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अफसर को धमकाते हुए कहा- सीएमओ को टीकाकरण बताना जरूरी नहीं
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नोएडा (गौरव शर्मा)। नियमों को ताक पर रखकर कोरोना की नई वैक्सीन का गलत तरीके से टीकाकरण करने के मामले में आरोपियों के हौसले इस कदर बुलंद थे कि मंगलवार शाम चार बजे जांच करने पहुंची स्वास्थ्य विभाग की टीम ने कहा कि सीएमओ कार्यालय से जांच करने आए हैं। इसके जवाब में टीकाकरण में जुटे कर्मियों ने स्वास्थ्य विभाग के अफसरों को धमकाते हुए कहा कि टीकाकरण का सीएमओ को बताना जरूरी नहीं है।
आप अपना काम करें। इस पर टीम के सदस्य बिफर गए। उन्होंने टीकाकरण स्वीकृति संबंधी दस्तावेज दिखाने को कहा तो लैब के कर्मियों ने भारत सरकार का प्रमाण पत्र दिखाया, लेकिन इस पर न तो भारत सरकार के अधिकृत अधिकारी के हस्ताक्षर थे, न ही कोई मुहर थी। इसके बाद जांच टीम को शक हुआ तो सूचना सीएमओ, उप जिला अधिकारी, औषधि निरीक्षक को दी गई। इसके बाद कार्रवाई आगे बढ़ी। अफसरों ने बताया कि उन्हें मंगलवार दोपहर करीब 12 बजे एक होम्योपैथी डॉक्टर के दो फोटो मिले। इसमें वह टीका लगवाता दिख रहा है। उसने लिखा कि कोरोना वैक्सीन लग गई है। इसके बाद विभाग सख्त हुआ।
स्वास्थ्य मंत्री ने सीएमओ से किया जवाब तलब
प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री जय प्रताप सिंह ने फोन कर पूरे मामले में सीएमओ डॉ. दीपक ओहरी से जवाबतलब किया है। टीकाकरण अवैध तरीके से चल रहा था। स्वास्थ्य विभाग के अफसर इसे भांप नहीं पाए। ऐसे में इस वैक्सीन के दुष्प्रभाव में कई लोगों की जान पर बन सकती थी। लिहाजा, कई अफसरों पर कार्रवाई हो सकती है।
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560 लोगों को लगना था टीका
औषधि निरीक्षक वैभव बब्बर ने बताया कि उन्हें मौके से 270 वॉयल मिलीं। इनमें से करीब 10 का इस्तेमाल हो गया था। एक वॉयल से दो लोगों टीका लगाया गया। ऐसे में सभी वॉयल से 560 लोगों को टीका लगाने की संभावना थी। बताया गया है कि गाजियाबाद में भी इसी तरह का टीकाकरण होने की जानकारी अफसरों को मिली है।
फ्लोरिस अस्पताल की होगी जांच
औषधि निरीक्षक ने बताया कि पूरे मामले से प्रदेश के औषधि निरीक्षक को अवगत करा दिया गया है। वहां से सूचना भारत सरकार के औषधि निरीक्षक को दी गई है। भारत सरकार के औषधि निरीक्षक की किसी टीके के क्लीनिकल ट्रायल की जांच में अहम भूमिका होती है। वे और हम फ्लोरिस अस्पताल की जांच करेंगे। संज्ञान में आया है कि अस्पताल को ही क्लीनिकल ट्रायल की अनुमति दी गई थी, जबकि उसी दवा का ट्रायल फर्जी तरीके से दादरी की लैब में शुरू करा दिया गया। जांच में देखा जाएगा कि अस्पताल में कैडिला दवा के टीकाकरण की स्थिति क्या है। कैसे कुछ लोगों ने लैब में ट्रायल शुरू करा दिया। अस्पताल प्रबंधन से भी इस संदर्भ में पूछताछ की जाएगी।
स्वास्थ्य विभाग कराएगा विजिलेंस जांच
सीएमओ डॉ. दीपक ओहरी ने बताया कि मामला गंभीर है। सभी एसीएमओ, डिप्टी सीएमओ, स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी को निर्देश जारी कर दिए हैं कि इस तरीके से कोई जानकारी मिले तो तत्काल जांच कर कार्रवाई की जाए। विभाग शासन की मदद के पूरे मामले की विजिलेंस जांच भी कराएगा। इसमें औषधि निरीक्षक की भी मदद ली जाएगी। किसी अफसर की लापरवाही मिलने पर कार्रवाई तय है।
टीका लगवाने वालों से पूछा जाएगा हाल
स्वास्थ्य विभाग के संज्ञान में आया है कि 19 लोग टीका लगवा चुके हैं, जबकि एक व्यक्ति ही अफसरों को टीका लगवाता मिला है। अब स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी शेष 18 टीका लगवाने वालों का डाटा जुटाएंगे। उनका मोबाइल नंबर लेकर सेक्टर-62 के कोरोना कंट्रोल रूम में दिया जाएगा। कंट्रोल में तैनात कर्मी फोन कर पूछेंगे कि टीका क्यों लगवाया और किसने प्रेरित किया। टीके का किसी तरह का दुष्प्रभाव तो नहीं हुआ।
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आप अपना काम करें। इस पर टीम के सदस्य बिफर गए। उन्होंने टीकाकरण स्वीकृति संबंधी दस्तावेज दिखाने को कहा तो लैब के कर्मियों ने भारत सरकार का प्रमाण पत्र दिखाया, लेकिन इस पर न तो भारत सरकार के अधिकृत अधिकारी के हस्ताक्षर थे, न ही कोई मुहर थी। इसके बाद जांच टीम को शक हुआ तो सूचना सीएमओ, उप जिला अधिकारी, औषधि निरीक्षक को दी गई। इसके बाद कार्रवाई आगे बढ़ी। अफसरों ने बताया कि उन्हें मंगलवार दोपहर करीब 12 बजे एक होम्योपैथी डॉक्टर के दो फोटो मिले। इसमें वह टीका लगवाता दिख रहा है। उसने लिखा कि कोरोना वैक्सीन लग गई है। इसके बाद विभाग सख्त हुआ।
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स्वास्थ्य मंत्री ने सीएमओ से किया जवाब तलब
प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री जय प्रताप सिंह ने फोन कर पूरे मामले में सीएमओ डॉ. दीपक ओहरी से जवाबतलब किया है। टीकाकरण अवैध तरीके से चल रहा था। स्वास्थ्य विभाग के अफसर इसे भांप नहीं पाए। ऐसे में इस वैक्सीन के दुष्प्रभाव में कई लोगों की जान पर बन सकती थी। लिहाजा, कई अफसरों पर कार्रवाई हो सकती है।
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560 लोगों को लगना था टीका
औषधि निरीक्षक वैभव बब्बर ने बताया कि उन्हें मौके से 270 वॉयल मिलीं। इनमें से करीब 10 का इस्तेमाल हो गया था। एक वॉयल से दो लोगों टीका लगाया गया। ऐसे में सभी वॉयल से 560 लोगों को टीका लगाने की संभावना थी। बताया गया है कि गाजियाबाद में भी इसी तरह का टीकाकरण होने की जानकारी अफसरों को मिली है।
फ्लोरिस अस्पताल की होगी जांच
औषधि निरीक्षक ने बताया कि पूरे मामले से प्रदेश के औषधि निरीक्षक को अवगत करा दिया गया है। वहां से सूचना भारत सरकार के औषधि निरीक्षक को दी गई है। भारत सरकार के औषधि निरीक्षक की किसी टीके के क्लीनिकल ट्रायल की जांच में अहम भूमिका होती है। वे और हम फ्लोरिस अस्पताल की जांच करेंगे। संज्ञान में आया है कि अस्पताल को ही क्लीनिकल ट्रायल की अनुमति दी गई थी, जबकि उसी दवा का ट्रायल फर्जी तरीके से दादरी की लैब में शुरू करा दिया गया। जांच में देखा जाएगा कि अस्पताल में कैडिला दवा के टीकाकरण की स्थिति क्या है। कैसे कुछ लोगों ने लैब में ट्रायल शुरू करा दिया। अस्पताल प्रबंधन से भी इस संदर्भ में पूछताछ की जाएगी।
स्वास्थ्य विभाग कराएगा विजिलेंस जांच
सीएमओ डॉ. दीपक ओहरी ने बताया कि मामला गंभीर है। सभी एसीएमओ, डिप्टी सीएमओ, स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी को निर्देश जारी कर दिए हैं कि इस तरीके से कोई जानकारी मिले तो तत्काल जांच कर कार्रवाई की जाए। विभाग शासन की मदद के पूरे मामले की विजिलेंस जांच भी कराएगा। इसमें औषधि निरीक्षक की भी मदद ली जाएगी। किसी अफसर की लापरवाही मिलने पर कार्रवाई तय है।
टीका लगवाने वालों से पूछा जाएगा हाल
स्वास्थ्य विभाग के संज्ञान में आया है कि 19 लोग टीका लगवा चुके हैं, जबकि एक व्यक्ति ही अफसरों को टीका लगवाता मिला है। अब स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी शेष 18 टीका लगवाने वालों का डाटा जुटाएंगे। उनका मोबाइल नंबर लेकर सेक्टर-62 के कोरोना कंट्रोल रूम में दिया जाएगा। कंट्रोल में तैनात कर्मी फोन कर पूछेंगे कि टीका क्यों लगवाया और किसने प्रेरित किया। टीके का किसी तरह का दुष्प्रभाव तो नहीं हुआ।