सुपरटेक ट्विन टावर: सीएम योगी ने प्रकरण में दोषी अधिकारियों के खिलाफ दिए सख्त कार्रवाई के आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा स्थित सुपरटेक के 40 मंजिला इमारत को गिराने के आदेश दिए हैं जिसके बाद यूपी सरकार भी इस मामले को लेकर सख्त दिखाई दे रही है।
विस्तार
सुपरटेक बिल्डर को सुप्रीम कोर्ट से मिले झटके के बाद अब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ट्विन टावर से जुड़े मामले में नोएडा प्राधिकरण के अतिरिक्त सभी आरोपी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई करने के आदेश दिए हैं।
CM Yogi Adityanath has instructed officials concerned to take strict action against the officials accused in alleged irregularities in construction of twins towers in Supertech Emerald Court in Noida: CMO
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Supreme Court y'day ordered demolition of two 'illegal' 40-floor towers pic.twitter.com/Htq2Fwrcwj— ANI UP (@ANINewsUP) September 1, 2021
सुप्रीम कोर्ट ने ट्विन टावर को ढहाने का आदेश दिया है
सुप्रीम कोर्ट ने सुपरटेक को तगड़ा झटका देते हुए उसे एमराल्ड कोर्ट प्रोजेक्ट के 40 मंजिला ट्विन टावर 16 (एपेक्स) और 17 (स्यान) को तीन माह में ढहाने का आदेश दिया है। पीठ ने पाया कि अथॉरिटी के अधिकारियों और बिल्डरों के नापाक गठजोड़ से बिल्डिंग बाईलॉज का उल्लंघन कर प्रोजेक्ट चलाया जा रहा था। रिकॉर्ड ऐसे उदाहरणों से भरा पड़ा है, जो बिल्डर और नोएडा प्राधिकरण की मिलीभगत को दर्शाता है।
जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस एमआर शाह की पीठ ने दोनों टावर गिराने के इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश को बरकरार रखा है। सुप्रीम कोर्ट ने 140 पन्नों के फैसले में कहा कि टावरों को ढहाने का कार्य प्राधिकरण के अधिकारियों की देखरेख में होगा। साथ ही, इस मद में होने वाला खर्च सुपरटेक को वहन करना होगा।
पीठ ने केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान (सीबीआरआई) को इन टावरों को गिराने के लिए कहा है, ताकि इसे सुरक्षित तरीके से ढहाया जा सके। पीठ ने कहा कि यदि सीबीआरआई इसमें असमर्थता जताता है, तो प्राधिकरण दूसरी एक्सपर्ट एजेंसी को नामित कर सकता है।
खरीदारों को दो माह में 12 फीसदी ब्याज सहित वापस मिलेगी रकम
सुप्रीम कोर्ट ने सुपरटेक को दो महीने के भीतर फ्लैट खरीदारों को 12 फीसदी ब्याज के साथ रकम लौटाने का निर्देश दिया है। इसके अलावा बिल्डर को एक महीने के भीतर एमराल्ड कोर्ट ऑनर रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन को हर्जाने के तौर पर दो करोड़ रुपये चुकाने का भी निर्देश दिया है।
चार दशक की हिदायत बेअसर, खामियाजा भुगत रहे खरीदार
पीठ ने कहा, यह अदालत पिछले चार दशक से इसी बात पर जोर दे रही है कि प्राधिकरण निर्माण योजनाओं और इससे जुड़े नियमों को मंजूरी देने में कानून का पालन करें। लेकिन दुर्भाग्यवश बिल्डरों और प्राधिकरणों की नापाक सांठगांठ का खामियाजा खरीदारों को अब तक भुगतना पड़ रहा है। सबसे ज्यादा उनका जीवन प्रभावित हो रहा है। खरीदारों को सही जानकारी से वंचित रखते हुए उन्हें गुमराह किया गया। लिहाजा, कानून को उनकी जायज चिंताओं की रक्षा करने के लिए आगे आना होगा।
टावरों के बीच की दूरी नियम का भी उल्लंघन
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि टावरों के बीच न्यूनतम दूरी के नियम के उल्लंघन के बारे में मुख्य अग्निशमन अधिकारी ने प्राधिकरण को लिखा, लेकिन अधिकारियों ने कोई कार्रवाई नहीं की और न ही इसकी जांच की। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दोनों टावर को बनाने की मंजूरी 26 नवंबर, 2009 को मिली थी, लेकिन उसका निर्माण पांच महीने पहले ही शुरू हो चुका था। इस पर भी कोई कार्रवाई नहीं की गई।