थान के निदेशक डॉ. कुमार संभव ने बताया कि नए असिस्टेंट प्रोफेसरों की नियुक्ति से विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक माहौल मिलेगा। साथ ही रिसर्च, इंडस्ट्री सहयोग, नवाचार और डिजाइन आधारित शोध गतिविधियों को भी मजबूती मिलेगी।
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