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ट्विन टावर: जमीन की गहराई में भी खतरे को परखेंगी एजेंसियां

Sun, 31 Oct 2021 12:22 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sun, 31 Oct 2021 12:22 AM IST
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Twin Towers: Agencies will test the danger even in the depths of the ground
नोएडा। सेक्टर-93ए में सुपरटेक के ट्विन टावर गिराने के मामले में अब एजेंसियां टावरों की मजबूती और बनावट की जांच करेंगी। साथ ही, आसपास जमीन की गहराई में भी खतरे को परखेंगी। इसके लिए बिल्डर को नन-डिस्ट्रक्टिव टेस्टिंग (एनडीटी) और ग्राउंड पेनीट्रेटिंग रडार (जीपीआर) टेस्ट का सहारा लेना होगा। इसकी रिपोर्ट की जांच एजेंसियां करेंगी। इससे पहले एजेंसियों ने आसपास की छह इमारतों को खतरे की जद में होने की संभावना जताई है।
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दरअसल, सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर नोएडा प्राधिकरण, सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीबीआरआई), सुपरटेक के अलावा तीन एजेंसियां, एक सलाहकार केवल इस बात पर दिनरात काम कर रहे हैं कि ट्विन टावर को गिराने के लिए क्या करना होगा। इस बाबत कई बैठकें हो चुकी हैं, लेकिन अब तक टावर गिराने की तकनीक पर किसी तरह की आमराय नहीं बनी है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर ब्लास्ट तकनीक से इसे गिराया जाता है तो आसपास की इमारतों को खतरा होगा। इसमें सबसे नजदीकी छह इमारतें 33 मीटर के दायरे में हैं, जिन्हें सबसे ज्यादा खतरा होने की संभावना जताई जा रही है।
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भूमिगत गैस पाइप लाइन की सबसे ज्यादा चिंता
एमराल्ड कोर्ट के पास से एक भूमिगत गैस पाइपलाइन है। एजेंसियों का कहना है कि जीपीआर टेस्टिंग से यह पता लगाना होगा कि यह कितनी गहराई में है। अगर ज्यादा गहराई में पाइपलाइन है तो कोई खतरा नहीं होगा। अगर यह कम गहराई होगी तो फिर इसका विकल्प सोचना होगा। इस पाइपलाइन की सुरक्षा भी बेहद अहम है।
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दूसरी भूमिगत लाइनों पर भी पड़ेगा असर
जीपीआर टेस्ट से यह पता लगाना होगा कि बिजली, पानी सहित अन्य लाइनों का जाल वहां से कितनी दूरी पर है। साथ ही, कितनी गहराई में इसे डाला गया है। अगर ट्विन टावर का मलबा गिरता है तो इसका असर इन पर पड़ सकता है।
यह होता है एनडीटी टेस्ट
एनडीटी यानी नन-डिस्ट्रक्टिव टेस्टिंग। इस तरह के टेस्ट में वस्तु की मजबूती की जांच की जाती है। इसके अलावा यह किस मैटेरियल से बना हुआ है और कहां-कहां से जुड़ा हुआ है। इसका पता लगाया जाता है। इसके अलावा इसे तोड़ने के लिए कितनी शक्ति का प्रयोग किया जाना है। इसकी खासियत यह है कि इसमें वस्तु को बिना नष्ट किए आवश्यक जानकारी हासिल की जाती है।
यह होता है जीपीआर टेस्ट
जीपीआर यानी ग्राउंड पेनीट्रेटिंग रडार। इस तरह के टेस्ट में जमीन के भीतर की वस्तुओं की इमेजिंग के आधार पर पता लगाया जाता है। यह कंक्रीट के भीतर की वस्तुओं का भी पता लगा सकता है। इसके माध्यम से यह पता चलेगा कि अमुक क्षेत्र या इमारत के नीचे किन-किन लाइनों का जाल बिछा हुआ है।
दूसरे दिन भी एजेंसी ने किया निरीक्षण
ट्विन टावर का दूसरे दिन भी एक एजेंसी ने निरीक्षण किया। शनिवार को एडिफिस इंजीनियरिंग के पार्टनर उत्कर्ष मेहता और उनके अमेरिकी सहयोगी जो ब्रिंकमेन मौके पर पहुंचे। उन्होंने 32वीं मंजिल तक एक-एक बिंदु का निरीक्षण किया। इसमें 20 मंजिल के बाद की तकनीकी हालात की जांच भी की। अब आगामी 20 से 25 दिन में कार्ययोजना बनाकर पेश की जाएगी। एजेंसी ने मौके पर फोटो आदि भी लिए। सूत्रों का कहना है कि एजेंसियों ने आसपास की सोसाइटियों का भी निरीक्षण किया और साइट प्लान मांगे हैं। इनका अध्ययन करने की बात कही गई है। इसके अलावा दूसरे सहयोगी जेनेसिस और अन्य की ओर से बिल्डर से जरूरी कागजात को भेजने की अपील की है, ताकि अंतिम तौर पर इसका बेहतर तरीके से अध्ययन किया जा सके।

प्राधिकरण नहीं देगा मामले में अतिरिक्त समय
प्राधिकरण की ओर से ट्विन टावर मामले में किसी तरह का अतिरिक्त समय बिल्डर को नहीं देने की योजना है। सूत्रों के मुताबिक बिल्डर की ओर से अब तक किए गए कार्यों की जानकारी देने के बाद भी प्राधिकरण खुश नहीं है। करीब दो माह में ट्विन टावर गिराने के मामले में अब तक कोई स्पष्ट राय नहीं बन पाई है। प्राधिकरण की ओर से इस मामले में कई बार बैठकें हो चुकी हैं, लेकिन अब तक कार्ययोजना पेश नहीं हुई। आखिरी बैठक में प्राधिकरण की सीईओ ने स्पष्ट तौर पर कहा कि पूरी कार्ययोजना के साथ ही बैठक के लिए आएं।
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