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Noida News: एक्सपायरी डेट बदलकर कैंसर की दवा बेचते तीन गिरफ्तार

Mon, 24 Nov 2025 12:11 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Mon, 24 Nov 2025 12:11 AM IST
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Three arrested for selling cancer medicine with changed expiry date
गाजियाबाद। कैंसर मरीजों के जीवन से खिलवाड़ करने वाले गिरोह का खुलासा हुआ है। क्राइम ब्रांच और औषधि विभाग की टीम ने मामले में दवा कंपनी के मालिक समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोपी कैंसर की एक्सपायर दवाओं का लेबल बदलकर उनको बेचते थे। साथ ही सीजीएचएस पैनल से जुड़े मरीजों के लिए आने वाली दवाएं कम दाम में खरीद कर अधिक कीमत पर बेची जाती थीं। इस खेल में अस्पतालों की भी मिलीभगत का अंदेशा जताया जा रहा है।
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आरोपियों से पुलिस ने करीब 19 लाख रुपये कीमत की कैंसर की दवाएं, 8.85 लाख रुपये नकद और एसयूवी कार बरामद की है। जो दवाएं मिली हैं, उनमें कीटूडा, इनहरतू, गिफटिब, बिलिप्सा, कैसिट, जोलास्ता और नोवोटेक शामिल हैं। इनमें से कई एक्सपायर हो चुकी हैं। तीन के सैंपल गोरखपुर जांच के लिए भेजे गए हैं। सरकारी उपयोग के लिए जारी होने के बाद बाजार में इन दवाओं की बिक्री नहीं की जा सकती।
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एडीसीपी अपराध पीयूष सिंह ने बताया कि कैंसर की दवा की कालाबाजारी की सूचना के बाद टीम को सक्रिय किया गया था। इसके बाद शनिवार शाम मेरठ रोड पर डीपीएसजी के पास से कार से दवा लेकर जा रहे तीन आरोपियों को पकड़ा गया। इसमें ऑफिसर्स सिटी, राजनगर एक्सटेंशन निवासी विश्वास त्यागी, जगदीशपुरा आगरा के भगवती आशियाना का आकाश शर्मा और मुरादनगर का प्रिंस शामिल हैं। आरोपी गाजियाबाद की केयर हुड, दिल्ली चावड़ी बाजार की आरबी इंटरप्राइजेज और ओखला की नोविटा फार्मा से दवाएं लेते थे। दवा की सप्लाई में थ्राइवा, यतनेश और ब्रदर्स फार्मा के नाम सामने आए हैं। ये फार्मा कंपनी दिल्ली और मुंबई की हैं।
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मई 2025 में एक्सपायर हुई दवा मिली



कार्रवाई के दौरान मिली कैंसर के उपचार में दी जाने वाली नोवोटेक दवा की औषधि विभाग ने जांच की तो पता चला कि वह मई 2025 में एक्सपायर हो चुकी है। आरोपियों से पूछताछ की गई तो उन्होंने बताया कि एक्सपायर दवाओं से वह दिल्ली में बैठे साथियों की मदद से लेबल हटवाते थे। इसके बाद उन पर कंपनी के नाम के साथ फर्जी एक्सपायरी डेट डालकर बाहर बेच देते थे। औषधि निरीक्षक वैभव बब्बर ने बताया कि एक्सपायर दवा लेने से बीमारी में कोई लाभ नहीं होता। अगर दवा गलत तरीके से स्टोर की गई है तो सेहत के लिए खतरनाक भी हो सकती है।



देश में कई जगह सप्लाई


आरोपी विश्वास त्यागी ने पुलिस को बताया कि इन दवाओं को वह विभिन्न अस्पतालों से सीजीएचएस के लिए फर्जी मांग तैयार कर लेता था। इसमें कीटूडा इंजेक्शन भी शामिल है। बाजार में इसकी एक वायल 2.16 लाख रुपये में मिलती है, जबकि आरोपियों को यह महज 20 हजार रुपये में मिल जाती थी। यह पूरा कार्य आकाश शर्मा संभालता था। दवाओं को देश के कई हिस्सों में स्थानीय फर्मों की मदद से सप्लाई किया जाता था।

पहले मेडिसिन हब नाम से फर्म चलाता था आरोपी विश्वास



पुलिस के अनुसार, विश्वास राजनगर एक्सटेंशन में मेडिसिन हब नाम से फर्म चलाता था। 2022 में उसकी सप्लाई की गई कैंसर की दवा में कमी पाई गई और उससे महाराष्ट्र में एक कैंसर मरीज की मौत हो गई। इस मामले में विश्वास के खिलाफ वाद दायर किया गया था। अब कैंसर की दवाओं की कालाबाजारी और एक्सपायर दवाओं को बेचने की बात सामने आने पर औषधि विभाग की सक्रियता पर सवाल खड़े हो गए हैं। हालांकि, औषधि निरीक्षक आशुतोष मिश्र ने बताया कि इस मामले में नवंबर 2023 में वाद दायर किया गया था। इसके बाद से विश्वास का ऑफिस बंद है। वह म्यूजिक वीडियो प्रोड्यूस कर रहा था। साथ ही गुपचुप तरीके से दवा सप्लाई के नेटवर्क से जुड़ा था। टीम उसके पीछे थी, तभी यह जानकारी सामने आई और उस पर कार्रवाई की गई।
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