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Noida News: भ्रष्टाचार पर नकेल, मध्यस्थता निर्णयों की जांच करेगी समिति

Wed, 27 Aug 2025 07:55 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Wed, 27 Aug 2025 07:55 PM IST
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To curb corruption, committee will investigate arbitration awards
पीडब्ल्यूडी व सिंचाई विभाग के एक करोड़ रुपये से अधिक के मामलों की होगी समीक्षा
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मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने उच्चस्तरीय जांच समिति के सदस्यों के नाम तय किए
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20 साल के मध्यस्थता निर्णयों की होगी जांच

अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए उच्चस्तरीय समिति के गठन की घोषणा की है। यह समिति पीडब्ल्यूडी और सिंचाई व बाढ़ नियंत्रण विभाग में बीस साल में एक करोड़ रुपये या उससे अधिक के मध्यस्थता निर्णयों (आर्बिटेशन अवॉर्ड) की गहन जांच करेगी।

पीडब्ल्यूडी, आईएंडएफसी के अतिरिक्त मुख्य सचिव इस समिति की अध्यक्षता करेंगे जबकि लेखा परीक्षा नियंत्रक सदस्य व पीडब्ल्यूडी, आईएंडएफसी के अतिरिक्त महानिदेशक समिति के सदस्य सचिव होंगे। समिति को लेखा परीक्षा निदेशालय की दो टीमें और दोनों विभागों की आंतरिक वित्त टीमें सहयोग करेंगी। जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त लेखा परीक्षा टीमें भी शामिल की जाएंगी।
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मध्यस्थता निर्णयों से सरकार को बार-बार हुआ नुकसान
मुख्यमंत्री ने बताया कि समिति इन मध्यस्थता मामलों की संख्या, सरकार के खिलाफ गए निर्णयों, भुगतान की राशि और सरकारी नुकसान का वर्षवार व निर्णयवार ब्योरा तैयार करेगी। इसका उद्देश्य कानूनी विवादों से हुए वित्तीय नुकसान का आकलन करना और सार्वजनिक धन के दुरुपयोग को उजागर करना है। मध्यस्थता निर्णयों से सरकार को बार-बार आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
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बारापुला फेज-3 कॉरिडोर बड़ा उदाहरण
सीएम ने बारापुला फेज-3 कॉरिडोर का उदाहरण देते हुए बताया कि इस परियोजना में देरी व अनियमितताओं के कारण मध्यस्थता का मामला उठा। ठेकेदार के पक्ष में फैसला आने पर उसे 120 करोड़ रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया गया। भुगतान रुकने पर ठेकेदार ने हाईकोर्ट का रुख किया जिसने मई 2023 में पीडब्ल्यूडी को ब्याज व जीएसटी सहित 175 करोड़ रुपये चुकाने का आदेश दिया। ये भुगतान तत्कालीन आप सरकार की मंत्री आतिशी के कार्यकाल में हुआ।


अब सीधे कोर्ट सुलझाए जाएंगे विवाद
मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसी कई घटनाएं सामने आई हैं जिसके बाद अब ये समिति गठित की गई है। साथ ही, भविष्य में ऐसी अनियमितताओं को रोकने के लिए सरकार ने अनुबंधों से मध्यस्थता धाराएं हटाने का फैसला किया है। अब ठेकेदार और विभाग के बीच विवाद केवल कोर्ट में सुलझाए जाएंगे। यह कदम भ्रष्टाचार पर नकेल कसने और विकास कार्यों में पारदर्शिता लाने की दिशा में अहम साबित होगा।
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