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Noida News: बेहतर सुविधाओं के बाद भी एनआईआरएफ रैंकिंग से जीबीयू बाहर
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नोट- ऑनलाइन न चलाई जाएं
- दूसरे साल भी नहीं मिली जीबीयू को कोई रैंकिंग
- हर साल करोड़ो रुपये खर्च होने के बाद भी हाथ खाली
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय(जीबीयू) लगातार दूसरे साल भी एनआईआरएफ रैंकिंग में जगह बनाने में कामयाब नहीं हो पाया है। जबकि शहर की चार निजी विश्वविद्यालय को एनआईआरएफ रैंकिंग में जगह मिली है। जनपद की एक मात्र सरकारी विश्वविद्यालय होने के बाद भी एनआईआरएफ रैंकिंग से बाहर हो गया है। 511 एकड़ में फैले विश्वविद्यालय में हाईटेक सुविधाएं मौजूद हैं। हर साल करोड़ों रुपये इंफ्रा से लेकर अन्य मदों पर खर्च हो रहे हैं, लेकिन उसके बाद भी विश्वविद्यालय को पिछले दो सालों से कोई रैंक नहीं मिल रही है। प्रदेश की जीबीयू अकेला विश्वविद्यालय है जहां 50 करोड़ की लागत से एआई लैब तैयार हो रही है। इसके साथ ही 20 से अधिक देशों के छात्र यहां पढ़ाई के लिए हर साल आ रहे हैं।
एनआईआरएफ के तहत उच्च शिक्षा संस्थानों का मूल्यांकन शिक्षण और सीखना, शोध और पेशेवर अभ्यास, स्नातक परिणाम, धारणा आदि पर होता है। 128 से अधिक पाठ्यक्रम में छात्र पढ़ रहे हैं। उसके बाद भी किसी भी कार्यक्रम में जीबीयू को कोई रैंकिंग नहीं मिली है। कुलसचिव डॉ. विश्वास त्रिपाठी ने बताया कि तीन साल के डेटा के हिसाब से रैंकिंग बनती है। विश्वविद्यालय लगातार बेहतर कार्य कर रहा है। मैंनेजेमेंट और लॉ के कार्यक्रम में रैंकिंग अगले साल मिल सकती है। कई सालों से अन्य विश्वविद्यालय भाग ले रहे हैं, अगले साल और बेहतर कार्य किए जाएंगे। जिससे जीबीयू भी रैंकिंग में शामिल हो सके। बता दें, शिव नादर विश्वविद्यालय, शारदा, गलगोटिया विश्वविद्यालय और एमिटी ने एनआईआरएफ रैंकिंग में जगह बनाई है।
जीबीयू में मौजूद सुविधाएं
विश्वविद्यालय में स्कूल ऑफ मैनेजमेंट, स्कूल ऑफ बायोटेक्नोलॉजी, स्कूल ऑफ इनफॉर्मेशन एंड कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी, स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग, स्कूल का ह्यूमैनिटीज एंड सोशल साइंस, स्कूल ऑफ वोकेशनल स्टडीज एंड अप्लाइड साइंस, स्कूल ऑफ लॉ जस्टिस एंड गवर्नेस और स्कूल आफ बुद्धिस्ट स्टडीज एंड सिविलाइजेशन संचालित हो रहे हैं। वहीं एशिया का सबसे बड़ा पुस्तकालय है। यह एक आवासीय विश्वविद्यालय है, जहां 5000 विद्यार्थियों के लिए 19 आधुनिक सिंगल बेड हॉस्टल है, जिसमें छह छात्राओं और 13 छात्रों के लिए है।
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- दूसरे साल भी नहीं मिली जीबीयू को कोई रैंकिंग
- हर साल करोड़ो रुपये खर्च होने के बाद भी हाथ खाली
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय(जीबीयू) लगातार दूसरे साल भी एनआईआरएफ रैंकिंग में जगह बनाने में कामयाब नहीं हो पाया है। जबकि शहर की चार निजी विश्वविद्यालय को एनआईआरएफ रैंकिंग में जगह मिली है। जनपद की एक मात्र सरकारी विश्वविद्यालय होने के बाद भी एनआईआरएफ रैंकिंग से बाहर हो गया है। 511 एकड़ में फैले विश्वविद्यालय में हाईटेक सुविधाएं मौजूद हैं। हर साल करोड़ों रुपये इंफ्रा से लेकर अन्य मदों पर खर्च हो रहे हैं, लेकिन उसके बाद भी विश्वविद्यालय को पिछले दो सालों से कोई रैंक नहीं मिल रही है। प्रदेश की जीबीयू अकेला विश्वविद्यालय है जहां 50 करोड़ की लागत से एआई लैब तैयार हो रही है। इसके साथ ही 20 से अधिक देशों के छात्र यहां पढ़ाई के लिए हर साल आ रहे हैं।
एनआईआरएफ के तहत उच्च शिक्षा संस्थानों का मूल्यांकन शिक्षण और सीखना, शोध और पेशेवर अभ्यास, स्नातक परिणाम, धारणा आदि पर होता है। 128 से अधिक पाठ्यक्रम में छात्र पढ़ रहे हैं। उसके बाद भी किसी भी कार्यक्रम में जीबीयू को कोई रैंकिंग नहीं मिली है। कुलसचिव डॉ. विश्वास त्रिपाठी ने बताया कि तीन साल के डेटा के हिसाब से रैंकिंग बनती है। विश्वविद्यालय लगातार बेहतर कार्य कर रहा है। मैंनेजेमेंट और लॉ के कार्यक्रम में रैंकिंग अगले साल मिल सकती है। कई सालों से अन्य विश्वविद्यालय भाग ले रहे हैं, अगले साल और बेहतर कार्य किए जाएंगे। जिससे जीबीयू भी रैंकिंग में शामिल हो सके। बता दें, शिव नादर विश्वविद्यालय, शारदा, गलगोटिया विश्वविद्यालय और एमिटी ने एनआईआरएफ रैंकिंग में जगह बनाई है।
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जीबीयू में मौजूद सुविधाएं
विश्वविद्यालय में स्कूल ऑफ मैनेजमेंट, स्कूल ऑफ बायोटेक्नोलॉजी, स्कूल ऑफ इनफॉर्मेशन एंड कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी, स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग, स्कूल का ह्यूमैनिटीज एंड सोशल साइंस, स्कूल ऑफ वोकेशनल स्टडीज एंड अप्लाइड साइंस, स्कूल ऑफ लॉ जस्टिस एंड गवर्नेस और स्कूल आफ बुद्धिस्ट स्टडीज एंड सिविलाइजेशन संचालित हो रहे हैं। वहीं एशिया का सबसे बड़ा पुस्तकालय है। यह एक आवासीय विश्वविद्यालय है, जहां 5000 विद्यार्थियों के लिए 19 आधुनिक सिंगल बेड हॉस्टल है, जिसमें छह छात्राओं और 13 छात्रों के लिए है।
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