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देश के सबसे बड़े एमआरओ सेंटर का काम जल्द होगा शुरू
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ग्रेटर नोएडा। जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट परिसर में देश के सबसे बड़े मेंटेनेंस, रिपेयरिंग और ओवरहॉलिंग (एमआरओ) सेंटर निर्माण का काम जल्द शुरू होगा। दूसरे चरण में 1365 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण होगा। इसी जमीन पर एक रनवे और एमआरओ के निर्माण किया जाएगा। यहां देश और विदेश से आने वाले विमान सेवा ले सकेंगे। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड के अधिकारियों का कहना है कि दूसरे चरण में जमीन अधिग्रहण के बाद यही सबसे बड़ा काम होगा। एमआरओ को बनाने के लिए यात्रियों की संख्या आदि को लेकर किसी तरह का गतिरोध नहीं होगा।
इससे निर्माण पर किसी तरह की बाधा नहीं आएगी। उनका कहना है कि यह पूरी तरह से स्वतंत्र होगा। यहां विमानों की मेंटेनेंस, रिपेयरिंग और अन्य कार्य किए जाएंगे। पहले चरण में 1334 हेक्टेयर जमीन पर भी एक रनवे और एमआरओ का निर्माण होना है, लेकिन एमआरओ छोटा होगा। यह करीब 40 एकड़ में ही बनाया जाएगा। जबकि, दूसरे चरण में एमआरओ इससे कई गुना ज्यादा बड़ा होगा। इससे पहले नागपुर में एक एमआरओ बनाया गया है। वह भी काफी छोटा है। अधिकारियों का कहना है कि इसके लिए भी बिड निकालकर कंपनी का चयन किया जाएगा। जमीन अधिग्रहण जल्द से जल्द करते हुए दोनों कार्यों को एक साथ कराने की योजना है।
करीब दो किमी की दूरी पर होगा दूसरा रनवे
एयरपोर्ट के निर्माण की शुरुआत एक रनवे से होगी। दूसरे चरण में दूसरा रनवे तैयार होगा। यह पहले रनवे से करीब दो किमी की दूरी पर होगा। पहला रनवे करीब 3900 मीटर लंबा होगा। दूसरा रनवे इसके बगल में होगा। इसके अलावा एमआरओ सेंटर के लिए अलग से स्थान होगा। यह मुख्य रनवे से काफी अलग होगा। अधिकारियों का कहना है कि यहां के विमानों को एमआरओ की सुविधा लेने के लिए कोलंबो या फिर सिंगापुर जाता पड़ता है, लेकिन जेवर में बनने वाले एमआरओ सेंटर से यह परेशानी दूर हो जाएगी।
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इससे निर्माण पर किसी तरह की बाधा नहीं आएगी। उनका कहना है कि यह पूरी तरह से स्वतंत्र होगा। यहां विमानों की मेंटेनेंस, रिपेयरिंग और अन्य कार्य किए जाएंगे। पहले चरण में 1334 हेक्टेयर जमीन पर भी एक रनवे और एमआरओ का निर्माण होना है, लेकिन एमआरओ छोटा होगा। यह करीब 40 एकड़ में ही बनाया जाएगा। जबकि, दूसरे चरण में एमआरओ इससे कई गुना ज्यादा बड़ा होगा। इससे पहले नागपुर में एक एमआरओ बनाया गया है। वह भी काफी छोटा है। अधिकारियों का कहना है कि इसके लिए भी बिड निकालकर कंपनी का चयन किया जाएगा। जमीन अधिग्रहण जल्द से जल्द करते हुए दोनों कार्यों को एक साथ कराने की योजना है।
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करीब दो किमी की दूरी पर होगा दूसरा रनवे
एयरपोर्ट के निर्माण की शुरुआत एक रनवे से होगी। दूसरे चरण में दूसरा रनवे तैयार होगा। यह पहले रनवे से करीब दो किमी की दूरी पर होगा। पहला रनवे करीब 3900 मीटर लंबा होगा। दूसरा रनवे इसके बगल में होगा। इसके अलावा एमआरओ सेंटर के लिए अलग से स्थान होगा। यह मुख्य रनवे से काफी अलग होगा। अधिकारियों का कहना है कि यहां के विमानों को एमआरओ की सुविधा लेने के लिए कोलंबो या फिर सिंगापुर जाता पड़ता है, लेकिन जेवर में बनने वाले एमआरओ सेंटर से यह परेशानी दूर हो जाएगी।
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