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यूपीएचएसपी कर्मियों की हड़ताल, जिला अस्पताल बेहाल
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यूपीएचएसपी कर्मियों की हड़ताल, जिला अस्पताल बेहाल
नोएडा। सेक्टर-30 स्थित जिला अस्पताल में यूपी हेल्थ सिस्टम स्ट्रेटनिंग प्रोजेक्ट (यूपीएचएसपी) के कर्मचारियों की हड़ताल मरीजों के लिए मुसीबत बन चुकी है। हड़ताल के तीसरे दिन यूपीएचएसपी के सभी 91 कर्मचारी धरने पर बैठ गए। इससे अस्पताल का काम प्रभावित रहा। इनमें स्टाफ नर्स, लैब टेक्नीशियन जैसे विभिन्न महत्वपूर्ण कर्मचारी शामिल हैं। ऑपरेशन से लेकर साधारण इलाज तक में इनकी जरूरत पड़ती है। वहीं, कर्मचारियों के धरने पर बैठने से मरीजों की परेशानी बढ़ गई है। बुधवार को अस्पताल में किसी भी तरह का मेजर ऑपरेशन नहीं हो सका। साथ ही 27 मरीजों को रेफर भी करना पड़ा।
प्रदेश में यूपीएचएसपी कर्मियों का कार्यकाल सितंबर से समाप्त होने वाला था। विरोध के बाद इसे बढ़ाकर अक्तूबर तक कर दिया गया। लेकिन, इसके बाद इन कर्मियों का क्या होगा, इसे लेकर अभी तक संशय बना हुआ है। नौकरी पर संकट के चलते कर्मचारी हड़ताल पर चले गए हैं। मंगलवार को औचक निरीक्षण के लिए अस्पताल पहुंचे प्रदेश सरकार के स्वास्थ्य मंत्री जय प्रताप सिंह के सामने भी हड़ताल का मुद्दा उठा था। जिस पर उन्होंने मामले का हल निकालने का आश्वासन दिया था। साथ ही संबंधित अधिकारियों को हड़ताल खत्म कराने के निर्देश दिए। लेकिन, स्थाई समाधान नहीं मिलने से कर्मचारियों की नाराजगी खत्म नहीं हुई है। भविष्य अधर में होने के कारण कर्मचारी अपनी मांगों पर अड़े हैं। उनकी मांग है कि यदि उनका कार्यकाल समाप्त किया जा रहा है, तो उन्हें अन्य सेवाओं के जरिए समायोजन दिया जाए। वहीं, हड़ताल से अस्पताल की स्थिति चिंताजनक बन गई है। गंभीर मरीजों को दूसरे अस्पतालों में रेफर किया जा रहा है। मंगलवार से बुधवार दो बजे के बीच 27 मरीजों को रेफर किया गया है। वहीं, अस्पताल में भर्ती जिन मरीजों का ऑपरेशन होना है, उनका भी बुरा हाल है। हड़ताल के पहले और दूसरे दिन कुछ मेजर ऑपरेशन हुए और कुछ टाल दिए गए। वहीं, बुधवार को एक भी मेजर ऑपरेशन नहीं हुआ है। डॉक्टरों का कहना है कि इस वक्त ऑपरेशन किए जाते हैं, तो पोस्ट सर्जरी ट्रीटमेंट के लिए स्टाफ नहीं होने से मरीज के लिए खतरा पैदा हो जाएगा। इस वजह से ऑपरेशन टाले जा रहे हैं। आम मरीजों के लिए भी चुनौतियां कम नहीं है। क्योंकि ड्रिप चढ़ने या इंजेक्शन लगाने जैसे काम के लिए भी मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। यूपीएचएसपी के साथ ही अस्पताल में अन्य सोर्स से भी स्टाफ भर्ती हुई है। लेकिन, उनकी संख्या बेहद कम है, इससे अस्पताल की जिम्मेदारियां संभालना मुश्किल हो रहा है। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार हड़ताल खत्म कराने के प्रयास किए जा रहे हैं।
साधारण स्टाफ कर रहा अतिरिक्त काम
यूपीएचएसपी कर्मियों की हड़ताल के बाद अन्य कर्मचारियों को अतिरिक्त काम करना पड़ रहा है। कई कर्मचारी दिन-रात ओवरटाइम कर स्थिति को संभालने का प्रयास कर रहे हैं। वहीं, एंबुलेंस स्टाफ को भी समय मिलने पर अस्पताल स्टाफ का सहयोग करने के लिए कहा गया है। हालांकि, शुरुआती दो दिन तो ओवरटाइम की व्यवस्था ने संभाल लिए। लेकिन समय बीतने के साथ परेशानी बढ़ रही है।
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यूपीएचएसपी कर्मचारियों को समस्या का हल निकालने का आश्वासन दिया गया था। लेकिन, वह हड़ताल पर अड़े हैं। हड़ताल को खत्म कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। कर्मचारियों को अन्य विभागों के साथ समायोजित करने की प्रक्रिया पर विचार चल रहा है। वहीं, हड़ताल से मरीजों पर प्रभाव न पड़े, इसके प्रयास किए जा रहे हैं।
- डॉ. अनुराग भार्गव, सीएमओ
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नोएडा। सेक्टर-30 स्थित जिला अस्पताल में यूपी हेल्थ सिस्टम स्ट्रेटनिंग प्रोजेक्ट (यूपीएचएसपी) के कर्मचारियों की हड़ताल मरीजों के लिए मुसीबत बन चुकी है। हड़ताल के तीसरे दिन यूपीएचएसपी के सभी 91 कर्मचारी धरने पर बैठ गए। इससे अस्पताल का काम प्रभावित रहा। इनमें स्टाफ नर्स, लैब टेक्नीशियन जैसे विभिन्न महत्वपूर्ण कर्मचारी शामिल हैं। ऑपरेशन से लेकर साधारण इलाज तक में इनकी जरूरत पड़ती है। वहीं, कर्मचारियों के धरने पर बैठने से मरीजों की परेशानी बढ़ गई है। बुधवार को अस्पताल में किसी भी तरह का मेजर ऑपरेशन नहीं हो सका। साथ ही 27 मरीजों को रेफर भी करना पड़ा।
प्रदेश में यूपीएचएसपी कर्मियों का कार्यकाल सितंबर से समाप्त होने वाला था। विरोध के बाद इसे बढ़ाकर अक्तूबर तक कर दिया गया। लेकिन, इसके बाद इन कर्मियों का क्या होगा, इसे लेकर अभी तक संशय बना हुआ है। नौकरी पर संकट के चलते कर्मचारी हड़ताल पर चले गए हैं। मंगलवार को औचक निरीक्षण के लिए अस्पताल पहुंचे प्रदेश सरकार के स्वास्थ्य मंत्री जय प्रताप सिंह के सामने भी हड़ताल का मुद्दा उठा था। जिस पर उन्होंने मामले का हल निकालने का आश्वासन दिया था। साथ ही संबंधित अधिकारियों को हड़ताल खत्म कराने के निर्देश दिए। लेकिन, स्थाई समाधान नहीं मिलने से कर्मचारियों की नाराजगी खत्म नहीं हुई है। भविष्य अधर में होने के कारण कर्मचारी अपनी मांगों पर अड़े हैं। उनकी मांग है कि यदि उनका कार्यकाल समाप्त किया जा रहा है, तो उन्हें अन्य सेवाओं के जरिए समायोजन दिया जाए। वहीं, हड़ताल से अस्पताल की स्थिति चिंताजनक बन गई है। गंभीर मरीजों को दूसरे अस्पतालों में रेफर किया जा रहा है। मंगलवार से बुधवार दो बजे के बीच 27 मरीजों को रेफर किया गया है। वहीं, अस्पताल में भर्ती जिन मरीजों का ऑपरेशन होना है, उनका भी बुरा हाल है। हड़ताल के पहले और दूसरे दिन कुछ मेजर ऑपरेशन हुए और कुछ टाल दिए गए। वहीं, बुधवार को एक भी मेजर ऑपरेशन नहीं हुआ है। डॉक्टरों का कहना है कि इस वक्त ऑपरेशन किए जाते हैं, तो पोस्ट सर्जरी ट्रीटमेंट के लिए स्टाफ नहीं होने से मरीज के लिए खतरा पैदा हो जाएगा। इस वजह से ऑपरेशन टाले जा रहे हैं। आम मरीजों के लिए भी चुनौतियां कम नहीं है। क्योंकि ड्रिप चढ़ने या इंजेक्शन लगाने जैसे काम के लिए भी मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। यूपीएचएसपी के साथ ही अस्पताल में अन्य सोर्स से भी स्टाफ भर्ती हुई है। लेकिन, उनकी संख्या बेहद कम है, इससे अस्पताल की जिम्मेदारियां संभालना मुश्किल हो रहा है। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार हड़ताल खत्म कराने के प्रयास किए जा रहे हैं।
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साधारण स्टाफ कर रहा अतिरिक्त काम
यूपीएचएसपी कर्मियों की हड़ताल के बाद अन्य कर्मचारियों को अतिरिक्त काम करना पड़ रहा है। कई कर्मचारी दिन-रात ओवरटाइम कर स्थिति को संभालने का प्रयास कर रहे हैं। वहीं, एंबुलेंस स्टाफ को भी समय मिलने पर अस्पताल स्टाफ का सहयोग करने के लिए कहा गया है। हालांकि, शुरुआती दो दिन तो ओवरटाइम की व्यवस्था ने संभाल लिए। लेकिन समय बीतने के साथ परेशानी बढ़ रही है।
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यूपीएचएसपी कर्मचारियों को समस्या का हल निकालने का आश्वासन दिया गया था। लेकिन, वह हड़ताल पर अड़े हैं। हड़ताल को खत्म कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। कर्मचारियों को अन्य विभागों के साथ समायोजित करने की प्रक्रिया पर विचार चल रहा है। वहीं, हड़ताल से मरीजों पर प्रभाव न पड़े, इसके प्रयास किए जा रहे हैं।
- डॉ. अनुराग भार्गव, सीएमओ