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Noida News: दो से ढाई हजार में बनाते थे फर्जी दस्तावेज, नौ गिरफ्तार
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फोटो:-- -- -- -- -- -- -- -
एमबीए, बीसीए, बीए, बीटेक और बीकाॅम पास हैं आरोपी, दो बैंक कर्मचारी भी शामिल
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। बिसरख कोतवाली पुलिस ने जन सुविधा केंद्र पर फर्जी दस्तावेज बनाने वाले गिरोह का खुलासा कर 9 लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों का कार्यालय ग्रेनो वेस्ट के महागुन मार्ट में छह साल से चल रहा था। ये फर्जी जन्म व आय प्रमाण पत्र, पासपोर्ट, आधार कार्ड,पैन कार्ड, रेंट एग्रीमेंट, निवास प्रमाण पत्र, संघ लोक सेवा आयोग का प्रवेश पत्र बना रहे थे। आरोपियों में एक बैंक का कंप्यूटर ऑपरेटर और सुरक्षाकर्मी भी शामिल हैं।
इनकी पहचान ग्रेनो वेस्ट की साया जिऑन सोसाइटी निवासी अजय कुमार जायसवाल, सादुल्लापुर गांव निवासी आकाश और चिपियाना खुर्द निवासी अमित विश्वकर्मा, हापुड़ के बमहेटा गांव निवासी अंकित कुमार, बिहार मुजफ्फरपुर के रामपुर दयाल गांव निवासी दीपक, बुलंदशहर के किशनपुर गांव निवासी विशेष कुमार, गाजियाबाद के डूंडाहेड़ा के आशुतोष पांडे, अलीगढ़ के शाहपुर गांव निवासी सुखपाल और गईय्यनपुर गांव निवासी सानू के रूप में हुई है। ये दो से ढाई हजार रुपये एक दस्तावेज बनाने के लिए लेते थे। इनकी एक महीने की आमदनी सात लाख रुपये से अधिक थी। एक से दो दिन में सभी तरह के दस्तावेज बनाकर दे रहे थे।
डीसीपी सेंट्रल नोएडा शक्ति मोहन अवस्थी ने बताया कि एक व्यक्ति की शिकायत पर ग्रेनो वेस्ट के महागुन मार्ट में संचालित वाईओवाई कैप्टिल इंफ्रा नाम से एक कार्यालय की जांच की तो जन सुविधा केंद्र का लाइसेंस मिला। जांच में खुलासा हुआ कि वहां फर्जी दस्तावेज बनाए जा रहे हैं। पुलिस ने जांच के बाद सरगना समेत नौ लोगों को गिरफ्तार किया। एमबीए पास अजय कुमार गिरोह का सरगना है। वह छह साल से यह केंद्र चला रहा था। बाकी आरोपी वहां काम करते थे। इनमें कोई बीसीए तो कोई बीए, बीटेक, बीकाॅम पास है। सभी को मासिक वेतन मिलता था, लेकिन अजय सभी को दस्तावेज तैयार करने का एक लक्ष्य देता था, जो रोजाना 15 से 20 दस्तावेज तैयार करने का होता था। वेतन के अलावा हर दस्तावेज पर कमीशन भी दिया जाता है।
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पुलिस ने बताया कि आरोपी फर्जी दस्तावेज तैयार करने के लिए इंडप्रिंट डॉट शॉप नाम की वेबसाइट का प्रयोग करते थे। फर्जी वेबसाइट भी तैयार की थी, जो सरकारी वेबसाइट से मिलती-जुलती है। उसी का लिंक आवेदक को देकर प्रमाण पत्र को सत्यापित कराने का दावे करते थे। वेबसाइट देखकर आवेदकों को शक नहीं हुआ, लेकिन आरोपी केवल एक प्रारुप को एडिट कर प्रमाण पत्र जारी करते थे। आरोपियों के पास से छह सीपीयू, दो लैपटॉप, एक रेंट एग्रीमेंट, फर्जी दो जन्म प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र, फर्जी पासपोर्ट, एसएससी परीक्षा का एडमिट कार्ड, पेटीएम मशीन, क्रेडिट कार्ड, सात डायरी, मोहर, 10 मोबाइल, बिजली के बिल, निवास प्रमाण पत्र, आधार कार्ड, मृत्यु प्रमाण पत्र बरामद हुए हैं।
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बैंक कर्मचारी कराते थे केवाईसी
पुलिस ने बताया कि आरोपी आकाश इंडसइंड बैंक में कंप्यूटर ऑपरेटर है और सुखपाल सुरक्षाकर्मी है। दोनों फर्जी दस्तावेज के आधार पर बैंकों में केवाईसी कराते थे। आरोपी लोगों की मांग के अनुसार फर्जी रेंट एग्रीमेंट, आईजीएल बिल और पासपोर्ट में भी बदलाव करते थे। सुखपाल की बेटी ज्योति अजय के साथ काम करती थी। वह पिता के साथ मिलकर बैंक से केवाईसी करा रही थी, जो अभी फरार है।
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दस्तावेजों का सत्यापन कराएगी पुलिस: पुलिस अफसरों ने बताया कि जन सुविधा केंद्र से जारी सभी प्रमाण पत्र का डाटा एकत्रित किया जा रहा है। इन सभी का सत्यापन कराया जाएगा। गिरोह बच्चों का भी आधार कार्ड बना रहा था। जो काम 20 से 25 दिन में होता है। उसे दो से तीन दिन में कर रहे थे।
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गाजियाबाद तक फैला था गिरोह: पुलिस ने बताया कि आशुतोष अजय के साथ काम करता था, लेकिन हाल ही में उसने गाजियाबाद के क्रॉसिंग रिपब्लिक में दुकान खोल ली थी, जो वहां से अजय को काम देता था। अजय ने 17 साल तक एक बैंक में काम किया है। वहां से फाइनेंस की अनुभव मिला था। आरोपी निवेश के तरीके भी बताता था।
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ऐसे खुला राज
शिकायतकर्ता ने आरोपियों से अपने बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र 2200 रुपये में बनवाया था, जो स्कूल में सत्यापन में फर्जी निकला। स्कूल ने शिकायतकर्ता को इसकी जानकारी दी। पीड़ित ने अपने स्तर से जांच की और नया प्रमाण पत्र बनवाया। जिसके बाद गिरोह की हकीकत का राज सामने आया।
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एमबीए, बीसीए, बीए, बीटेक और बीकाॅम पास हैं आरोपी, दो बैंक कर्मचारी भी शामिल
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। बिसरख कोतवाली पुलिस ने जन सुविधा केंद्र पर फर्जी दस्तावेज बनाने वाले गिरोह का खुलासा कर 9 लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों का कार्यालय ग्रेनो वेस्ट के महागुन मार्ट में छह साल से चल रहा था। ये फर्जी जन्म व आय प्रमाण पत्र, पासपोर्ट, आधार कार्ड,पैन कार्ड, रेंट एग्रीमेंट, निवास प्रमाण पत्र, संघ लोक सेवा आयोग का प्रवेश पत्र बना रहे थे। आरोपियों में एक बैंक का कंप्यूटर ऑपरेटर और सुरक्षाकर्मी भी शामिल हैं।
इनकी पहचान ग्रेनो वेस्ट की साया जिऑन सोसाइटी निवासी अजय कुमार जायसवाल, सादुल्लापुर गांव निवासी आकाश और चिपियाना खुर्द निवासी अमित विश्वकर्मा, हापुड़ के बमहेटा गांव निवासी अंकित कुमार, बिहार मुजफ्फरपुर के रामपुर दयाल गांव निवासी दीपक, बुलंदशहर के किशनपुर गांव निवासी विशेष कुमार, गाजियाबाद के डूंडाहेड़ा के आशुतोष पांडे, अलीगढ़ के शाहपुर गांव निवासी सुखपाल और गईय्यनपुर गांव निवासी सानू के रूप में हुई है। ये दो से ढाई हजार रुपये एक दस्तावेज बनाने के लिए लेते थे। इनकी एक महीने की आमदनी सात लाख रुपये से अधिक थी। एक से दो दिन में सभी तरह के दस्तावेज बनाकर दे रहे थे।
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डीसीपी सेंट्रल नोएडा शक्ति मोहन अवस्थी ने बताया कि एक व्यक्ति की शिकायत पर ग्रेनो वेस्ट के महागुन मार्ट में संचालित वाईओवाई कैप्टिल इंफ्रा नाम से एक कार्यालय की जांच की तो जन सुविधा केंद्र का लाइसेंस मिला। जांच में खुलासा हुआ कि वहां फर्जी दस्तावेज बनाए जा रहे हैं। पुलिस ने जांच के बाद सरगना समेत नौ लोगों को गिरफ्तार किया। एमबीए पास अजय कुमार गिरोह का सरगना है। वह छह साल से यह केंद्र चला रहा था। बाकी आरोपी वहां काम करते थे। इनमें कोई बीसीए तो कोई बीए, बीटेक, बीकाॅम पास है। सभी को मासिक वेतन मिलता था, लेकिन अजय सभी को दस्तावेज तैयार करने का एक लक्ष्य देता था, जो रोजाना 15 से 20 दस्तावेज तैयार करने का होता था। वेतन के अलावा हर दस्तावेज पर कमीशन भी दिया जाता है।
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पुलिस ने बताया कि आरोपी फर्जी दस्तावेज तैयार करने के लिए इंडप्रिंट डॉट शॉप नाम की वेबसाइट का प्रयोग करते थे। फर्जी वेबसाइट भी तैयार की थी, जो सरकारी वेबसाइट से मिलती-जुलती है। उसी का लिंक आवेदक को देकर प्रमाण पत्र को सत्यापित कराने का दावे करते थे। वेबसाइट देखकर आवेदकों को शक नहीं हुआ, लेकिन आरोपी केवल एक प्रारुप को एडिट कर प्रमाण पत्र जारी करते थे। आरोपियों के पास से छह सीपीयू, दो लैपटॉप, एक रेंट एग्रीमेंट, फर्जी दो जन्म प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र, फर्जी पासपोर्ट, एसएससी परीक्षा का एडमिट कार्ड, पेटीएम मशीन, क्रेडिट कार्ड, सात डायरी, मोहर, 10 मोबाइल, बिजली के बिल, निवास प्रमाण पत्र, आधार कार्ड, मृत्यु प्रमाण पत्र बरामद हुए हैं।
बैंक कर्मचारी कराते थे केवाईसी
पुलिस ने बताया कि आरोपी आकाश इंडसइंड बैंक में कंप्यूटर ऑपरेटर है और सुखपाल सुरक्षाकर्मी है। दोनों फर्जी दस्तावेज के आधार पर बैंकों में केवाईसी कराते थे। आरोपी लोगों की मांग के अनुसार फर्जी रेंट एग्रीमेंट, आईजीएल बिल और पासपोर्ट में भी बदलाव करते थे। सुखपाल की बेटी ज्योति अजय के साथ काम करती थी। वह पिता के साथ मिलकर बैंक से केवाईसी करा रही थी, जो अभी फरार है।
दस्तावेजों का सत्यापन कराएगी पुलिस: पुलिस अफसरों ने बताया कि जन सुविधा केंद्र से जारी सभी प्रमाण पत्र का डाटा एकत्रित किया जा रहा है। इन सभी का सत्यापन कराया जाएगा। गिरोह बच्चों का भी आधार कार्ड बना रहा था। जो काम 20 से 25 दिन में होता है। उसे दो से तीन दिन में कर रहे थे।
गाजियाबाद तक फैला था गिरोह: पुलिस ने बताया कि आशुतोष अजय के साथ काम करता था, लेकिन हाल ही में उसने गाजियाबाद के क्रॉसिंग रिपब्लिक में दुकान खोल ली थी, जो वहां से अजय को काम देता था। अजय ने 17 साल तक एक बैंक में काम किया है। वहां से फाइनेंस की अनुभव मिला था। आरोपी निवेश के तरीके भी बताता था।
ऐसे खुला राज
शिकायतकर्ता ने आरोपियों से अपने बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र 2200 रुपये में बनवाया था, जो स्कूल में सत्यापन में फर्जी निकला। स्कूल ने शिकायतकर्ता को इसकी जानकारी दी। पीड़ित ने अपने स्तर से जांच की और नया प्रमाण पत्र बनवाया। जिसके बाद गिरोह की हकीकत का राज सामने आया।